जब मैं बेंगलोर में  लिट फ़ेस्ट में बोल रहा था तो नारायणी गणेश ने मुझसे पूछा कि क्या प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग है?

ओह! मैने कहा “ तुम्हारा अर्थ है कि प्रसन्नता के लिए जुगाड़ ?

वह और अन्य श्रोता मेरे साथ धीरे धीरे  हंस दिए । जुगाड़ का अर्थ है कुछ अनूठा हल खोज लेना,  किसी समस्या के लिए कुछ नवीन हल खोजना, किसी समस्या के हल के लिए  ऐसा कार्य करना जिसकी अनुपस्थिति में शायद उसके लिए बहुत अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती ।आक्सफ़ोर्ड  इंग्लिश शब्दकोश ने सन २०१७ में आधिकारिक रूप से इस शब्द को सम्मिलित   कर लिया है । एक जुगाड़ हमेशा छोटा मार्ग नहीं होता,लेकिन छोटा  मार्ग  अधिकतर  एक जुगाड़ होता है।और यही  वह चीज़ है: कोई भी हल जो छोटे मार्ग से प्राप्त होता है वह सामान्य रूप से  समय से पूर्व शीघ्र समाप्त हो  सकता है। लेकिन यदि आप श्रेष्ठ  हल खोजने के लिए गम्भीर हैं तो आप छोटे रास्ते का सहारा नहीं ले सकते।

स्थायी पूर्ण संतुष्टि  हमारे दृष्टिकोण की गुणवत्ता, समझ और  क्रियान्वयन से आती है, यह हमारे स्वभाव और मूल्यों से आती है।

एक धनी व्यक्ति अपनी अंतिम साँसें ले रहा था, और उसके चारों ओर    उसके परिवार वाले खड़े हुए थे।एक दुखद बहस उनके बीच चल रही थी कि कौन क्या प्राप्त करेगा, उसकी सम्पत्ति और अन्य संसाधनों का बँटवारा किस प्रकार होगा आदि आदि।इस वर्तमान क्षणों में ये तथाकथित प्यारे  लोग चुप थे, कुछ  हाथ बांधे खड़े थे, कुछ की त्योरियाँ चढ़ी हुई थीं, कुछ औपचारिक रूप से और भी अधिक गम्भीर थे। सब उस वृद्ध व्यक्ति के मरने की प्रतीक्षा कर रहे थे जिससे कि उनकी वक़ील के साथ चर्चा आरम्भ हो सके।

उसी कमरे में एक कोने में उसके जीवन के तीन महत्वपूर्ण पहलू सम्पन्नता , प्रेम और विश्वास खड़े हुए थे। सम्पन्नता अलंकारों से सुसज्जित थी, प्रेम उत्साह से भर हुआ था। लेकिन विश्वास शांति से खड़ा हुआ था।शोर न करना यह उसका सामान्य तरीक़ा था,आख़िरकार विश्वास एक शांत भाव है।आप किसी को शब्दों से विश्वास दिला सकते हैं  लेकिन मात्र आपके कार्य ही इसका  निर्माण कर  सकते हैं।

प्रेम ने सम्पन्नता  से पूछा  तुम क्या करने वाली हो?” ऐसा दिखता है कि तुम सब उस मरने वाले व्यक्ति को छोड़कर जाने वाले हो।”

थोड़ा निर्लिप्त भाव से सम्पन्नता ने कहा “ मेरा मतलब है कि  ऐसा नहीं है कि मैं उससे सम्बद्ध नहीं हूँ। मैं स्वयं को विभाजित कर दूँगी और उसकी सम्पत्तियों, प्रतिभूतियों  , बैंक के खातों,और बेलैंस शीट  में जाकर रहूँगी। और यदि उसके उत्तराधिकारियों ने बुद्धिमत्ता पूर्ण चुनाव किय और मेरा ध्यान  रखा, तो मैं सामान्य से  जल्दी वापस आने में भी प्रसन्न रहूँगी।’

सम्पन्नता ने पलटकर पूछा प्रेम तुम्हारा  क्या विचार है ? जबकि विश्वास वहाँ  खड़ा रहा और उसने आत्म विश्लेषण के ढंग से मना किया ।
प्रेम ने कहा “ मैं थोड़ा अधिक  कोमल  हूँ। अभी तो मुझे  यहाँ से जाना होगा क्योंकि मुझे यहाँ के विषैले और कटुता पूर्ण वातावरण में दम घुटता  सा अनुभव हो रहा है।वे सब तुम्हारे ऊपर ही केन्द्रित हैं और मैं वहाँ नहीं रह सकता जहाँ मेरी आवश्यकता  नहीं होती।”
“ तो क्या तुम उनको हमेशा- हमेशा के लिए छोड़कर जा रहे हो?”

नहीं ऐसा आवश्यक नहीं है। यदि वे एक दूसरे के प्रति ध्यान, आदर, और सहानुभूति की भावना का विकास कर लेते हैं तो मैं ख़ुशी ख़ुशी वापस आ जाऊँगा।यह व्यक्ति बहुत महान था और जब यह धनी व्यक्ति अंतिम साँस लेगा तो  मैं  यहाँ से चला जाऊँगा।

यह देखकर कि सारे समय विश्वास पूर्णतया शांत था, वे उसकी ओर मुड़े और दोनों ने एक  साथ उससे पूछा “ क्या तुम भी जा रहे हो?”

उसने कहा मैं जा रहा हूँ और इसके सिवा मेरे पास और कोई विकल्प नहीं है।”

“ फिर तुम कैसे और कब वापस आओगे? तुमको यहाँ फिर से देखना अच्छा लगेगा।”

माफ़ करना मेरे दोस्तों लेकिन मैं थोड़ा भिन्न प्रकार से काम करता हूँ।

कैसे?

विश्वास ने अपना सिर हिलाते हुए कहा “ मैं वापस नहीं आऊँगा। यदि एक बार मैं चला जाता हूँ तो मैं हमेशा के लिए चला जाता हूँ।”

प्रसन्नता मेरे दृष्टिकोण में एक पूर्णता का भाव है।जो तीन चीज़ों से आता है।

१: उद्देश्य

जब तक आपके जीवन में कोई उद्देश्य नहीं होता तो आपको अपनी ऊर्जाओं को किसी सृजनात्मक चीज़ में लगाना अत्यधिक कठिन होता है। मन मानव अस्तित्व को   घुमाने वाली  वस्तु है।मैने अनुभव किया है कि यदि आपके पास वह चीज़ है जो आपने चाही लेकिन आपके पास कुछ अर्थपूर्ण करने को नहीं है , तो आप इतने अधिक हताश और खोए हुए होंगे जितना मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता। सुविधा सम्पन्न व्यक्ति जिनसे कि मैं अक्सर मिलता हूँ वे इतने अधिक स्वयं में खोए और दुखी होते हैं , कि  उनको जीवन निरंतर बोझ प्रतीत होता है।

अकेलापन, लाइलाज़ निराशा , बार बार व्याकुलता, स्थायी दुःख, एक कभी न भरने वाला  ख़ालीपन ये सभी एक ही  चीज़ से निकलते हैं , और वह है: एक निरुद्देशय जीवन।

उद्देश्य का अर्थ यह नहीं है कि आप जो कुछ  करना चाहते हैं वह कार्य बहुत आनंद प्रदान करने वाला हो। आपकी कार्य सूची में बहुत से उबाऊ कार्य निहित रहते हैं जिनको आप करते नहीं। और वह चीज़ है : यह जानकर कि यह आपको अपने अंतिम लक्ष्य की ओर ले जाएगा जो नीरस है उस पर  निशान लगाकर  उसे  नियम बद्धता से करना  । उद्देश्य का अर्थ है कि आपने कोई  ऐसी चीज़ ली है जो आपको यह अनुभव कराए कि आप अपनी योग्यता को इस संसार के साथ साझा कर रहे हैं। यह आपके अस्तित्व को लाभकारी  बनाएगा।

२: प्रेम

आप जो कर रहे हैं उससे प्रेम किए बिना प्रेरित रहना अत्यंत कठिन है। बिना उस प्रेम और प्रेरणा के आत्मानुशासन भी कठिन हो जाता है।और किसी चीज़ को प्रेम करने का एक तरीक़ा है कि जीवन के प्रसन्नता वाले हिस्से की ओर देखना, आत्म संदेह और कामनाओं की सरसराती हुई पत्तियों के नीचे बिखरे ख़ुशियों के छोटे छोटे मोतियों को प्राप्त करना है। अन्य शब्दों में यह यात्रा का आनंद लेना और विजय के भाव का अर्जन करना है।जब आप इस ओर कार्य  करने के पश्चात कुछ  प्राप्त करते हैं तो आपका आनंद स्वतः ही  बहुगणित हो जाता है।तेज़ी से  व्यायाम  करने के बाद एक अच्छा स्वादिष्ट  भोजन करना  या एक लम्बे थका देने वाले दिन के पश्चात फ़व्वारे के नीचे खड़े होना ऐसा करने के आनंद को अंतर की गहराई तक बढ़ा देता  है।

जो आप करते हैं उससे प्रेम करना उस समझ से आता है कि मेरे जीवन में जो मैं करना चाहता हूँ और जो मुझे करना है उसके बीच सावधानी पूर्वक संतुलन होना चाहिए। जितना अधिक मैं स्वीकार करना सीखूँगा और बाद में रस  लूँगा उतने ही  अधिक मुझे पहले की तुलना में अधिक अवसर मिलेंगे। यदि आप उन चीजों को  करने की इच्छा  रखते हैं जो आप जीवन में करना चाहते हैं तो उन चीज़ों में रस  लेना सीखें जो जिन्हें आपको करना चाहिए। जैसा कि कहते हैं” या तो वह करो जिसे आप प्रेम करते हैं या उसे प्रेम करो जो आप करते हैं।

३: विश्वास

विश्वास अन्य लोगों का  आप पर  जो विश्वास  है उसकी रक्षा करना  मात्र नहीं है, बल्कि स्वयं पर विश्वास भी है जो कि यदि अधिक नहीं तो उसके बराबर महत्वपूर्ण तो है ही। स्वयं पर विश्वास तब बढ़ता है जब आप जो कहते हैं वह करते हैं। जब आप कुछ करने का संकल्प लेते हैं और स्वयं से वादा करते हैं( उदाहरण के लिए मैं धूम्रपान त्याग दूँगा या एक सप्ताह में ५ दिन व्यायाम करूँगा आदि।) और उसका आदर नहीं करते तो आपके आत्मसम्मान को एक बड़ा झटका लगता है।

और हर बार जब ऐसा होता है तो आप स्वयं में थोड़ा विश्वास खो देते हैं और धीरे धीरे एक ऐसे बिंदु पर पहुँच जाते हैं , जहाँ आप अब स्वयं पर विश्वास नहीं करते। अब जब आप स्वयं ही ख़ुद पर विश्वास नहीं करते तो दूसरे या संसार कैसे आप पर विश्वास करेगा?बिना विश्वास के कोई सुरक्षा नहीं होती, और इसकी  कमी  परिणाम स्वरूप आत्मरक्षक   व्यवहार, फूला  अहंकार और हिचकिचाहट को प्रेरित करती  है।

एक सुंदर शाम को मुल्ला नसीरूद्दीन अपनी पत्नी के साथ अरबी कौफ़ी और  खजूर का आनंद ले रहा था। अपने प्रेमालाप के दिनों का स्मरण करते हुए उसने कहा “ तुम  बहुत सुंदर थीं और मैं जानता था कि तुम   इस बात को जानती थीं।”

वह मुस्कुराई, उसका चेहरा लाल हो गया और बोली “ मैं भी तुम्हारे प्यार में पागल थी।’

तो फिर तुमने इसे कभी प्रदर्शित नहीं किया? वास्तव में ऐसा क्यों है?  तुमने कभी नहीं सुना होगा कि एक सुंदर स्त्री एक पुरुष को प्रणय निवेदन करे हमेशा इसका विपरीत ही  होता है।

बेगम ने खजूर अपने मुँह में रखकर और कौफ़ी  की चुस्कियाँ लेते हुए विजयी भाव से कहा ‘कभी सुना है कि चूहेदानी चूहे के पीछे भागी ?”

कोई उत्तर न देते हुए मुल्ला शांत रहा और ऐसा दर्शाने लगा जैसे कि तश्तरी में से अच्छे खजूर चुनने में व्यस्त हो।

बेगम ने आगे बात करना जारी रखते हुए कहा “ तुम भी बहुत सुंदर  और ध्यान रखने वाले थे पर अब तुम वास्तव में बदल गए हो।’

कैसे?

“पहले तो तुम मेरे लिए हमेशा बहुत से कपड़े, आभूषण, बर्तन और भी। बहुत कुछ  लाया करते थे।परंतु अब तुम ऐसा कुछ नहीं करते।

मुल्ला ने कहा “ ओह बेगम आख़िरकार तुम बहुत भोली हो।जो मछली स्वयं ही  बालटी में हो उसके लिए किसी को चारे की क्या ज़रूरत!”

प्यार या विश्वास फाँसने  या प्रलोभन देने  के बारे में  नहीं है। यह एक दूसरे का  ध्यान रखने और सराहना  करने के बारे में और एक दूसरे का  सम्मान करने और उद्देश्य के बारे में है।

प्रसन्नता का रहस्य है ; किसी भी क़ीमत पर विश्वास  ( स्वयं और अन्यों का विश्वास) की रक्षा करें। प्रेम और उद्देश्य आपके जीवन में स्वयं ही चले  आयेंगे।  वे मिलकर प्रसन्नता की रचना करेंगे ।

वास्तव में यह इतना ही सरल है।

शांति।

स्वामी