कृपया मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपने व्यापार में सफल हो सकूं। मैं बहुत सारा धन अर्जित करना चाहता हूँ, परंतु अपने लिये नहीं। मैं दूसरे व्यक्तियों की मदद करने हेतु धन अर्जन करना चाहता हूँ।

क्या आपने लोगों को यह कहते सुना है – कि उनके व्यापार करने का या धन कमाने का एकमात्र कारण, या मुख्य कारण यह है कि वे उससे दूसरों की मदद कर सकें? मैंने सुना है। कईं बार। यह बात मुझे हास्यजनक लगती है, क्योंकि स्थायी व्यापार दूसरों की मदद करने के इरादे से नहीं बनाया जा सकता। यह आपके द्वारा बेचे जानें वाली वस्तुओं, या दी जाने वाली सेवाओं के माध्यम से, दूसरों के जीवन में कुछ महत्व प्रदान करने के इरादों से किया जाता है। उसके महत्व, या मूल्य से आप धन अर्जित करते हैं। उस धन का उपयोग आप दूसरों की मदद करने में कर सकते हैं। अपनी सेवाओं द्वारा मूल्य अर्जन ही प्रत्येक व्यापार का मुख्य उद्देश्य होना चाहिये, अन्यथा इसके लाभदायक होने की कोई आशा नहीं।

एक व्यापार तभी सफल रह सकता है, जब वह लाभदायक हो। एक व्यापारिक उपक्रम का एकमात्र धर्म- लाभदायक एवं निष्पाद्य उन्नति है। निश्चित है कि एक सामाजिक रूप से उत्तरदायी व्यापारी, समाज की सहायता हेतु कार्यक्रम चला सकता है। किंतु ऐसा होना तभी संभव है, जब उस व्यापार से कुछ लाभ अर्जित हो। इसके अतिरिक्त, यदि आपकी मूलभूत प्रेरणा दूसरों की मदद करना है, तो फिर आपको एक व्यापार बनाने के विषय में सोचना छोड़कर अपनी अंतर्दृष्टि विकसित करनी चाहिये। परंतु मेरे आज का लेखन व्यापार को बढ़ाने के विषय पर नहीं है। अपितु सफलता की संरचना में, एक महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि विकसित करने पर है। चाहे आपका उद्देश्य कुछ भी हो – भौतिक या आध्यात्मिक।

चाहे आप कोई भी उत्तरदायित्व लें, यदि आप सफल होना चाहते हैं तब आपको सफलता का सबसे मूलभूत संघटक अर्जित करना होगा। और वह है – इरादों की शुद्धता। यदि आपका उद्देश्य शुद्ध है, तब आप स्वतः ही दृढ़ संकल्प एवं आंतरिक शक्ति का विकास कर लेंगे। ब्रह्माण्ड आपके लिये अन्य संसाधनों की कतार लगा देगा, और आप सफलता का स्वाद चखेंगे। इरादों की शुद्धता से मेरा संकेत नैतिकता या मर्यादा की ओर कदापि नहीं है। विभिन्न संस्कृतियों में नैतिकता के अलग-अलग सिद्धांत हैं। जब मैं शुद्ध उद्देश्य की बात कहता हूँ, तब मैं किसी धार्मिक या नैतिक मूल्यों की बात नहीं कर रहा हूँ। इन गुणों की आवश्यकता अन्य कारणों से होती है। अभी के संदर्भ में, इरादों की शुद्धता से मेरा साधारण सा तात्पर्य यह है, कि आप अपने ध्येय के प्रति, तथा स्वयं के प्रति, ईमानदार रहें।

उदाहरणार्थ यदि एक विद्यार्थी चिकित्सक बनने की इच्छा रखता है, तब उसे इरादों की शुद्धता की आवश्यकता है। उसका सम्पूर्ण ध्यान इस बात पर होना चाहिये, कि वह अधिक से अधिक सीख सके, और उत्तम अंकों में परीक्षा उत्तीर्ण करे। जिस क्षण आप निर्धन की चिकित्सा करने को अपना प्रमुख उद्देश्य बताने लगते हैं, तब आप स्वयं के प्रति ईमानदार नहीं हैं। हाँ यह भी संभव है कि निर्धन की चिकित्सा करना ही वास्तव में आपकी मुख्य प्रेरणा हो (हालांकि ऐसा दुर्लभ है) और ऐसे में संभवतः आप एक गाँव में, चिकित्सीय सहायता प्रदान करने हेतु रहने लगें।

किंतु यदि आप विलासपूर्ण जीवन का और एक मोहक शहर में रहने का स्वप्न देखते हैं, तब आप असहाय व्यक्तियों का इलाज करने के प्रति गंभीर नहीं हो सकते। और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विलासपूर्ण जीवन चाहना पूरी तरह से ठीक है। यह आपको किसी भी प्रकार से निम्नकोटि का मनुष्य नहीं बनाता है। किंतु यदि आप यही चाहते हैं, तब स्पष्ट रहें। इसी को अपना उद्देश्य बनाएं। दोनों का मिश्रण न करें। यदि आप एक चिकित्सक बनकर, संसार के सबसे महंगे शहर में कार्य करते हैं, तब भी, आप बहुत भला कर सकते हैं। हालांकि, यह अलग बात हो गयी। वहाँ तक पहुँचने के लिये, आपको शुद्ध इरादों और ध्यान के एकत्रीकरण की आवश्यकता होगी।

एक पुराने गिरजाघर को मरम्मत की अत्यंत आवश्यकता थी। नवीनीकरण की अनुमानित लागत एक लाख रुपये थी। किंतु इस परियोजना में भागीदारी हेतु, किसी ने भी रुचि व्यक्त नहीं की। रविवार की सभा के अंत में पादरी ने सदस्यों से भरे सभाभवन में घोषणा की, “मेरे पास एक अच्छा समाचार एवं एक बुरा समाचार है। आप पहले क्या सुनना चाहेंगे?”
“हम कुछ अच्छा सुनना पसंद करेंगे!” अधिकतर लोगों ने कहा।
फिर पादरी ने उत्साहपूर्वक कहा, “अच्छा समाचार यह है कि हमें गिरजाघर के नवीनीकरण हेतु एक लाख रुपये मिल गये हैं।”
इस घोषणा का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया गया।
“अब, देवियों एवं सज्जनों, दुखद समाचार यह है,” उसने स्वयं को माइक के पास लाते हुए कहा। “वह पैसा आपकी जेबों में है।”

हमें जीवन में, कुछ भी करने के लिये जिन भी संसाधनों की आवश्यकता होती है, वे इस जगत में किसी न किसी रूप में हैं। इरादों की शुद्धता ही, इन संसाधनों को साथ लाती है। यदि आप जो चाहते हैं उसे लेकर भ्रमित नहीं हैं, तथा यदि आपके कार्य आपके इरादों के अनुरूप हैं, तब आप अपनी सफलता की ओर अग्रसर हैं।

कभी-कभी मेरे पास एक महत्त्वाकांक्षी उद्योगपति आकर यह कहता है, कि वह व्यापार इसलिये बढ़ाना चाहता है, जिससे वह दूसरे लोगों को, रोजगार देकर मदद कर सके। यदि यही आपका वास्तविक उद्देश्य है, तब व्यापार क्यों करें? आप रोजगार सलाहकार बन जाइये। आप बेहतर नौकरी ढूंढने में दूसरे व्यक्तियों की अधिक मदद कर पाएंगे। आपके लिये क्या महत्वपूर्ण है, यह आप तय करें – (१) अपने व्यापार की सफलता के द्वारा अपनी मनपसंद गाड़ी या भव्य मकान खरीदना चाहते हैं। या (२) दूसरों की वास्तव में मदद करना चाहते हैं ।

यदि आपका चयन (२) है, तब विश्वास करें, आपको धन अर्जित करने की कोई आवश्यकता नहीं। आपको केवल उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करना आना चाहिये। हमारा संसार ऐसे बहुत से उत्तम लोगों से भरा पड़ा है, जिनकी उदारता की सीमा नहीं है। मैं नित्य ही ऐसे लोगों से मिलता रहता हूँ। वे मदद करने के लिए उत्सुक हैं, तथा किसी सामाजिक कार्य में भाग लेने के इच्छुक भी। यदि आप सच में मदद करना चाहते हैं, तब आपको ऐसे बहुत से लोग मिलेंगे, जो इस मार्ग में आपका साथ देंगे।

एक दिन किसी ने मुझे एक वीडियो दिखाया। यह वीडियो तीन मिनट से भी कम समय का है और एक व्यक्ति के विषय में है जो अधिकतर उपदेशकों, स्वामी (जिनमें मैं भी हूँ), पुजारियों या गुरुओं से भी श्रेष्ठ है। मैंने इस वीडियो को देखकर सोचा कि यह व्यक्ति अपने उद्देश्य को लेकर पूर्णतया समर्पित व प्रतिबद्ध है। हमारी दुनिया में जहाँ राजनैतिक पार्टियाँ वोटों पर, देश अपनी सीमाओं पर, धार्मिक गुरू मान्यताओं पर लड़ते रहते हैं, वहीं एक व्यक्ति है जो भूमि पर रहकर मदद करता है। कोई है जो सत्य को जी रहा है, ना कि मात्र उसके विषय में बात करता है या किताबें या पोस्ट लिखता है।

मुझे याद नहीं कि मैंने अपनी पोस्ट में कभी कोई वीडियो साझा किया हो (बहुत पहले मैंने जो अपने प्रवचन साझा किये थे, उन्हें छोड़कर) किंतु मुझे लगा कि इस एक वीडियो को मुझे आपके साथ साझा करना ही है। उन लोगों के लिये, जो मुझमें, एक संत देखते हैं, इस वीडियो में एक बेहतर और महान संत और एक बेहतर भिक्षुक है। ऐसा, जिसकी आज हमारे संसार को आवश्यकता है। उनके लिये जो मेरे पास इस खोज में आते हैं कि आध्यात्मिक पथ पर कैसे चला जाए, मैं कहूँगा कि मेरा अनुसरण करने के स्थान पर, इस व्यक्ति से सीखें- कि आप कैसे बेहतर मनुष्य बन सकते हैं, या समाज को कैसे बेहतर बना सकते हैं। आप देखेंगे, कि कैसे आध्यात्मिकता को कार्यान्वित किया जा सकता है। साधना का आरंभ सेवा से होता है और उसका अंत भी सेवा से ही होता है।

इस वीडियो से मुझे यह महान सीख मिली कि जिस व्यक्ति के इरादे शुद्ध हैं, जो अपने प्रयत्न में सच्चा है, उसके लिये कोई भी वस्तु बाधा नहीं है। मैं यह सुझाव नहीं दे रहा कि सेवा की राह गरीबी है। जब आपकी प्रेरणा अनूठी है तब धन की कमी, कभी भी वास्तविक बाधा नहीं बन सकती।

आप जिस किसी भी वस्तु की परवाह करते हैं, उसके प्रति स्पष्ट रहें। और आप जिस भी वस्तु की परवाह करते हैं, वह आपके वास्तविक उद्देश्य को दर्शाता है। यदि आप अपने वास्तविक इरादों के प्रति ईमानदार रहें, तब आप उचित चुनाव करने में सक्षम होंगे। आपको कभी भी निर्णय लेना हो, तब अपने इरादों का परीक्षण करें। आपको पता चल जाएगा कि आपको किस ओर जाना है। इस विषय में ईमानदार रहें। तभी सब संभव है। लगभग सब कुछ।

शांति।
स्वामी