क्यों लोग, विशेषकर पुरुष, एक रिश्ते में विश्वासघात करते हैं? विश्वासघात विश्वास की प्रताड़ना होती है अर्थात आपके महत्व को नहीं समझा जा रहा है और कभी भी, कैसे भी आपकी सवारी की जा सकती है। मानवीय व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं में से विश्वासघात की आदत भी एक है। यह एक जागरूक कृत्य है। जब आतंरिक संतुष्टि की कमी होती है लोग विश्वासघात करते हैं। यद्यपि वो न्यायसंगत नहीं है, फिर भी यह प्राथमिक कारण है; औचित्य से बाहर जाकर ये लोग आनंद की संतुष्टि ढूँढते हैं। किसी की भी संतुष्टि कदाचित ही किसी बाह्य तत्व पर निर्भर करती है; इस तरह के तत्व शायद प्रभावित तो करते हैं किन्तु आंतरिक शान्ति फिर भी व्यक्तिगत ही रहती है।आप संसार के सबसे उत्तम पति या पत्नी हो सकते हैं, आप अत्यंत स्नेहमय, करुणामय, दयालु और विश्वासपात्र हो सकते हैं, परंतु इससे अपने साथी की निष्ठा प्राप्त हो इसकी निश्चितता नहीं है। यदि आपका साथी बेचैन प्रवृत्ति का हो, जैसे कि कोई बंदर जो एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदता हो या जैसे कि कोई लंगूर जो कभी किसी एक पेड़ पर टिक ही ना पाए, तो आपके साथी की अन्य कार्य-कलापों में लिप्त होने की संभावना अधिक है। क्योंकि मुख्यतः वह उसके संरचना  का हिस्सा है। विश्वासघात का कोई कारण नहीं होता, केवल एक बहाना है। अतः तीन मुख्य कारण हैं:

१. सुनहरा अवसर पाते ही मनुष्य अपना उत्तरदायित्व भूल जाता है

यह सबसे पहला कारण है। विश्वासघात करते हैं क्योंकि कर सकते हैं। समय और अवसर मिलने पर कुछ लोग सत्य को तोड़-मरोड़ सकते हैं और खतरे की हद तक नीचे गिर सकते हैं। रिश्ते में बंधने के लिए, विशेष रूप से विवाह में, व्यक्ति को पारस्परिक और व्यक्तिगत दायित्वों को निभाना पड़ता है। जब व्यक्ति अवसर पाते ही दायित्वों को भूल जाता है, तब उसकी परिणति विश्वासघात में होती है। बात सदैव अधर्म की नहीं है, ये व्यक्ति के सामाजिक, नैतिक, भावनात्मक और आर्थिक दायित्वों के अपूर्णता की है। वास्तव में, अक्सर इन स्थितियों में ग़ैर ज़िम्मेदारी ही रिश्तों के टूटने का कारण बनती है। यदि आपका साथी अवसर का उपयोग करके अपने दायित्व को पूरा नहीं करता है, यह छल, निष्ठाहीनता और गैर प्रतिबद्धता का एक संकेत है। विवाह प्रतिबद्धता का ही दूसरा नाम है।

२. वासना मनुष्य को अंधा कर देती है

यह एक मुख्य कारण है। सभी जीव जंतु परमाणुओं, अणुओं और कोशिकाओं से बने हैं। इसी प्रकार मानव मन विचारों के परमाणु टुकडों से बना है। प्रत्येक टुकड़ा अपने आप में पूरा और स्वतंत्र है। प्रेम एक फिल्म या चल-चित्र के समान है – यह रुकता नहीं है और समय के साथ और गहरा हो जाता है, जबकि वासना मात्र एक चित्र के समान है, जो अल्पकालिक होती है। सबसे पहले वासना केवल मन की एक सोच होती है, उसके बाद ही शरीर उसकी पूर्ति करता है। इस सोच को मन से हटाना इतना सरल नहीं है। अधिकतर लोग आसान मार्ग अपना लेते हैं, जो है अपनी वासना की प्यास शांत करना, जिस से अस्थायी रूप से आप उस सोच से छुटकारा पा सकते हैं। परंतु, क्योंकि विचारों का कोई अंत नहीं, कुछ समय बाद वे व्यक्ति फिर से वासना का अनुभव करते हैं। यह एक अनंत चक्र है। जो कुछ भी आपके मन और व्यक्तित्व को सीमित कर देता है, चाहे वो आदत हो या धर्म, या जो कुछ भी आपके मन में अपराध की भावना जगाता है, वे सभी आप को निर्बल कर देते हैं। और जब आप निर्बल बन जाते हैं, आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ की जगह अपने मन की आवाज़ को सुनते हैं। वासना से अंधा व्यक्ति जब अनैतिकता का मार्ग चुनता है, इसका अर्थ है कि वह दुर्बल हो गया है। यदि आपके अंदर वासना हो भी, तो वह प्रेम से उत्पन्न वासना होनी चाहिए।

३. आदतें आसानी से छूटती नहीं हैं

कुछ व्यक्ति धोखा देते हैं क्योंकि यह उनकी आदत होती है। इन आदतों को त्यागने के लिए अनुशासन और आत्मविश्लेषण की आवश्यकता है। आदतें अक्सर एक झुंड में पाई जाती हैं। अर्थात यदि आप कुछ अच्छी आदतें अपनाने लगें तब आप देखेंगे कि और अच्छी आदतें सीखनी आसान हो जाती हैं। अगर आप ध्यान से देखें, तो आप पाएंगे कि एक सज्जन में कईं अच्छी आदतें होती हैं और एक दुर्जन में कईं बुरी आदतें। जो व्यक्ति आसानी से झूठ कह सकता है, वह आसानी से धोखा भी दे सकता है। आप अपने अतिरिक्त किसी की आदतें नहीं बदल सकते। जब आप का साथी अपनी आदतों को बदलने का निर्णय कर लेता है और उनके प्रति कार्य करता है केवल तब ही वह बदलता है। परिवर्तन की शुरुआत बाहरी कारणों से हो सकती है, परंतु संपूर्ण परिवर्तन सदैव एक आंतरिक निश्चय से ही सफल होता है। इसी कारण ध्यान और साधना से आपको बदलने की शक्ति मिल सकती है। ध्यान करके आप अपनी भीतरी मानसिक शक्ति को जगा सकते हैं।

विश्वासघात की परिभाषा संस्कृति और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। कुछ संप्रदायों, जातियों, संस्कृतियों और धर्मों में पुरुष को एक से अधिक विवाह करने की अनुमति दी जाती है। नैतिकता सदैव एक पूर्ण और स्वतंत्र अवधारणा नहीं होती है। जो आप के लिए नैतिक हो, वो किसी और के लिए अनैतिक हो सकती है। तो ऐसे में आप ये कैसे पता करें कि आपने जो किया वह कार्य नैतिक है या अनैतिक, क्या आपने धोखा दिया है या वह केवल एक छोटी सी भूल है? वास्तव में इस प्रश्न का उत्तर सरल है। सबसे पहली बात – आपकी अंतरात्मा सदैव आपको सत्य का मार्ग दिखाती है। यदि आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को सुनेंगे, तो आपको उचित और अनुचित में अंतर पता चल जाएगा। दूसरी बात, यदि आपको सच में लगता है कि आपने कुछ भी अनुचित नहीं किया है या यह एक छोटी सी भूल थी, तो आपको अपने पति या पत्नी से जाकर स्पष्ट रूप से कह देना चाहिए या अपनी भूल स्वीकार करनी चाहिए।

जैसे व्यायाम, आहार और एक स्वस्थ जीवन शैली से रोगों की संभावना कम हो जाती है, वैसे ही तालमेल, सद्भाव और सच्चाई से रिश्तों में विश्वासघात की संभावना कम हो जाती है। एक दूसरों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता दें ताकि आप अपने व्यक्तित्व को और बेहतर जान सकें तथा अपनी पहचान बना सकें। व्यक्तित्व जितना प्रबल हो, रिश्ते में विश्वास भी उतना ही प्रबल हो जाता है। किसी भी विवाह में संपूर्ण संतुष्टि तब मिलती है जब आपको अपने साथी पर हर विषय में भरोसा हो – भावनात्मक, शारीरिक, बौद्धिक और आर्थिक।

कोई भी बुरा नहीं बनना चाहता, कोई भी दुखी नहीं  होना चाहता और किसी का लक्ष्य तनाव नहीं होता। किन्तु इच्छाओं या वासनाओं से बंधकर और अपनी आदतों से मजबूर होकर व्यक्ति ऐसे बुरे काम करता है जिस पर वह बाद में पछताता है।

मैं इस विषय पर आगे जाकर शायद और विचार प्रकट करूंगा, खासकर उस स्थिति पर जब रिश्तों को तोड़ने में ही समझदारी होती है।

तब तक, एक दूसरों का सम्मान करें और एक दूसरों की शक्ति बनें और पति-पत्नी के रिश्ते को संपूर्णता प्रदान करें। रिश्ते की शक्ति और गहराई इस पर निर्भर है कि आप अपने पति या पत्नी को कितनी संतुष्टि देते हैं और आप उन्हें कितना महत्व प्रदान करते हैं।

शांति।
स्वामी