जीवन की सर्वोत्तम उपलब्धियों में से एक है कुछ ऐसे मित्रों का होना जिन पर आप निर्भर हो सकें व कुछ भी साझा कर सकें। समय के साथ अधिकांशतः मित्रता का हर बंधन ढीला पड़ जाता है, किन्तु कुछ लोग जीवनपर्यन्त उसे बनाए रखते हैं। एक विश्वसनीय मित्र का होना एक निष्ठावान जीवन साथी, जिसे आप प्रेम [ वास्तव में ] करते हों, के बाद दूसरा सबसे सुंदर उपहार होता है।

मैं ऐसे बहुत से युवाओं से मिलता हूँ जिनका जीवन पूर्ण रूप से उनके मित्रों के आसपास ही घूमता है। अपने मित्रों की प्रसन्नता के लिए वे बहुत बार आवश्यकता से अधिक, सीमा से बाहर जा कर, ऐसे कार्य भी कर जाते हैं जो साधारण स्थितियों में वे न करें। कभी कभी वे इसे मित्रों का दबाव कह कर संबोधित करते हैं। एक बार किसी ने मुझसे पूछा, “मैं यह कैसे जानूँ कि कौन मेरा सच्चा मित्र है?” मैंने सोचा कि इस प्रश्न पर ध्यान देना चाहिए।

मुझे आपके साथ एक छोटा सा प्रसंग साझा करने की अनुमति दें, जो ग्योकूकू कार्सोन की पुस्तक “द हिडन लैम्प” से लिया है –

यो न मौरीन स्टुअर्ट एक-दिवसीय गोष्ठी समारोह की अध्यक्षता कर रही थीं और उनकी एक शिष्या को शीघ्र ही पादरी घोषित किया जाना था। किनहिन, अर्थात, चलते हुए ध्यान करना, के दौरान, जिस समय वह शिष्या मौरीन के पीछे चल रही थी, तभी उसने एक अन्य स्त्री को लड़खड़ाते हुए गिरने को होते देखा। बिना सोचे उसे शिष्या ने स्त्री को सहारा देने के लिए अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दिया। मौरीन ने उस शिष्या के हाथ को कठोरता से एक नहीं दो बार झटक दिया। वह दूसरी स्त्री गिरी नहीं।

अगली सुबह, जब वह शिष्या नाश्ते में चाय डाल रही थी, मौरीन उसकी ओर मुड़ी और बोली, “क्या तुम जानना चाहोगी कि मैंने कल तुम्हें क्यों झटका?”
“जी हाँ, वह बोली।”
“तुम आवश्यकता से अधिक सहायता करने को तत्पर थीं। तुम्हें लोगों को अपना संतुलन स्वयं बनाने देना होगा। उनके लिए बैसाखी न बनो।”
शिष्या ने अति-नम्रता पूर्वक अपना सिर उनके सम्मुख झुका दिया।

मेरे विचार में यही मित्रता का सारांश है। एक अच्छा मित्र वह होता है जो जब आप गिरें तो आपको थाम लेगा, किन्तु वह आपकी बैसाखी नहीं बनेगा। मित्रता का यह अर्थ नहीं कि आप कभी भी दूसरे व्यक्ति के विरोध में खड़े नहीं होंगे, अथवा, आप सदा उनकी हाँ में हाँ ही मिलाएंगे, भले ही वह कुछ भी कहना या करना चाहें। यह है, अपनी स्वयं की राय दूसरे के सामने रख पाना, किन्तु जैसा वे ठीक समझें उन्हें वैसा चयन करने के अधिकार का सम्मान करना। जब आप उनकी बैसाखी बन जाते हैं तो आप उनकी उन्नति में बाधा उत्पन्न कर देते हैं। बिना यत्न व अवरोध का सामना किए, एक लारवा कभी भी तितली में रूपांतरित नहीं होता; एक बीज धरती द्वारा प्रस्तुत अवरोध का सामना किए बिना कभी भी प्रस्फुटित नहीं हो सकता।

एक ऐसा व्यक्ति जो आपकी हर बात को आँखें मूँद कर मानता चलता है, केवल इसलिए ताकि आप खुश रहें, अथवा कोई ऐसा जो केवल तब ही खुश होता है जब आप हर कार्य उनकी इच्छानुसार ही करें, तो ऐसा व्यक्ति आपका सच्चा मित्र नहीं है, क्योंकि, सच्ची मित्रता स्वतंत्रता के पक्के जोड़ से बनती है व समानता की भावना के साथ और निखरती है। कोई भी ऐसा संबंध जिसमें एक व्यक्ति हर समय, हर तरह से केवल दूसरे को खुश रखने में ही लगा रहे, एक दिन वह संबंध बिखर जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं। चूंकि यह व्यावहारिक नहीं, और शीघ्र ही यह सब बहुत थका देने वाला हो जाएगा। किसी भी अवांछनीय विवाद में, ‘असहमति की सहमति’ बना कर दो अच्छे मित्र उस प्रसंग को समाप्त कर लेते हैं।
एक सच्ची मित्रता, जीवन में आपको आपके द्वारा चयनित मार्ग पर चलने की स्वतंत्रता प्रदान करती है, और, एक अच्छा मित्र, जीवनपर्यंत साथ देने वाला मित्र पाने का एक मात्र उपाय है कि आप स्वयं ऐसे मित्र बनें। रेल्फ वाल्डो इमर्सन ने कुछ इसी तरह अपनी बात कही थी।

मेरा तात्पर्य इस बात को एकदम साधारण रूप देने का नहीं, किन्तु मैंने देखा है कि पुरुषों की अपेक्षा, सामान्यत:, स्त्रियाँ जीवनपर्यंत मित्रता निभाने में आगे हैं। जब दो पुरुष मित्र मिलते हैं, हो सकता है वे खेलों, राजनीति, आटोमोबाइल, विभिन्न यंत्र-उपकरण, व्यवसाय संबन्धित विषयों पर विस्तार से चर्चा करते रहें, किन्तु अपने स्वयं के विषय में, अपने जीवन के बारे में, वे बहुत कम बात करते हैं। दो अति घनिष्ठ पुरुष मित्र मिल कर, थोड़ा खाने पीने का सामान सामने रख कर, एक पूरा दिन केवल क्रिकेट मैच देखते हुए बिता सकते हैं, बिना एक भी शब्द बोले। ऐसा करके उन्हें कुछ समय के लिए अच्छा भी लगेगा, किन्तु ऐसी मुलाक़ात के उपरांत जब वे वापिस घर जाते हैं तो मानसिक रूप से उन्हें हल्का महसूस नहीं हो पाता, चूंकि उनका कोई भावनात्मक उपचार नहीं हो पाया।

दूसरी ओर, जब दो सहेलियाँ साथ साथ एक दिन बिताती हैं, तो वे ख़रीदारी की बातें तो करती हैं, किन्तु साथ ही वे एक दूसरे के बारे में भी चर्चा करती हैं। वे अपने अपने जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव, एक दूसरे के साथ अवश्य साझा करती हैं (यदि वे सच्ची मित्र हैं)। यह उन महत्त्वपूर्ण तथ्यों में से एक है जिसके परिणामस्वरूप मित्रता आपके जीवन को रूपांतरित करने का सामर्थ्य रखती है, चूंकि यहाँ बिना जाँचे-परखे आपको अपनेपन के भाव से सुना जाता है। और, यही होता है एक सच्चा मित्र – ऐसा व्यक्ति जिस पर आप भरोसा करते हैं एवं जो बिना परखे आपकी बात सुनता है।

एक पत्नी रात को घर देर से पहुँचती है और उसके पति उससे पूछते हैं –
“तुम इतनी देर तक कहाँ थी?” वह संदहपूर्ण भाषा में कहता है।
“मैं अपनी सबसे अच्छी मित्र के साथ थी।”
“कौन सी?”
“मुझे आपको उसका नाम बताने की कोई आवश्यकता नहीं।”
पति अविश्वास का भाव लिए, उसकी सभी छ: निकटतम सहेलियों को फोन करता है किन्तु हर कोई यही बताती है कि वह उसके साथ नहीं थी। तथापि, वो बात को, यह सोच कर वहीं समाप्त कर देता है कि शायद ऐसी कोई बात है जो वह इस समय बताना नहीं चाह रही।

इसके एक सप्ताह बाद, एक दिन पति रात के तीन बजे घर पहुंचता है। वह नशे से निढाल, तुरंत बिस्तर पर लुढ़क जाता है। कुछ घंटे पश्चात जब वह उठता है तो पत्नी उससे वही प्रश्न करती है।
“कल रात मैं अपने परम मित्र के साथ बाहर गया था।”
“कौन सा?”
“मुझे तुम्हें उसका नाम बताने की आवश्यकता नहीं।”
पत्नी उसके दस अच्छे मित्रों के नंबर ले मिलाना शुरू करती है।
दस में से हर एक यही कहता है, “हाँ, वह मेरे साथ ही था। रात वह बहुत देर से यहाँ से गया।” एक मित्र तो कुछ अधिक ही भावुक हो कहने लगा कि उसका पति अभी उसी के घर में सो रहा है।

इस व्यंग्य से, एक सच्चे मित्र का, आप जो चाहें अर्थ निकाल सकते हैं।

अच्छे मित्र एक दूसरे की पसंद-नापसंद व व्यक्तिगत भावों का सम्मान करते हैं। वे एक गुलदस्ते में गूँथे फूलों की भांति होते हैं, हर फूल अपनी सुंदरता से उस गुलदस्ते की शोभा बढ़ाता है। हर हिस्सा, बिना सम्पूर्ण पर आच्छादित हुए, उसे संपूर्णता प्रदान करता है।

यदि आपको जीवन में सच्चा/सच्चे मित्रों का सानिध्य मिला है तो उसे/उन्हें जाने न दें। मेरे कहने का आशय यह भी नहीं कि आप उनके साथ चिपक जाएँ। तथापि, अपनी मित्रता का मूल्य अवश्य पहचानें। जानते हैं क्यों? हम जिसका मूल्य नहीं समझते, उसे अपने पास रख भी नहीं पाते। यह जीवन बहुत ही छोटा है, जो हमारे जानने समझने से कहीं अधिक तीव्रता से बीता जा रहा है।

अपने मन में द्वेष का भाव बनाए रख कर अपनी मानसिक शांति को तहस नहस करना कभी भी उचित नहीं कहा जा सकता। ऐसे में यह अमूल्य जीवन एक भार बन जाता है। सागर में समय समय पर लहरें आती जाती रहती हैं, किन्तु सागर उन लहरों का परित्याग नहीं करता। इसी प्रकार, मित्रता में आने वाली असहमति व मत-भेद का यह अर्थ नहीं कि आप अपने मित्रों को छोड़ दें। एक बड़ा दिल रखें, तब आप अपने प्रियजनों की गलतियों से तत्परतापूर्वक ऊपर उठ पाएंगे। जैसा कि मैंने पहले भी लिखा है कि आपका जीवन उतना ही सुंदर बनता है, जितने प्रेम से आप रिश्तों को संभालते हैं, दूसरों के साथ, स्वयं के साथ।

आपके जीवन का हर एक पल सागर की एक एक बूंद के समान है। जैसे हर बूंद में आकर्षक मोती बनने कि क्षमता विद्यमान है, वैसे ही हर पल में जीवन के अपरिमित सौंदर्य की स्मृति बनने की संभावना है।

हमारा जीवन उतना ही सार्थक है, जहां तक हमने जीवन में जो कहा, जो किया, जो सोचा या जो महसूस किया, उसकी स्मृति होती है। आइये इसे अच्छी बातों से सँजोएँ।

इससे अपनापन रखें। इसका सम्मान करें। इससे प्रेम करें ताकि यह भी आपको प्रतिदान में प्रेम दे।

शांति।
स्वामी