एक बार एक महिला, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता थी, वह लोगों को मदिरापान की बुरी लत से छुटकारा पाने में सहायता किया करती थी। उसका एक छोटा सा शहर था, और जब भी वह किसी को मदिरापान करते सुनती तो तत्काल अन्य लोगों के एक छोटे समूह को ले वहाँ पहुँच जाती, ताकि वह उस व्यक्ति से बातचीत कर मदिरा के भयावह परिणामों से अवगत करा सके। उस क्षेत्र में मदिरा पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हो गई, चूंकि कोई भी उस महिला का सामना नहीं करना चाहता था।

एक दिन किसी दूर शहर से आया एक यात्री उस शहर में चल रहे अंतिम मदिरालय में बैठा अपने पेय का मजा ले रहा था। जैसे ही उस महिला कार्यकर्ता को ज्ञात हुआ, वह तुरंत और लोगों के साथ उस स्थान पर पहुँच गई।

“महोदय”, उत्साहित हो वह बोली, “आप यह जानते हैं कि मदिरा आपकी परेशानियों का हल नहीं है।”
“मुझे इस विषय में अवश्य बताएं, किन्तु, सुनें,” उस व्यक्ति ने भी उतने ही उत्साह से उत्तर दिया, “यह मुझे मेरी परेशानियों को कुछ समय के लिए भूल जाने में मददगार है।”
उस महिला ने अपने तर्क की व्यर्थता को भांपा व बात बदलते हुए कहा, “इसका आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और यह आपकी असमयमृत्यु का कारण भी बन सकती है।”
“मुझे मृत्यु का भय नहीं, चूंकि मैं जानता हूँ की इस स्थान से बाहर निकलते ही मेरी दुर्घटना हो सकती है व मृत्यु भी। इसलिए उत्तम यह होगा कि मैं इस पल को जीऊँ।”
“ठीक है,” महिला ने आह भरी।
“आप कितने समय से पी रहे हैं?”
“पिछले 20 वर्षों से प्रतिदिन। और, मुझे स्वास्थ्य संबंधी कोई कष्ट नहीं।”
“आप हर बार कितना व्यय करते हैं?”
“दस डॉलर”
“इसका अर्थ 10 x 365 = 3650 डॉलर प्रति वर्ष?”
“शायद सही।”
“और, 20 वर्ष में यह एक भारी भरकम रकम हो जाएगी – 3650 x 20 = 73,000 डॉलर।”
“वाह! मैंने तो कभी इस प्रकार सोचा ही नहीं।” उस व्यक्ति ने अपना पैग रखते हुए कहा।
“बिलकुल! और यदि हम इसमें ब्याज की रकम भी जोड़ दें तो यह 100,00 डॉलर तक पहुँच जाएगी।” उसने जोश में कहा। “और 100,000 डॉलर में, श्रीमान, आप एक बीएमडबल्यू (BMW) 7-सिरीज़ ख़रीद सकते थे।”
“आपका तर्क त्रुटिहीन है, मैडम! अब, क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूँ?”

उस स्त्री ने जीत के भाव में सिर हिलाया व उस समूह के अन्य लोगों को देखा जो उसका बुद्धिमत्ता पूर्ण तर्क सुन कर अति प्रभावित हुए थे।

“क्या आप पीती हैं?” उस व्यक्ति ने विनम्र भाव से पूछा।
“बिलकुल नहीं। पिछले 30 वर्ष में मैंने मदिरा को छुआ भी नहीं।”
“अरे वाह !”, व्यक्ति ने कहा, “तो आपकी बीएमडबल्यू (BMW) किस रंग की है?”
“क्या कह रहे हैं?” स्त्री कुछ उलझन भरे स्वर में बोली।
“मेरा मतलब है यदि आप पीती नहीं तो आपने प्रतिदिन 10 डॉलर अवश्य बचाए होंगे और शायद एक बीएमडबल्यू खरीदी हो!”

महिला ने अपने पैर पटके और मदिरालय से बाहर निकल ओझल हो गई।

मैंने यह चुटकला, किसी भी संदर्भ से, मदिरासेवन के पक्ष में बिलकुल नहीं कहा। तथापि, मुझे एक महत्त्वपूर्ण तथ्य उजागर करना है।

हम सभी के जीवन में पश्चताप के भाव होते हैं। मैं गलतियों के बाद के गहन पश्चाताप अथवा अपराधों की बात भी नहीं कर रहा। मैं मस्तिष्क के साधारण शोरगुल की बात कर रहा हूँ। मन की वह बकवाद जो हमें कहती है कि हमारा जीवन कैसा होता, ऐसा होता, या वैसा होता यदि हमने ऐसा किया होता, वैसा किया होता या कुछ और किया होता। उस सामाजिक कार्यकर्ता की ही भांति, आपका बड़बड़ करता हुआ मन उसी क्षण सामने आ जाता है जैसे ही आप आराम करने के लिए बैठते हैं अथवा कुछ ऐसा करने को जिसमें आपको मजा आता हो। वह आपको भला बुरा कहता है, ताने मारता है और आपको आपके अतीत के निर्णयों का स्मरण करवाने लगता है। ऐसे निर्णय जिन पर कभी आपको गौरव अनुभव हुआ करता था, किन्तु अब ऐसा नहीं। आप उदास सा महसूस करते हैं, पश्चाताप के भाव आपके मन की शांति को किनारे कर, आप पर पूरी तरह से छा जाते हैं। वर्तमान नीरस लगने लगता है व भविष्य अंधकारमय। आप कामना करते हैं – काश! आपने जीवन किसी अन्य रूप से जिया होता।

दुर्बलता के इस क्षण में, जब आप पछतावे के बोझ से बोझिल हैं, मन इस बात पर केन्द्रित होना आरंभ कर देता है कि अतीत में आपने ऐसा कौन सा कार्य किया होता जिससे आपका वर्तमान मनोहर/वैभवशाली हो पाता। सत्य यह है कि अतीत का कभी न समाप्त होने वाला विश्लेषण अधिकांशतः एक बेचैन मन की बड़बड़ाहट भर है। चूंकि, इस बात की संभावना अधिक है कि उस समय आपने वही किया जो आपको सर्वोचित लगा। और, मेरे विचार में, वह बिलकुल ठीक है। उससे कई गुना अधिक इस बात के मायने हैं कि आप अपने वर्तमान को सार्थक बनाने की दिशा में केन्द्रित हों, चूंकि वर्तमान का आज ही भविष्य का कल होगा।

छलाँग लगाने व दौड़ने से पहले होता है – चलना व रेंगना। अपने भविष्य के लिए कोई सुदृड संकल्प लेने के लिए कभी देर नहीं होती। सप्ताह, महीने अथवा वर्षों की गणना न करें। बस एक बार में एक कदम आगे चलते चलें। और स्मरण रखें, यदि अभी भी आप अपनी यात्रा प्रारम्भ नहीं करते तो आप और अधिक समय खो देंगे। चूंकि, समय तो गुजरता ही जा रहा है।

यदि आप समय की नब्ज़ देखना चाहते हों तो केवल एक स्टॉप वॉच को देख लें (आपके फोन में यह होगी) जहां आप मिली सेकंड तक बीतते देख सकते हैं। जीवन इसी प्रकार भागा जा रहा है। इन अंधाधुंध तेज भागते पलों के एक अंश मात्र में करोड़ों जीव जन्मते हैं व करोड़ों मर जाते हैं। समय का पहिया अविराम घूमता रहता है। जो क्षण चले गए वे कभी भी लौट कर नहीं आएंगे। अपने जीवन के इस वर्तमान में बुद्धिमत्तापूर्वक एवं सावधानी से कार्य करें। अतीत मृत है, उसमे आपके लिए कुछ भी नया नहीं। और, भविष्य कल का वर्तमान भर है। यही एक मात्र वह जीवंत पल है, वह वास्तविक पल, जिसमें जीवन अपनी समग्रता के साथ विद्यमान है।

एक धनवान व्यक्ति पार्किंग में खड़ी अपनी बेंटले कार के समीप पहुंचता है व देखता है कि उसकी आगे की लाइट टूटी हुई है और बम्पर को भी काफी क्षति पहुंची है। क्रोधित व रोष से भरा, वह इधर उधर देखता है कि कहीं वह दोषी व्यक्ति दिख जाये। तभी उसे यह देख कर राहत महसूस होती है कि विंडशील्ड वाइपर के तले एक कागज का टुकड़ा रखा हुआ है। उस पर लिखा था : “कृपया क्षमा कर दें, पीछे की ओर आते समय मैं आपकी बेंटले से भिड़ गया। आसपास कुछ लोग यह देख कर सिर हिला रहे हैं व मुस्कुरा रहे हैं, चूंकि उन्हें लग रहा है कि मैं अपना नाम व पता आदि यहाँ छोड़े जा रहा हूँ। किन्तु, मैं ऐसा नहीं कर रहा।”

और, जीवन के साथ भी ऐसा ही है। अपनी कोई सीधे सीधे गलती न होने पर भी ऐसा लगता है कि कभी कभी हम जैसा सोचते आ रहे होते हैं, हमारा वर्तमान उससे कहीं अलग रूप में हमारे समक्ष आ खड़ा होता है; और हम सोचते हैं कि जिंदगी स्वयं कोई संकेत देगी कि इसे ठीक करने के लिए हम क्या करें। किन्तु, ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता।

अपने अतीत को पीछे छोड़ने का एक मार्ग यह है कि अपने जीवन को कोई अर्थ दिया जाये। एक बार जब आप अपने जीवन का अर्थ, अपने जीवन का उद्देश्य खोज लेते हैं, तब आप पुराने वाले वह नहीं रह जाते। इसी देह में एक नए आप का जन्म होता है। जब आपका खोजा हुआ नया अर्थ आपके जीवन का पथ-प्रदर्शक एवं प्रेरक स्रोत्र बन जाता है, तब अपने पुराने स्वभाव व प्रवृतियों को छोड़ना अति सुगम हो जाता है।

आप कहेंगे, अर्थ कैसे खोजा जाये? मैं इस विषय पर अपने विचार निकट भविष्य में अवश्य लिखूंगा। आशा है आने वाले सप्ताह में।

शांति।
स्वामी

कृ. दे. – मुझे अपने ब्लॉग को एक नवीन रूप में साझा करते हुए अतिशय हर्ष हो रह है। मेरे पास शब्द नहीं जिनसे मैं इस प्यारे जोड़े विशाल साहा और शैली सिंह का उनके इस विस्मयकारी कार्य के लिए हृदय से आभार व्यक्त कर सकूँ। वह सब भी मात्र सेवा भाव से। अनगिनत सप्ताह तक वे अपनी टीम के साथ इस कार्य में लगे रहे और मेरे समक्ष ब्लॉग का वह नया रूप पेश किया जो मुझे दिल से भा गया है। है तो सब कुछ वही, किन्तु भिन्न रूप में। पूरे ब्लॉग का अवलोकन करें और आप समझ पाएंगे कि मैं क्या कहना चाह रहा हूँ। आशा है आप को भी यह पसंद आएगा।