जो व्यक्ति सफल होते हैं और जो व्यक्ति सफल नहीं होते उन के बीच एक मूलभूत अंतर होता है। मैं केवल भौतिक सफलता की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं सफलता की एक और पूर्ण परिभाषा की बात कर रहा हूँ – एक संतोषजनक जीवन जीना। मेरी राय में एक ऐसा जीवन जो संतोषजनक एवं सार्थक हो वह जीवन जीने लायक होता है। मैं जिन्हें भी जानता हूँ वे सभी प्रसन्नता, परितोष एवं आनंद का अनुभव करना चाहते हैं, परंतु हर किसी को यह नहीं प्राप्त होता है। वह क्या है जो प्रसन्न लोगों को पता है जो उदास लोगों को पता नहीं? बुद्धिमान और अन्य लोगों के बीच क्या अंतर है? आगे पढ़ें –

एक समय की बात है एक व्यक्ति एक संत से मिलने गया। वह व्याकुल और दुखी था। संत ने उसे हर दिन एक घंटे के लिए प्रकाश और शांति पर ध्यान करने को कहा।

“वैसे तो ध्यान करने के लिए तैयार हूँ, परंतु समय की कमी के कारण तीस मिनट ध्यान करना भी मेरे लिए बहुत कठिन है।”
“यह तो केवल एक बहाना है,” संत ने कहा। “तुम्हारे पास काम करने के लिए, टीवी देखने के लिए, मित्रों से बातचीत करने के लिए, समाचार पत्र पढ़ने के लिए, स्नान, भोजन आदि के लिए समय है, परंतु तुम्हारे पास ध्यान करने के लिए समय नहीं है?”
“यही सत्य है गुरुजी। मेरे पास बिल्कुल समय नहीं है। यहाँ तक कि मैं नाश्ता भी शीघ्रता से करता हूँ।”
“तो ठीक है, काम से एक महीने का अवकाश ले लो और यहाँ रहने के लिए आ जाओ और ध्यान करो। तुम्हारे मन को प्रशिक्षित करने में मैं तुम्हारी सहायता करूँगा।”
“काश मैं ऐसा कर सकता। परंतु मेरी पत्नी, मेरे बच्चों और मेरे माता-पिता का क्या होगा। मैं एक महीने के लिए उनसे दूर नहीं रह सकता।”
“ऐसा है तो मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता।”
“गुरु ध्यान करना आप के लिए आसान है, परंतु, मैं एक सांसारिक व्यक्ति हूँ और मुझे एक गृहस्थ की सभी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यदि मेरी यह समस्याएं नहीं होतीं तो अवश्य मैं भी आप की तरह बैठ कर ध्यान करता। मैं यहाँ बड़ी आशा ले कर आया हूँ। मुझे कृपया एक सहज समाधान दीजिए।”
“ठीक है। इस रहस्यमय तलवार को लो और आज रात सोने के पहले इसे हवा में चार बार हिलाओ। जब तुम कल प्रातःकाल उठोगे तुम्हारी सभी समस्याओं का अंत हो जाएगा।”

प्रसन्नतापूर्वक वह व्यक्ति तलवार को लेकर गया, यह कल्पना करते हुए कि उसे अपनी सभी समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। उसने बहुत ध्यान से अपने भविष्य के विषय में विचार किया फिर उस तलवार को देखा, परंतु उसे हिलाने का साहस नहीं जुटा पाया। अगले दिन उस ने गुरु को तलवार वापस कर दी।

“मुझे क्षमा करें परंतु मैं इसका प्रयोग नहीं कर सकता। आप सही कह रहे थे, वे मेरी समस्याएं नहीं अपितु केवल बहाने थे। मैं ने इस विषय पर बहुत चिंतन किया और मुझे अहसास हुआ कि मैं अपने इन बहानों के बिना जी नहीं सकता। यदि ये बहाने ही ना रहें तो मेरे जीवन में क्या शेश रह जाएगा। यही बहाने तो मुझे व्यस्त रखते हैं।”

यही है प्रसन्न और दुखी लोगों के बीच मुख्य अंतर। प्रसन्न व्यक्तियों के जीवन में बहानों की कोई जगह नहीं और दुखी लोग इस के एकदम विपरीत होते हैं। सफल व्यक्ति बाधाओं को चुनौती मानते हैं और उन से निपटने में उन्हें परितोष प्राप्त होता है। असफल व्यक्ति चुनौती को बहाने में परिवर्तित कर देते हैं और उन बहानों को एक कारण के रूप में प्रस्तुत करते हैं। और तो और उन्हें वास्तव में यह विश्वास है कि उनके बहाने उचित एवं मान्य हैं। उन के पास सदैव अपने विलंब अथवा कर्महीनता का कोई वैध स्पष्टीकरण होता है।

मुल्ला नसरूद्दीन का एक लड़की के साथ कुछ समय से प्रेम संबंध था। एक दिन लड़की के पिता ने मुल्ला का सामना किया और कहा, “ सुनो युवक, तुम्हारा अब कईं महीनों से मेरी बेटी के साथ एक प्रेम संबंध है। मैं जानना चाहता हूँ कि तुम्हारी नीयत माननीय है या अनैतिक?”
नसरूद्दीन का चेहरा खिल उठा – “क्या आप यह कह रहे हैं कि मैं इन में से एक विकल्प चुन सकता हूँ?”

आप जिम क्यों नहीं जाते, ध्यान क्यों नहीं करते, धूम्रपान क्यों नहीं छोड़ते, शराब पीना क्यों नहीं रोकते, अथवा अपनी जीवन शैली क्यों नहीं बदलते इस का सदैव कोई ना कोई कारण रहेगा। किंतु सत्य यह है कि वे कारण नहीं बहाने हैं। यह केवल आप की प्रवृति और आप किस विकल्प को चुनते हैं उस पर निर्भर है। आप या तो एक बहाना ढूँढ सकते हैं या एक मार्ग खोज सकते हैं। या तो कोई कारण ढूँढ सकते हैं या बहानों को अस्वीकार कर सकते हैं।

आप के वर्तमान जीवन को अलग प्रकार से जीने का सदैव एक विकल्प होता है। यह संभवत: आकर्षक नहीं हो, क्योंकि इस में अधिक परिश्रम एवं संघर्ष आवश्यक हो सकता है। परंतु यदि आप दृढ़ हैं और अपने पथ पर अनुशासित रूप से चलते हैं, तो आप की चुनौतियों का एक के बाद एक अंत हो जायेगा। जीवन एक सुखद यात्रा हो जाएगा। विशाल पहाड़ों की तरह लगने वाली वे चुनौतियाँ भीषण आंधी में खोखले पेड़ों की तरह उखड़ जाएंगी। यह यात्रा अगले कदम के लिए एक प्रतिबद्धता और संकल्प के साथ ही प्रारंभ होती है। धीरे धीरे एक कदम से शुरु करें।

हर वर्ष, मास, दिन, घंटे, मिनट और क्षण के साथ साथ हमारा यह सुन्दर जीवन तीव्रता से बीतता चला जा रहा है, और एक रेस ट्रैक पर कीलों के समान हम अपने रास्ते पर बहाने फेंक कर जीवन में स्वयं बाधा डाल रहे हैं। सफल व्यक्ति समाधान ढूंढते हैं, अन्य व्यक्ति समस्याओं एवं बहानों पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। स्वयं के साथ सदैव सत्यवादी रहें; यह आप की मदद करेगा।

शांति।
स्वामी