वैराग्य के विषय पर मुझसे एक बार किसी ने पूछा;

वेदों और दार्शनिक ग्रंथों में शांति पूर्ण जीवन के लिए वैराग्य और साम्यता की बात की गयी है। क्या यह व्यवहारिक है और क्या ऐसा कर पाना  सम्भव  है?

हमारे भीतर अनेक हार्मोंस और भौतिक,रासायनिक और जैविक कारक होते हैं जो हमारे  दिन प्रतिदिन के मनोविज्ञान के साथ कार्य करते हैं।

ऐसे अनेक गुरु हैं जो अनेक चीज़ों के लिए कहते हैं इसे छोड़  दो और उसे छोड़ दो — आदि। हालाँकि उनको पता है कि आपके सुखों, स्वाद, और कामना से निरासक्त  होना सम्भव नहीं है, लेकिन वे निरंतर इन चीजों की ओर प्रेरित करते रहते हैं  क्योंकि वे जानते हैं कि वास्तव में निरासक्त  होना सम्भव नहीं है। यह हमारे स्वयं के मस्तिष्क और मनोविज्ञान का भाग है।  यह सदियों पुरानी चाल है , जो गुरु अपनी शक्ति को बनाए रखने के लिए अपने अनुयायियों के साथ चल रहे हैं।

मूर्ख न बनें।

मैं आपकी बात सुन रहा हूँ । आपके पास ऐसा करने का कारण हो सकता है। जैसे कि  यदि आप अपना कोलेस्ट्रोल का स्तर काम करना चाहते हैं, तो आपके  डाक्टर आपको तले हुए भोजय पदार्थों को लेने से बचने के लिए कहेगा। यदि आपको मधुमेह  है तो वह आपको शक्कर न लेने  और रोज़ पैदल घूमने जाने को कहेगा । वे आपको कह सकते हैं कि यदि आप स्वस्थ जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो सम्पूर्ण आहार और व्यायाम ज़रूरी है। बहुत बढ़िया मिठाइयाँ, तले हुए, पक्वान किसे नहीं पसंद होते। यदि वे हमारे स्वास्थ्य का निर्धारण नहीं करते तो शायद हम उनको कहीं भी दाएँ बाएँ अथवा बीच में ठूँस लेते। यदि आप हमेशा  जंक फ़ूड खाएँ तो भी आप मरेंगे नहीं ( हालाँकि ऐसा हो सकना सम्भव है।)

लेकिन जो भी स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं, वे  उनको संयम पूर्वक लेते हैं और साथ ही व्यायाम भी करते हैं। क्योंकि  वे जानते हैं कि इसका मूल्य चुकाना होगा। यदि आप ऐसा नहीं करते तो इसका  मूल्य चुकाना होगा।

यही वैराग्य, ईमानदारी, सहानुभूति आदि गुणों के साथ भी है। यदि आपको  उनका अभ्यास नहीं करना है। यदि आपको क्रोध, ईर्ष्या, घृणा और नकारात्मकता को नहीं छोड़ना  है ( इनमें से कोई भी सरल या असम्भव नहीं है।) तो बस इतना याद रखिए कि  इसका मूल्य चुकाना होगा। इसका मूल्य  आपकी शांति और आपका भावनात्मक स्वास्थ्य हो सकता है। एक सच्चे गुरु कभी भी एक कार्य  या मार्ग नहीं बताते । वे  बस यह बताते हैं, आपके लिए क्या अच्छा है और शेष आपके ऊपर निर्भर है।

हो सकता है आपके गुरु अनावश्यक रूप से  आपकी कमज़ोरियों को इंगित करें या शायद  आपका सत्य आपको आहत करने वाला हो। हो सकता है उनमें से अधिकांश धृष्ट और मूर्ख हों। फिर भी अनेक ऐसे संत हैं जिन्होंने अपना जीवन हमारे संसार के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। लेकिन यहाँ मेरा लक्ष्य गुरुओं अथवा अनुयायियों की चर्चा करना नहीं बल्कि वैराग्य और त्याग  है।

लगाव होना स्वाभाविक है, कभी-कभी यह सांत्वना देने वाला हो सकता है, लेकिन जैसा कि कहा गया है कि इसका भी एक मूल्य होता है। यदि आप जीवन के भावनात्मक उतार चढ़ाव पर सवारी करके ख़ुश हैं, फिर सभी साधनों से अपने वर्तमान स्वभाव और भावनाओं से चिपके रहें। लेकिन यदि आप गहरे और स्थायी आनंद का अनुभव करना चाहते हैं तो ऐसा बहुत कुछ है जो आपको त्यागना होगा।

जब तक आप वैराग्य का अभ्यास करना नहीं सीखते तब तक त्यागना सम्भव नहीं है। उदाहरण के लिए जब कोई आपको आहत कर देता है तो आप कह सकते हैं कि आपने उसे क्षमा कर दिया है या आपने उसे छोड़ दिया है, किंतु जब तक आप आहत करने वाले से स्वयं को आध्यात्मिक रूप से अलग नहीं कर लेते तब तक छोड़ देना असम्भव है। उनके बारे में विचार आपको परेशान करते रहेंगे, उनकी याद अभी भी आपको बेचैन करती रहेगी और जो उन्होंने आपके साथ किया वह निरंतर आपको चोट पहुँचाता रहेगा। आप स्वयं को अलग करें और दर्द अदृश्य होना आरम्भ हो जाएगा।

आप पूछेंगे कि जब हम जानते हैं कि यह हमारे लिए दुःख लाता है तो हम हमारे भूतकाल से क्यों जुड़े रहते हैं?

मैं आपको मोह पर कुछ प्रकाश डालने के लिए एक उदाहरण देता हूँ ;

दक्षिण भारत की घटना है, पूर्व काल में  वहाँ  कुछ स्थानों में बंदर नियमित रूप से खेतों में फ़सल नष्ट कर देते थे। किसान भी दयावश बंदरों को गोली नहीं मारते थे। वे उनको पकड़ लेते थे,और जंगल में ले जाकर छोड़ देते थे। लेकिन उनको पकड़ना कोई आसान काम न था यह इतना कठिन था कि जिसकी कल्पना करना कठिन है । वे बंदर  वृद्ध और उत्तेजित थे। और यदि आप सोचते हैं कि प्रक्षेपास्त्र  विज्ञान कठिन है तो बंदर पकड़ने का प्रयास कीजिए ( या इसके समतुल्य अर्थात ध्यान करने का प्रयास कीजिए)। किसानों  ने जाल बिछाए लेकिन पाया कि अक्सर जाल में बंदरों के पंजे या उँगलियाँ या हाथ पैर टूट जाते थे। वे दर्द से चिल्लाया करते थे और कष्ट भोगते थे और कुछ इतने दुर्भाग्यशाली होते थे कि वे जीवन भर के लिए अपाहिज

किसान को बंदरों को बिना चोट पहुँचाए पकड़ने का कोई रास्ता खोजना था। यह तो सम्भव नहीं है कि हर चीज़ को छोड़कर बस दिन भर बंदरों को देखते रहें।

एक बुद्धिमान किसान ने कहा “ एक सरल मार्ग है। मैं बंदरों पर और उनके व्यवहार पर ध्यान दे रहा हूँ। हम उनको बिना चोट पहुँचाए पकड़ सकते हैं।”

उसने अपने कहने का मतलब समझाने के लिए उसने एक नारियल में एक छोटा  सा छेद कर दिया, बस इतना बड़ा कि उसमें बंदर का हाथ घुस सके, और उसके भीतर एक केला रखकर उसे झाड़ के ऊपर बाँध दिया।

कुछ ही  देर में एक बंदर आया और केले की सुगंध के कारण उसने नारियल के अंदर हाथ डाला। लेकिन जब वह हाथ बाहर निकालने लगा तो उसका हाथ नारियल के भीतर फँस गया। क्योंकि उसका छेद छोटा था और उसने अपनी मुट्ठी में केला पकड़ रखा था।

बुद्धिमान किसान झाड़ पर चढ़ने लगा। बंदर अपनी जगह पर था।

वह केले को छोड़कर अपना हाथ बाहर निकाल सकता था किंतु उसने केले को ज़ोर से पकड़ रखा था। बंदर ने उपद्रव भी मचाया लेकिन किसान शांति से उसके पास गया और बंदर को पकड़ लिया।

उन लोगों ने सैकड़ों नारियल झाड़ों पर बांधे और शीघ्र ही  सभी बंदरों को पकड़ लिया गया।

इस कहानी की शिक्षा है कि  बंदर की परेशानी का मूल कारण उसका केले के प्रति मोह  है।

गहन  मोह का मूल कारण है अज्ञान । बंदर ने अपनी स्वतंत्रता के स्थान पर केले को अधिक महत्व दिया। केले को त्यागने के लिए इसे कामना के विषय ( जो कि इस कहानी में मोह है ) से निरंतर वैराग्य का अभ्यास करना होगा।आपको कुछ सप्ताह तक किसी चीज़ से स्वयं को निरंतर अलग रखना होगा और वैराग्य स्वयं ही आ जाएगा। उदाहरण के लिए आप चाय को कुछ सप्ताह के लिए छोड़ दीजिए और आप देखेंगे कि चाय की इच्छा समाप्त हो जाएगी। मेरा विश्वास कीजिए ऐसा करके देखिए।

साथ ही  साथ त्यागना उतना कठिन नहीं है जितना यह प्रतीत होता है। आप रात्रि में अपने बिस्तर पर जाते समय अपने विचारों और मन को भी त्याग सकते हैं। वास्तव में त्यागे बिना सोना सम्भव ही नहीं है। नींद में आप जिस पुनर्जीवन और शांति का अनुभव करते हैं वह त्याग के ही कारण है। यदि आप जब जाग रहे हैं तब भी ऐसा ही अनुभव करना चाहते हैं तो त्याग करना  आवश्यक है।

चाहे आप किसी से भी जुड़े हों यह आपको बाँध ही  लेगा। यह अच्छा है या बुरा है यह आपका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है।हमारे मन के भीतर की जेल  कामना की ईंटों से बनी है जिसमें मोह की सीमेंट लगी  है। वैराग्य ही  एकमात्र वह बुलडोज़र है, जो इस जेल को गिरा सकता है।

उपरोक्त उदाहरण को देखें  यदि मन एक बंदर है तो केला कामना है। बंधी हुई मुट्ठी मोह है और बुद्धिमान किसान वैराग्य का प्रतीक है। सभी जीवन के वृक्ष पर चढ़े हुए हैं। और नारियल, नारियल क्या है? यह संसार नारियल है।

शांति।

स्वामी