गुब्बारा सिद्धांत

पिछले सप्ताह हमारे यहाँ एक अद्भुत ‘ब्लैक लोटस चैम्पियनस ओरींटेशन इवेंट’ था। यह कार्यक्रम मात्र आमंत्रित जनों के लिए था। सभागृह में उपस्थित जन  उदार विचारों वाले थे । इतने सारे  लोग  जो कि करुणा  के विस्तार हेतु प्रतिबद्ध हों को देखना हृदय स्पर्शी था। मेरा विश्वास है कि ,करुणा का अभ्यास न केवल हमारे समाज पर उत्कृष्ट प्रभाव डालता है , बल्कि यह आपके जीवन की दिशा  को पूर्णतया परिवर्तित कर देता है, और यह मेरे अनुभव और अवलोकन पर आधारित है । सरल रूप से कहा जाए  तो यह ख़ुशी का संक्षिप्त मार्ग है। चाहे कोई भी परिस्थिति कितनी ही  अन्धकारमय क्यों न हो, मात्र एक करुणा की  किरण हो और आप स्वयं को प्रकाश से पूर्ण स्थान में पाएँगे।

एक प्रश्न जो मुझसे से अक्सर  पूछा  जाता है  कि एक संस्था के विषय में करुणा का प्रयोग किस प्रकार किया जाए।आपमें से अधिकांश काम पर जाते हैं, आपमें से कुछ समूह और विभाग के और यहाँ तक कि पूरी कम्पनी के प्रभारी हैं। तो आप करुणा का कार्य कैसे कर सकेंगे? मैं आपके साथ एक कहानी साझा करता हूँ, जो मैने कई वर्ष पूर्व पढ़ी थी। मानव मस्तिष्क कितनी  अद्भुत चीज़ है। सही प्रश्न पूँछिए और यह आपको अधिकांश कठिन समस्याओं को हल करने में मदद करेगा।हमारे मन हल ढूँढ  निकालने के लिए बना है।पाँच मिनिट पहले मुझे नहीं पता था कि मैं क्या लिखने वाला हूँ लेकिन जिस क्षण  मैने लिखना आरम्भ किया यह विचार  मेरे सिर में कौंध गया।और इसी के कारण  मैं आपको गब्बारों की कहानी सुनाने को प्रेरित हुआ।

“एक बड़ा  संगठन  अपने  भिन्न समूहों के साथ विश्वास और सामंजस्य की कमी से  ज़ूझ रही थी  । कम्पनी की संस्कृति ऐसी हो गयी थी  कि वहाँ न केवल नकारात्मकता की स्थायी भावना  थी  वरन टीम  अस्वस्थ आंतरिक राजनीति और प्रतियोगिता में उलझी रहती थी, जिसके कारण वहाँ काम करने वाले  कर्मचारी  एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे  रहते थे । उनके बीच यह विश्वास बन गया था कि आपको  हर क़ीमत पर स्वयं की रक्षा करनी है।

विभिन्न विभागों के प्रमुखों के साथ एक दिन व्यतीत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि शायद कम्पनी की पुनर्रचना करने की आवश्यकता है, एक निपुण कूटनीतिज्ञ  को अतिथि वक़्ता के रूप में आमंत्रित किया  जाता है । पचास से अधिक वरिष्ठ प्रबंधकों को  इस कार्यशाला हेतु चुना गया।

कूटनीतिज्ञ ने ख़ाली कमरे की ओर संकेत करते हुए उनसे कहा मैं आपमें से सभी को एक एक गुब्बारा और मार्कर दूँगा । आपको इस ग़ुब्बारे को फुलाना है और इस पर अपना पूरा  नाम लिखकर  इसे ख़ाली कमरे में छोड़ देना है। हम आपका समय रिकार्ड करने के लिए एक स्टॉप वॉच का प्रयोग करेंगे।

शीघ्र ही हर कोई गुब्बारों में हवा भरने,गाँठ लगाने और अपने नाम लिखने में व्यस्त था ।कुछ  ग़ुब्बारे हवा भरने की  क्रियाविधि  में फट गए और प्रतिभागियों ने इसके लिए अतिरिक्त समय लिया।एक बार जब सारे ग़ुब्बारे कमरे में छोड़ दिए गए तो , प्रवक्ता ने उनको अगला काम दिया और कहा कि,  वे एक एक करके अंदर जाएँ अपना गुब्बारा खोजें,  और यह समय भी  स्टॉप वॉच द्वारा रिकोर्ड  किया जाता रहेगा ।

कुछ प्रतिभागी भाग्यशाली थे जिन्होंने  एक या दो मिनिट में अपना गुब्बारा खोज  लिया परंतु अधिकांश को ज़्यादा समय लगा। कूटनीतिज्ञ  ने उन सबको बीच में ही  रोक दिया और उनसे अपना गुब्बारा एक बार पुनः कमरे में रखने को कहा।

फिर उसने पूछा “ क्या आप सोचते हैं कि इन ग़ुब्बारे को खोजने का और अधिक  अच्छा  तरीक़ा हो सकता  है?”

कुछ ने सुझाव दिया कि ग़ुब्बारे ४ या ५ रंगों में नियत हों जो विभिन्न विभागों का प्रस्तुति कारण करें और उसके बाद  व्यक्ति अधिक से अधिक १० गुब्बारों को खोजना होगा। अन्य प्रबंधकों ने सुझाव दिया कि उनको अच्छी तरह अलग करने के लिए और अधिक कमरे प्रयोग किए जा  सकते हैं, ऐसा करने से उनको खोजना आसान होगा। ये कुछ संभाव्य विकल्प थे।

प्रवक्ता ने कहा यदि हम नियमों को थोड़ा बदल दें तो कैसा रहे? अब आप कृपया  एक एक करके कमरे में जाइए कोई भी गुब्बारा उठा लें और जो नाम इस पर लिखा हुआ है उसकी  घोषणा करें और इसे जो  आगे आये उस व्यक्ति को दे दें ।”

पाँच मिनिट के बाद प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में उसका सही  गुब्बारा था।

कूटनीतिज्ञ  ने कहा यह वह तरीक़ा है जो सहयोग  से काम करता है।प्रत्येक गुब्बारा जिस पर आपका नाम अंकित है वह आपके  उत्तरदायित्व के क्षेत्र ( समस्या के क्षेत्र) को अभिव्यक्त करता है लेकिन अच्छे  व्यवहार और करुणा के संयुक्त अभ्यास  से आप अपने उद्देश्य को शीघ्र और भली प्रकार  प्राप्त  करने में एक दूसरे की  सहायता कर  सकते हैं। अधिक कमरों का प्रयोग  या गुब्बारों को अलग अलग करना हालाँकि सराहनीय है किंतु  इसके लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी।

एक प्रतिभागी  ने पूछा स्टॉप वॉच किस लिए थी ?”
यह बस एक शीघ्रता का प्रभाव उत्पन्न  करने के लिए थी, जिसकी आवश्यकता न थी । अनेक  बार प्रबंधक और समूह के सदस्य किसी उत्पाद के चारों ओर एक अनावश्यक और नकारात्मक तनाव का सृजन करते हैं। साथ साथ और  एक दूसरे के लिए कार्य करना विरुद्ध कार्य करने से अधिक  उत्पादक होता है। कुछ बुद्धिमान मस्तिष्क वालों के साथ काम करने और विभिन्न प्रोजेक्ट, कम्पनियों। और परियोजनाओं  के अनेक अवसरों में उनको आगे बढ़ने की अधिक सुविधा देने का मेरा स्वयं का अनुभव भी इसी प्रकार का है।

वह यह है कि सक्षम  व्यक्ति अत्यधिक  तेज़ी से चलने वाले  होते हैं , और वे जिस पर उनका  नाम अंकित है  उस ग़ुब्बारे को खोजने के लिए अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिए  अधिक प्रेरित होते हैं। आख़िरकार यही वह है जिस प्रकार हम  अनुकूलित होते हैं :  हर हाल में विजय प्राप्त करना। लेकिन वास्तविक नायक अच्छी तरह जानते हैं,  कि एक  सफल संगठन  बनाने के लिए   विशाल  बुद्धि सम्पन्न  मस्तिष्कों को साथ काम करने की आवश्यकता होती है। ऐसे नायक किसी भी गुब्बारे को खोजना और इसे सही व्यक्ति को थमा देने की संस्कृति को या अन्य शब्दों में कहा जाए तो अपने  उत्पाद के स्वामित्व को प्राप्त करना और अतीत की  व्यक्तिगत भिन्नताओं और मानसिक स्थितियों  की परिकल्पना की संयुक्त ज़िम्मेदारी लेने की संस्कृति को निर्मित करने हेतु  दूर तक जाते हैं।

सभी सफल संगठन ग्राहकों पर , बाहरी ओर केन्द्रित हैं। यही वह है कि कैसे महान उद्योग  सजीव, युवा और प्रगतिशील रहते  हैं।वे एक गुब्बारों से या विभिन्न आकारों और रंगों से भयभीत  नहीं होते ।

वे जानते  हैं कि जब तक सही लोग सही विधि का अनुकरण करते हुए  काम कर रहे हैं, तो कोई भी सपना सच हो सकता है। अक्सर कम्पनियाँ जो असफलता की  ओर अग्रसर होती हैं वे  संचालन , लोग तथा  कार्यालयीन राजनीति के  चारों ओर जो  आंतरिक मसले होते हैं उन पर  बहुत अधिक केन्द्रित होती हैं। ऐसी कम्पनियाँ धीरे धीरे कमज़ोर और बूढ़ी हो जाती हैं, और एक दिन नष्ट हो जाती हैं

आरम्भ से सही संस्कृति अपनाने से,   भयभीत न होकर प्रेरणा  के साथ आगे बढ़ने,भय को नहीं  प्रेम को अपनाने  के द्वारा , अनुकूलता को बढ़ाने और  मतभेदों को दूर करने से इसमें कमी आती है।

सूफ़ी कहानियों की छोटी सी पुस्तक जो कि निको नेरूडा ने लिखी है उसमें मैने नीचे दी गयी हास्य कथा पढ़ी थी।

“एक कोफ़ी हाउस में एक अजनबी एक हास्य कथा सुना रहा था और मुल्ला नसीरूद्दीन बड़े ध्यान से बैठा सुन रहा था। वह व्यक्ति चुटकुला सुनाते हुए विषय से पूरी तरह हट गया और असफल रहा । वहाँ बैठा कोई भी व्यक्ति हँसना तो दूर मुस्कुराया भी नहीं।  मुल्ला के अलावा (जो कि बहुत ज़ोर से हँसा ) और कोई नहीं  हंसा।

उसके मित्र ने पूछा मुल्ला तुमको किस बात पर हँसी आयी। हमें तो उस चुटकुले का सिर पैर भी समझ में नहीं आया।”

मुल्ला ने उत्तर दिया “ मुझे भी नहीं समझ नहीं आया। परंतु मैं हमेशा किसी भी चुटकुले को सुनने के बाद अवश्य हँसता हूँ। क्योंकि यदि तुम नहीं हँसोगे तो कहीं वह  उसे दोबारा न सुनाने लगे इसका ख़तरा रहता है।”

इसलिए यही संगठनों और जीवन में समस्याओं के साथ भी सामान्य रूप  ऐसा ही है। यदि  आप उनकी उपेक्षा करेंगे तो वे आपके पास वापस आना जारी रखेंगी। यदि प्रत्येक गुब्बारा एक सम्भावित  विषय का प्रतिनिधित्व करता है, आप कमरे में चाहे कितने ही  उत्साह से खोजने क्यों न जा रहे हों, जब तक आप उनको एक के बाद एक करके  हटाएँगे नहीं तब तक चुनौतियाँ हतोत्साहित  करती   रहेंगी।

जैसे कि सुन  ट्सू  ने कहा “सभी पुरुष उन  चालों  को देख सकते थे जिनके द्वारा मैने विजय प्राप्त की लेकिन जो कोई न  देख सका  वह कार्यनीति थी,जिसके द्वारा विजय विकसित हुई ।”

यही सारांश में ग़ुब्बारे का सिद्धांत है।यह संयुक्त ज्ञान को और  आश्चर्यजनक  रूप से सफल संगठनों की कूटनीतिक  सोच को अभिव्यक्त करता है

जो गुब्बारा आपके हाथ में है उसे सही व्यक्ति के हाथ में  थमाएँ। यह जिसके कारण हुआ है उसे श्रेय दें और आप  काम को हमेशा पूरा हुआ पाएँगे ।

शांति।

स्वामी