यहाँ हिन्दी में एक वीडियो प्रवचन है। प्रस्तुत है इसका एक संक्षिप्त अनुवाद –

आज मेरे प्रवचन का विषय है मृत्यु, एक चरण जिससे हर किसी को गुजरना होगा। वह मृत्यु जो शरीर के अंत से शुरू होता है – आत्मा का नहीं, केवल शरीर का अंत। पहले मैं एक छोटी सी कहानी बताना चाहता हूँ। एक व्यक्ति ज्ञान और प्रज्ञा की खोज में एक साधु के पास जाता है। वह संत से पूछता है कि वे इतने संतुष्ट और शांत कैसे रह पाते हैं? कया वे कभी दुनिया के सुख सामग्री के लिये तरस्ते नहीं? पूरी कहानी सुनने के लिए प्रवचन देखें …

मृत्यु क्या है? यह एक सुंदर ठहराव हैं, केवल एक छोटा सा ठहराव। यह अंत नहीं है। जिस प्रकार एक लंबी यात्रा में आप एक विराम लेते हैं, भोजन के लिये या अपने आप को ताजा करने के लिए, उसी प्रकार आत्मा की जन्म जन्मांतर यात्रा में मृत्यु एक अल्प विराम है। जब आपकी आत्मा एक नया शरीर धारण करती है, जब आप एक नया जन्म लेते हैं, आपको फिर से एक बच्चा बनने का, फिर से युवा बनने का, संसार के सुखों का अनुभव करने का, अपनी इच्छाओं व अधूरे स्वप्नों को पूरा करने का अवसर मिलता है।

भय अज्ञानता में विराजता है और बढ़ता है। हम अनिश्चित परिस्थितियों से, जीवन से, मृत्यु से, कुछ खोने से डरते हैं। जैसे ही हम ज्ञान प्राप्त करते हैं, भय स्वचालित रूप से दूर चला जाता है। क्योंकि प्रज्ञा एवं भीतरी ज्ञान आपको दृढ़ता और विश्वास देता है। और, यह दृढ़ता और विश्वास आपके भय को समाप्त करता है।

और जानने के लिए इस प्रवचन को देखें।

शांति।
स्वामी