स्पेन का प्रसिद्ध चित्रकार पाब्लो पिकासो फ्रांस में एक छोटे से काफ़ीहाउस में बैठा था। वह अपने तीसरे कॉफी कप की प्रतीक्षा कर रहा था। उसकी एक सिगरेट ऐशट्रे में सुलग रही थी और वह एक काग़ज़ के नैपकिन पर चित्र बना रहा था। अन्यमनस्क पिकासो को निकटवर्ती मेज पर बैठी एक महिला बड़ी उत्सुकता से देख रही थी। कुछ क्षणों बाद पिकासो ने अपनी पेंसिल को नीचे रख दिया और नैपकिन को अपने हाथों में उठा लिया। वह नैपकिन को भावशून्य दृष्टि से देख रहा था जैसे कि वह उससे संतुष्ट नहीं था या संभवतः उसमें और अधिक कार्य की आवश्यकता थी। जब वह उस नैपकिन को मरोड़ने ही वाला था वह महिला चिल्लाकर बोली, “उसे मत मरोड़ो!”।

पिकासो आश्चर्यचकित हो गया।
महिला बोली – “मैं इसे ले लेती हूँ।”
पिकासो ने उस महिला को जिज्ञासु दृष्टि से देखा और मौन हो गया। मौन की अवधि कुछ और देर बढती रही।
“मैं आपको इसका मूल्य दे सकती हूँ,” महिला बोली और उसने अपने हैंडबैग की ओर हाथ बढ़ाया।
पिकासो ने उदासीनता के साथ कहा, “यह कोई उपहार या विक्रय हेतु वस्तु नहीं।”
“अच्छा?” वह अपनी चेकबुक निकालते हुए बोली, “कदाचित मैं आपको एक अच्छा मूल्य दे सकती हूँ।”
“ठीक है। इसका मूल्य है चालीस लाख फ़्रैंक।” यह लगभग दस हजार डॉलर था।
“यह कैसा उपहास कर रहे हैं!”
“यही इसका मूल्य है।”
“परंतु इस चित्र को बनाने में आपको केवल कुछ मिनटों का समय लगा।”
“नहीं महोदया।” पिकासो ने नैपकिन को मोड़कर अपनी जेब में रख दिया। “इसे बनाने में मुझे साठ वर्ष का अनुभव लग गया।”

बचपन से लेकर, हममें से अधिकतर व्यक्तियों के कुछ न कुछ प्रेरणा स्रोत रहे हैं जो हमारे लिए अनुकरणीय रहे हैं। वे व्यक्ति जिनकी हम प्रशंसा करते हैं, जो हमारे सुपर हीरो हैं। ये वे व्यक्ति हैं जो अपने संबंधित क्षेत्रों में शिखर पर पहुँचे हैं और विश्व ने उनको प्रतिभाशाली, विलक्षण प्रतिभा संपन्न व्यक्ति, गुणवान, मेधावी तथा कई अंकितक प्रदान किए हैं। क्योंकि उन्होंने न केवल एक असाधारण कौशल का प्रदर्शन किया बल्कि एक अद्भुत सरलता से वह कार्य किया जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें वह कार्य करने हेतु कोई श्रम की आवश्यकता ही ना थी। मानो वे बैठे बिठाए अपनी कला में प्रवीण बन गए। किंतु यह केवल एक धारणा है कि वे अपनी कला के साथ पैदा हुए थे या उन्हें यह सब बहुत सरलता से प्राप्त हो गया। यह सत्य नहीं है।

किसी भी कार्य को सहजतापूर्वक करने के लिए अत्यधिक प्रयास चाहिए। हम जितना अधिक सचेत होकर किसी कार्य को करेंगे स्वाभाविक रूप से हम उस कार्य में कुशल होते जाएंगे। आप जिस भी कार्य में निपुण होना चाहते हैं, ध्यान या बास्केटबॉल या कोई और कार्य, कड़ी मेहनत करने के लिए सज रहें। उसका अनुसरण करते रहें। सचेत हो कर उस का पालन करें। उसकी समीक्षा करें और कार्यरत रहें। धीरे-धीरे, आपको पता चल जायेगा कि जो वस्तुएं आपको कठिन, यहाँ तक कि असंभव लग रही थीं, अब आपकी पहुँच में ही हैं। यदि पहले आपका अस्सी प्रतिशत समय आपकी कला के दोहराव और उबाऊ पहलुओं पर व्यय होता था, तो अब यह केवल बीस प्रतिशत होगा। शेष अस्सी प्रतिशत आनंददायक हो जाएगा।

हम जिसे प्रतिभा कहते हैं वह प्रायः दृढ़ संकल्प और कई वर्षों के सप्रयास से अधिक कुछ भी नहीं होता है। पाब्लो द सरसेट एक प्रसिद्ध स्पैनिश वायलिन वादक थे जिन्हें आलोचकों और अनुयायियों द्वारा एक जैसा सम्मान प्राप्त था। एक दिन जब किसी व्यक्ति ने उत्साह से उन्हें एक प्रेस कटिंग दिखाया जिसमें उनकी बहुत सराहना की गई थी, सरसेट ने उस काग़ज़ के टुकड़े को फेंक दिया। “हाँ!” उसने व्यंग्यपूर्वक कहा। “सैंतीस वर्ष तक मैंने प्रतिदिन चौदह घंटे का अभ्यास किया और अब ये मुझे एक प्रतिभाशाली व्यक्ति कहते हैं, मानो यह केवल प्रकृति की देन हो!”

यहाँ तक कि प्रसिद्ध संगीत रचयिता मोज़ार्ट ने भी एक पत्र में अपने पिता को लिखा था, “वे व्यक्ति जो यह सोचते हैं कि मैंने आसानी से निपुणता प्राप्त कर ली वे एक बड़ी भूल कर रहे हैं। किसी व्यक्ति ने भी इतना समय एवं विवेचन समर्पित नहीं किया है जितना मैंने अपनी रचना के लिए किया है।”

और यह केवल मोज़ार्ट या पिकासो के विषय में नहीं है, परंतु जिसने भी कभी महानता की ऊंचाइयों पर विजय प्राप्त की है, उसने कठोर आत्म-अनुशासन और कड़ी मेहनत के साथ ऐसा किया है। यद्यपि आध्यात्मिक ग्रंथों में एक संतुलित जीवन के विषय में बात होती है, सच्चाई यह है कि जो व्यक्ति प्रवाह की स्थिति में हैं, वे एकमात्र ध्यान केंद्रित करके अपने मार्ग पर चलते हैं। ऐसे में वे अपने समय का उपयोग संतुलित रूप से नहीं कर पाते। जब वे कर्म नहीं कर रहे होते तब भी वे अपने कर्म पर चिंतन करते रहते हैं। गांधीजी से स्टीव जॉब्स तक और सभी सफल व्यक्तियों में यह समानता है कि वे सभी अपना समय अपने कर्म को समर्पित करते हैं।

प्रतिभा की क्षमता और आत्मविश्वास की नींव एक लंबी अवधि में फैले महत्वपूर्ण और निरंतर प्रयास पर बनाई गई है। इससे भी अधिक उल्लेखनीय है कि उनमें से अधिकतर व्यक्तियों ने अपने मार्ग पर असाधारण बाधाओं को पार किया है। जिसे देखकर मैं पूर्णतः कह सकता हूँ कि जितना बड़ा आपका लक्ष्य होगा आपको उतनी अधिक बाधाएं मिलेंगी। एक रॉकेट प्रक्षेपण के दौरान बड़े पैमाने पर संचालक शक्ति की आवश्यक होती है। परंतु जब वह अंतरिक्ष में पहुँच जाता है, तब न केवल अपने स्वयं के ईंधन से ऊर्जा लेता है बल्कि अन्य ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण से भी ऊर्जा प्राप्त करता है। यह कथन अपनी कला में प्रवीण सभी व्यक्तियों के लिए भी सत्य है। जो व्यक्ति निरंतर कर्म करते हैं वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। एक ऐसी स्थिति जहाँ उनके आस-पास की सब वस्तुएं सद्भावना में काम करती हैं और परम-चेतना के एक उच्च स्तर को प्राप्त करने में उन्हें सहायक करती हैं। परम-चेतना से मेरा संकेत किसी रहस्यमय वस्तु की ओर नहीं है, परंतु केवल एक ऐसी स्थिति जहाँ आप अपनी आंतरिक क्षमता की खोज कर पाते हैं, अंतः प्रज्ञा की एक उच्च स्थिति। यह ऐसी जगह है जहाँ आपकी रचनात्मकताएं हिमालय से गंगा की भांति प्रवाहित होती हैं।

एक अर्ध-चालक पदार्थ के कारखाने में एक जटिल आयातित मशीन टूट गई जिससे पूरे उत्पादन को रोक दिया गया। हजारों नट, बोल्ट, कॉग, गियर, वायर से बनी मशीन को ठीक करना उनके सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरों के लिए भी बड़ा चुनौतीपूर्ण था। उत्पादन बंद होने के कारण कंपनी को हर क्षण हानि हो रही थी और समूह के भीतर किसी को भी कोई समाधान नहीं सूझ रहा था। अंत में बाहर से एक विशेषज्ञ को बुलाया गया। उसने मशीन की जाँच की, एक छोटे पेच को बदल दिया और पाँच मिनट में समस्या का समाधान हो गया। एक सप्ताह के उपरांत, दस हाज़र डॉलर का बिल प्राप्त करने के बाद कंपनी के मुख्य अधिकारी क्रोधित हो गए। उन्होंने वापस विशेषज्ञ को लिखा और अत्यधिक शुल्क के विभाजन की मांग की, क्योंकि पेच बदलने में व्यावहारिक रूप से बहुत कम समय लगा था।

विशेषज्ञ ने एक नया चालान भेजा –
पेच का मूल्य: $ २
पेच बदलना: $ २०
यह जानना कि किस पेच को बदलना है: $ ९,९ ७८

हम सभी को अपने जीवन का निर्माण करने के लिए अधिकतर समान मानसिक व शारीरिक संसाधन उपलब्ध हैं। परंतु हम इसका उपयोग किस प्रकार करते हैं वह निर्धारित करता है कि हम मंच पर खड़े हैं या दर्शकों में बैठे हैं (यद्यपि दोनों समान रूप से आनंद ले रहे हैं)। अपने जीवन के हर क्षण की महत्वता का ज्ञान और अनुशासन का पालन करना ही प्रतिभावान बनने के मूल हैं।

किसी भी कला, शिल्प या कौशल में महारत प्राप्त करना कुछ भाग्यशाली व्यक्तियों का विशेषाधिकार नहीं है परंतु हर एक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। सामान्य दर्जे का होने में कोई आनंद नहीं है। स्वामित्व और सामान्यता के बीच, हम एक समान समय व्यतीत करते हैं परंतु एक छोटा-सा अंतर है। एक निपुण व्यक्ति अपने सभी समय को उस कर्म पर खर्च करता है जो उसके लिए महत्वपूर्ण है, जबकि एक साधारण व्यक्ति अपना समय उन वस्तुओं को समर्पित करता है जो उपयोगी नहीं हैं। दोनों के पास एक दिन में केवल चौबीस घंटे हैं।

यदि आप को वास्तव में कोई कर्म अथवा विषय अत्यधिक प्रिय है, तब इसका कोई महत्व नहीं कि आपके मार्ग में कितनी बाधायें हैं। वह क्या विषय, कला अथवा कार्य है जो आप को सर्वाधिक प्रिय है तथा जिस से आप उत्साहयुक्त हो जाते हैं? अपनी इस सच्चाई की खोज करना उतना ही लाभप्रद व फलदायक होता है जितना उस पर कार्यशील होना।

अपने सत्य की खोज करें और उसमें प्रवीणता प्राप्त करें।

शांति।
स्वामी