एक छोटी लड़की थी
जिसके बालों में नन्हा सा घूँघर था
ठीक उसके माथे के बीच में;
और जब वह अच्छी होती तब वह बहुत अच्छी होती,
और जब वह बुरी होती तब वह वीभत्स होती।

~ एच डब्ल्यू लोंगफेलो

हम सभी में अपनी विशिष्टताएं हैं। यह वे वस्तुएं हैं जो हमें घड़ी के समान चलायमान बनातीं हैं या असंतुष्ट करतीं हैं। न जाने कैसे, हमारी मनोदशा परिवर्तित हो जाती है और नकारात्मक विचार हमारी बुद्धि में उसी प्रकार उन्मत्त होने लगते हैं जिस प्रकार किसी केले के खेत में उग्र बंदर (इस दृश्य की कल्पना करने का प्रयास करें, यह मनोरंजक है)। जब हम अच्छे होते हैं, तब हम इतने अच्छे होते हैं कि कभी-कभी हम भी अपनी दयालुता, अपने बड़प्पन को देख कर अचंभित हो जाते हैं। और जब हम बुरे होते हैं, तब हम इतने बुरे हो सकते हैं कि शैतान भी हम पर दृष्टि पड़ते ही अपने बचाव के लिए दौड़ पड़े। हम उन बातों को नहीं सोचना चाहते या वैसा अनुभव नहीं करना चाहते, तथापि हम वह सब करते हैं। अचंभित हैं कि क्यों? संभवतः मेरे पास आपके लिए उत्तर हो सकता है।

रामकृष्ण परमहंस प्रायः एक लघु कथा सुनाते थे। एक व्यक्ति भीड़ से खचाखच भरी हुई ट्रेन, जो धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी, उसमें चढ़ने के लिए दौड़ रहा था। तो भागते-दौड़ते, हाँफते हाँफते, कंधों पर भारी बैग लटकाए, वह ट्रेन के भीतर पहुंचने में सफल हो गया, हालाँकि उसकी सारी सीटें पहले से ही भरी हुई थीं। कुछ मिनट बीत गए, ट्रेन अब गति पकड़ चुकी थी और वह अपने कंधों पर भारी बैग लिए खड़ा रहा।

सह-यात्रियों में से एक ने कहा, “आप बैग को नीचे रख सकते हैं।”
“क्यों?” उसने उस सुझाव का तिरस्कार करते हुए कहा। “आपको क्या परेशानी है? यह मेरा बैग है!”
“परंतु आप एक ट्रेन में हैं!” किसी दूसरे ने कहा। “आप इसे उठाने के बजाए इसे नीचे रख सकते हैं!”

परंतु उस व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया और अपनी पीठ पर अपने बैग के साथ खड़े खड़े उसने पूरी यात्रा तय की।

निस्संदेह, वह मूर्ख व हठी व्यक्ति था और उसने एक बुद्धिमत्ता पूर्ण सलाह पर ध्यान नहीं दिया। यद्यपि यह केवल उस व्यक्ति की कथा नहीं है; यह हमारी कथा है। हम में से प्रत्येक वह व्यक्ति है जो उस सामान को अपने साथ घसीट रहा है जिसके बिना भी वह रह सकता है। यदि आपको उसे स्थानांतरित करने या कहीं ले जाने की आवश्यकता नहीं है तब कोई सामान भारी नहीं है। हमारे जीवन में हमारे साथ क्या होता है, यह हमारे जीवन को भारी नहीं बनाता है, अपितु जब हम इसे छोड़ने या उससे अलग होने का विकल्प नहीं चुनते हैं, वह उसे भारी बनाता है।

जूडिथ सिल्स अपनी बेस्टसेलर “अतिरिक्त सामान” (Excess Baggage) नामक पुस्तक में उसे हमारा अंध बिंदु कहती हैं। हम उन्हें पहचान नहीं पाते हैं भले ही हम उन्हें देखें भी। भारी फर्नीचर के समान, वे हमारे रास्ते में हैं और हम अपने पैर की अंगुली को आहत भी करते रहते हैं। अतिरिक्त सामान के विशेष संकेतों में से एक है यह दृढ़ विश्वास कि कोई अन्य व्यक्ति मेरे दुख के लिए उत्तरदायी है। वे इस कथन को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती हैं कि हमारा व्यवहार, विश्वास तथा भावनाएं हमारे इस सामान का कैसे निर्माण करती हैं। मैं उद्धृत करता हूँ –

सर्वप्रथम व्यवहारिक स्तर पर, हमारे अतिरिक्त सामान में, अन्य वस्तुओं के अतिरिक्त होती हैं हमारी आदतें – वे सभी मिथ्यानंद, विनाशकारी आसक्ति, और बिना सोचे की जाने वाली प्रतिक्रियाएं जो हमारे स्वास्थ्य को संकट में डालती हैं, हमारी उत्पादकता में हस्तक्षेप करती हैं और / या उन लोगों को अपमानित करती हैं जिन्हें हम सबसे अधिक प्रभावित करना चाहते हैं। एक समावेशी सूची लगभग असंभव है, क्योंकि मानव होने के अचंभे का एक हिस्सा हमारी असीमित बुरी आदतों को उत्पन्न करने की क्षमता है।

संज्ञानात्मक स्तर पर, अतिरिक्त सामान किसी भी अप्रत्याशित मूल्यों, मान्यताओं या धारणाओं को संदर्भित करता है जो आपको उदास, अधिक चिंतित, अधिक भयभीत, या सामान्यतः दुर्बल बनाता है। आपकी धारणा वह सीमा रेखा है जिसे आपने पीछे छोड़ दिया है। वह एक व्यक्तिगत आदर्श वाक्य के समान है जो अब अपने उद्देश्य को पूरा नहीं करता। उदाहरण के लिए, “अच्छी लड़कियां पैसे के विषय में बात नहीं करतीं” एक धारणा है जो अच्छे प्रकार से काम करती है जब तक कि अच्छी लड़कियां कार्यबल में सम्मिलित नहीं हो जातीं और वास्तव में कम वेतन प्राप्त करतीं हैं। या यह धारणा लें कि “वस्तुओं की मरम्मत पुरुष करते हैं” – मेरी पसंदीदा धारणा, जब तक कि मेरे पति ने मुझे इस भ्रम से मुक्त नहीं किया। (हमारे विवाहित जीवन के शुरुआती दिनों में, बाथरूम का नल टपक रहा था। अंत में मैंने कहा – “आप जानते हैं, बाथरूम का नल टपक रहा है …”। उन्होंने अपना पैंट उतारा, और अपनी ओर इशारा करते हुए कहा, “जूडिथ, यह मुझे प्लंबर नहीं बनाता है।”)

भावनात्मक स्तर पर सामान आपके अतीत के उन टुकड़ों से बनता हैं जो वर्तमान में प्रसन्नता व उत्पादकता में हस्तक्षेप करते हैं। ये पुरानी, प्रबल भावनाएं हैं जो नई स्थितियों में घुसपैठ करती हैं। विशेष रूप से ये भावनाएं अधिकतर हमारे माता-पिता पर केन्द्रित होती हैं, मुख्यत: अभिभावक के रूप में उनकी विफलताएँ और उनकी इन विफलताओं के फलस्वरूप उत्पन्न हमारी दबी हुई निराशा या क्रोध। किंतु एक पूर्व-पति या पत्नी, भाई-बहन या अन्य परिवार का सदस्य भी भावनात्मक सामान प्रभावशाली मात्रा में उत्पन्न कर सकता है।

सभी प्रकार के सामान का स्रोत एक सतत व्यक्तित्व शैली है। हमारे विशिष्ट व्यक्तित्व को देखते हुए, हमारे पास किसी एक या दूसरे प्रकार का सामान होने की संभावना होती है। … हमारी सबसे बड़ी दुर्बलता सीधे हमारी सबसे बड़ी शक्ति में से निकलती है।

यहाँ पर अतिरिक्त सामान के पांच मनोवैज्ञानिक गुण लिखित हैं जो सामान्यतः हमारे प्रबल मनोविकारों द्वारा शासित होते हैं। प्रत्येक विशेषता के नीचे, इटालिक्स में एक वाक्य है (जो कि जूडिथ द्वारा लिखित पुस्तक से शीर्षक के साथ लिया गया है) जो दिखाता है कि यह हमारी शक्ति व दुर्बलता दोनों कैसे है। जब आपके व्यक्तित्व की एक विशेषता आपके जीवन में प्रधानता ले लेती है और आप उसे पहचानने में जागरूक हो जाते हैं तो आप अपने सामान को पहचानने और फिर उसे छोड़ने में सफल हो पाएंगे। सावधानी के साथ, यदि हम अंतर्निहित प्रबल मनोविकारों को वश में करते हैं, तो उस विशेषता के सभी लक्षण स्वयं ही चले जाएंगे।

ये लक्षण निश्चित रूप से अच्छे या बुरे नहीं होते ( चूंकि यह सदैव प्रासंगिक होता है)। किंतु ये लक्षण कुछ सामान बनाते हैं जो प्रायः हमें जीवन को पूरी तरह से जीने और उसका आनंद लेने से रोकते हैं। विलंब के बिना, प्रस्तुत है – (अपने गुण को पहचानने में संकोच न करें। मैं नहीं देख रहा!)

१. आप सर्वदा सही होना चाहते हैं

नियंत्रण इस विशेषता के मूल में प्रबल मनोविकार है ताकि आप सक्षम, कुशल, उत्तरदायी आदि प्रतीत हों। संभवत: आप स्वयं को “पूर्णतावादी” कहने में भी गर्वित अनुभव करते हों। आप जो भी आरंभ करते हैं उसे पूरा करना चाहते हैं। भले ही वह एक अत्यंत उबाऊ पुस्तक है जिसे आप पढ़ रहे हैं, आप उसे समाप्त करेंगे क्योंकि आपने उसे आरंभ किया। कोई भी वस्तु खरीदने से पहले आप अपना शोध करते हैं क्योंकि आपको यह सुनिश्चित करना है कि आपने सबसे उत्तम निर्णय लिया है। हो सकता है आप एक कार्यवाहक हों और फिर अपनी भूमिका और उत्तरदायित्व आदि की ओर संकेत करके अपनी अनियमित कार्य आदतों को न्यायसंगत करते हैं। आपके लिए सबसे कठिन है किसी कार्य को अधूरा छोड़ कर त्याग देना।

जब कुछ महत्वपूर्ण है, तब आप अति उत्कृष्ट काम करेंगे। परंतु, जब कार्य महत्वहीन हो, तब भी आपको इसे “सही” ही करना होता है।

२. आप स्वयं को श्रेष्ठतर मानते हैं

श्रेष्ठतर अनुभव करने की आवश्यकता के पीछे प्रबल मनोविकार है आत्म सम्मान। मैंने देखा है कि जितना कम आप अपने आप में विश्वास करते हैं, उतना ही कम आपका आत्म-सम्मान होता है (चाहे आप सार्वजनिक रूप में इसके विपरीत दिखाते हों)। और आपका आत्म-सम्मान जितना कम होगा, उतना ही आपकी श्रेष्ठता को प्रदर्शित करने की तीव्र इच्छा होगी। उदाहरण के लिए, एक सुपरस्टार सादे कपड़ों में, गहनों के बिना रेड कार्पेट पर चलने में संकोच नहीं करेगी, किंतु एक संघर्षकर्ता को हाव-भाव, सुंदर कपड़ों व शब्दों के साथ किसी भी प्रकार ध्यान आकर्षित करने का हठ होता है। जब आप वास्तव में एक संपन्न व्यक्ति होते हैं, तब आप पहले से ही श्रेष्ठतर होते हैं। वह तो खाली बर्तन होता है जो बहुत शोर मचाता है (अधजल गगरी, छलकत जाये)। यदि आप खरीदारी करने जाते हैं, तब आप वहाँ सबसे अच्छा सामान खरीदना चाहते हैं। आप स्वयं को कठिनता से प्रसन्न होने वाला व्यक्ति समझते हैं और एक बात जिससे आप डरते हैं वह है मूर्ख दिखना।

विशिष्टता एक जादुई विचार है, एक विशाल आनंददायक अहंकार के प्रज्वलन के लिए। परंतु यह आपको ईर्ष्या, द्वेष व हीनभावना में गिरने के लिए संवेदनशील बना देता है।

३. आप अस्वीकृति से भयभीत हो जाते हैं

सुरक्षा अस्वीकृति के भय का प्रबल मनोविकार है। आप सभी के साथ अत्याधिक अच्छा होने का प्रयास करते हैं क्योंकि आप किसी के द्वारा बहिष्कृत होने की सोच भी नहीं सकते। आप सहजता से अधीनस्थ हो सकते हैं। अच्छा होने के प्रयास में, आप अधिक समर्पण करते हैं तथा शहीद भी हो जाते हैं। तथापि, इस दृष्टिकोण के साथ एक समस्या यह है कि आप बदले में बहुत अपेक्षा भी करते हैं। आपको लगता है कि आप दूसरों के लिए इतना कुछ कर रहे हैं किंतु यह अपनी इच्छा से नहीं अपितु इसलिए कि आप उनकी परवाह करते हैं और इसलिए उन्हें इसे स्वीकार करना चाहिए और आपके अनुसार अपने जीवन को चलाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, उन्हें लगता है कि आप यह प्रेम के चलते कर रहे हैं या आप ऐसा करना चाहते हैं। आपको निरंतर अनुमोदन, प्रशंसा व स्वीकृति की आवश्यकता होती है। यहाँ तक कि आपको यह शंका हो सकती है कि आप की प्रशंसा सच में की जा रही है या नहीं। आप के भीतर एक गहरा विश्वास है कि आप बहुत अच्छे हैं और आप केवल सहायता करने का प्रयास कर रहे हैं। आप सामाजिक सभाओं व पार्टियों से दूर रहना पसंद करते हैं।

आप बहुत अधिक देते हैं परंतु आप इसके लिए एक उच्च मूल्य मांगते हैं।

४. आप नाटक करते हैं

आसक्ति इस विशेषता का प्रबल मनोविकार है। आप यह कल्पना करते हैं कि लोग खड़े होकर तालियों से आपकी सराहना करें। अपने जीवन साथी से बात करते हुए, आपके कई वाक्य इस प्रकार आरंभ होते हैं, “यदि आप मुझसे प्रेम करते तो आपको यह पता होता…. या फिर आप ऐसा कार्य करते आदि।” प्रेम में आपका मूल विश्वास यह है कि यदि आपको प्रेम मांगना पड़े तब वह प्रेम आपके योग्य नहीं है। आप किसी से संबंधित होना चाहते हैं परंतु आप यह भी चाहते हैं कि कोई आपके साथ पागलपन की हद तक प्रेम करे (अर्थात उन्हें आपकी आवश्यकता हो) ताकि आपका संसार पूर्ण हो। भावनाएं आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आप एक अति भावनात्मक व्यक्ति हैं। आपका पहला प्रतिवाद यह है कि आप कैसा अनुभव करते हैं यह आपके हाथ में नहीं है। आप एक आम जीवन जीने से डरते हैं और उत्तेजक जीवन के स्वप्न देखते हैं।

आप समझदार व सहजज्ञ दोनों हैं। परंतु आप स्वयं द्वारा जानकारी का बोध होने पर अनावश्यक प्रतिक्रिया देते हैं। आपका आदर्श उपहार है एक अप्रत्याशित सार्वजनिक प्रदर्शन जिससे यह व्यक्त हो कि आपको कितना अधिक प्रेम किया जाता है।

५. आप क्रोध का पोषण करते हैं

न्याय क्रोध के पोषण में प्रबल मनोविकार है। आप इस विचार को पसंद करते हैं कि जिन लोगों ने आपके साथ अन्याय किया है उन्हें किसी प्रकार से दंडित किया जाए। भले ही आप जानबूझकर उन्हें कोई हानि नहीं पहुंचाना चाहते हों परंतु आप चाहते हैं कि उन्हें अपनी भूल का अहसास हो। यदि आपको किसी पार्टी में जाना है, तो आप जानना चाहते हैं कि जिस व्यक्ति से आप घृणा करते हैं क्या उसे भी आमंत्रित किया गया है। और यदि ऐसा है तब उस स्थिति में आप वहाँ नहीं जाएंगे। आप अपना हिसाब वहीं के वहीं पूर्ण करने के लिए प्रख्यात हैं। एक बार जब आप किसी के विषय में राय बनाते हैं, तब आपको उसे बदलने में बहुत कठिनाई होती है। आघात करना आपका सबसे अच्छा बचाव है और आपके लिए क्षमा करना या भूलना सबसे कठिन कार्य है।

अपने क्रोध का पोषण करते हुए आप उन व्यक्तियों को चोट पहुंचाने में संभवत: सफल रहेंगे जिन्होंने आप को चोट पहुंचाई है। परंतु आप उन व्यक्तियों को और भी अधिक चोट पहुंचाएंगे जिन्होंने आपको चोट नहीं पहुंचाई है।

रोचक तथ्य यह है कि आत्मरतिक व्यक्तियों में ये सभी पांच लक्षण अलग-अलग मात्रा में निरंतर दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है कि उन्होंने निश्चित रूप से इस विभाजन में जैकपॉट जीता है।

(इसे बड़ा करने के लिए छवि पर क्लिक करें। तालिका स्रोत: जूडिथ सिल्स का अतिरिक्त सामान [Excess Baggage])

यदि हम प्रबल मनोविकारों को वश में कर सकते हैं, तो बोझ स्वतः हल्का होने लगेगा। और इन मनोविकारों को शांत करने का एक उपाय यह है कि आप जो सोचते हैं, आप जो देखते हैं और जो करते हैं उसे बदलना होगा। दूसरे शब्दों में, जब तक कि आप जीवन के अन्य मार्गों को नहीं देखेंगे (जो आपके जीवन को एक उद्देश्य देकर, अपने विचारों, भावनाओं, शब्दों व कार्यों के प्रति सावधानी रखते हुए, और अच्छा साहित्य पढ़कर अपने विचारों के विस्तार द्वारा किया जा सकता है), तब तक आपके जीवन में कुछ भिन्न नहीं होने वाला है।

मुल्ला की पत्नी चाहती थी कि वह उन्हें अपनी विवाह की आगामी वर्षगाँठ पर उपहार दें परंतु मुल्ला के पास धन नहीं था। उसने दुकान से सामान चुराने का निर्णय किया परंतु वह पकड़ा गया।

न्यायाधीश ने कहा, “आपके विरुद्ध यह आरोप है कि आपने चार बार दुकान के द्वार को तोड़ा है। क्या आप दोषी हैं या नहीं हैं?”
“दोषी हूँ , सरकार,” मुल्ला ने कहा, “मैं मानता हूँ कि मैंने अपनी पत्नी के लिए एक पोशाक चुराई है।”
“एक पोशाक? आपने चार बार दुकान का द्वार तोड़ा, मुल्ला!”
“पहली तीन बार उसे रंग पसंद नहीं आया, महोदय।”

जब तक आप अपने अस्तित्व के साथ शांति नहीं बनाएंगे और अपने जीवन में जागरूकता को अंतर्निविष्ट नहीं करेंगे, वही चक्रीय भावनाएं आपके जीवन प्रवाह को निर्देशित करती रहेंगी जिससे आप बार-बार एक ही वस्तु के लिए दौड़ते रहेंगे। यदि आप एक भिन्न मार्ग लेना चाहते हैं, तो वाहन उस दिशा में आगे बढ़ाना होगा। हम ऐसा सोच सकते हैं कि हमारे जीवन में जो कुछ हो रहा है उसका कारण अन्य लोग हैं परंतु आपके मार्ग में केवल एक ही व्यक्ति बाधक है – वह हैं आप। जैसा कि कृष्ण कहते हैं, आप अपने सबसे अच्छे मित्र और अपने सबसे बुरे शत्रु हैं (उद्धरेद आत्मनात्मानम नात्मानम अवसादयेत्म … भ गी ६.५)

आप अपने मार्ग की बाधा न बनें।

आज, मुझे एक छोटी पोस्ट लिखनी चाहिए थी क्योंकि मेरे पास आपके साथ साझा करने के लिए कुछ है और मुझे उस विषय पर आपका ध्यान चाहिए। दो महत्वपूर्ण घोषणाएं –

१. ब्लैक लोटस २.० डाउनलोड करें।

हमने ब्लैक लोटस एप के अगले संस्करण को जारी कर दिया है। इसे फिर से डिजाइन किया गया है और शुरू से बनाया गया है। जून २०१७ में, मैंने (यहाँ) उल्लेख किया था कि इसमें एक नई रोमांचक सुविधा होगी। लीजिये, वह पल आ गया है। हर महीने, मैं एक स्वामीनार करूँगा। यह एक लाइव टॉक होगी जहाँ आप पहले से ही अपने प्रश्न जमा कर पाएंगे और मैं उन्हें जितना संभव हो सके, संबोधित करूंगा। एप डाउनलोड करें और मेरे साथ रहने के लिए स्वामीनार में भाग लें। इसके अतिरिक्त, यह १००% मुफ़्त है। कैसे? यह दूसरे विषय की ओर जाता है।

२. ३.० बनाने में हमारी सहायता करें।

हमनें इस एप को बनाने में अब तक अपने संसाधनों (या निवेश) के साथ $ १००,००० से अधिक राशि लगाई है। एप में नई विशेषताओं को बनाने के लिए जो आपको ध्यान के वैश्विक समुदाय से जुड़ने में मदद करेंगे, आपको दयालु कृत्यों के माध्यम से आपके शब्दों व कार्यों के विषय में अधिक जागरुक करेंगे, मुझे आपकी सहायता चाहिए। कैसे? यह दूसरी बात की ओर जाता है। लक्ष्य बड़ा है परंतु यदि आप अपनी ओर से अच्छा कर्म करना चाहते हैं तब हम इसे आसानी से पूरा कर सकते हैं। कृपया हमारे धन एकत्र करने में भाग लेने के लिए यहाँ जाएं। हर छोटे योगदान से फर्क पड़ेगा। ब्लैक लोटस अभियान में शामिल हों।

शांति।
स्वामी

मूल अंग्रेज़ी लेख - Excess Baggage