एक व्यक्ति था। वह सदा सकारात्मक रहता था। जब कभी कुछ अप्रत्याशित घटना घटती, उसकी प्रतिक्रिया होती, “यह इससे भी अधिक बुरा हो सकता था”। यहाँ तक कि यह सब उसके मित्रों को नाराज करने लगा। जब कोई हर समय पूर्णत: सकारात्मक रहता है तो यह औसत सोच वालों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

एक दिन उसका एक मित्र उसके पास आया और बोला, “कल रात मैंने स्वप्न में देखा कि मैं कार चला रहा था और मेरी भयंकर दुर्घटना हो गई। मेरे शरीर की हर एक हड्डी चकनाचूर हो गई। चिकित्सकों ने हर संभव प्रयत्न किया किन्तु वे मुझे बचा नहीं पाये। मुझे विद्युत के झटके तक दिये गए परंतु कोई सफलता नहीं मिली। और, अंततः, उन्होने मुझे मृत घोषित कर दिया। यमदूत मुझे बलपूर्वक नरक के द्वार तक ले गए। वहाँ मुझे बुरी तरह परिताड़ित किया गया और मैंने अत्यधिक कष्ट अनुभव किया। तत्पश्चात, उन्होंने मुझे ले जाकर बहुत गर्म तेल की कढाही में डाल दिया। मेरा बदन जल गया, मैं रोया, चिल्लाया, किन्तु किसी ने भी मेरी सहायता नहीं की। ऐसा कष्ट मैंने पहले कभी नहीं झेला। जब मैं प्रातःकाल उठा तो बहुत सहमा हुआ था। मैं अभी भी सदमे में हूँ। यह तो बहुत बुरा संकेत है।”

“अरे, ऐसी कोई बात नहीं, डरो मत,” वह व्यक्ति बोला, “यह इससे भी अधिक बुरा हो सकता था।”
“तुम यह कैसे कह सकते हो कि इससे भी अधिक बुरा हो सकता था! भला इससे अधिक बुरा और क्या हो सकता है?” उसका मित्र झल्लाया।
“यह सब सच भी तो हो सकता था,” वह व्यक्ति शांत स्वर में बोला।

यह सब सच भी तो हो सकता था – एक विचारणीय कथन है। भय हर जीवित प्राणी में स्वाभाविक रूप से विद्यमान होता है; ऐसा भय अचानक उपजा हो सकता है अथवा तो पहले घटित घटनाओं के परिणाम स्वरूप – इन पर मैं आने वाले समय में चर्चा करूंगा। भय व्यक्ति को सकारात्मक होने से रोकते हैं। वे आपको दुर्बल कर देते हैं। यदि आप अपने अतीत पर एक दृष्टि डालें तो आपको एहसास होगा कि वास्तव में आपके भय मात्र एक प्रतिशत भी सत्य नहीं हुए, और, वह भी पूर्ण रूप से तो कभी नहीं। यही स्मरण योग्य सूत्र है। जब कभी भी अपने क्रिया-कलापों अथवा लक्ष्यों के प्रति आपकी सकारात्मकता में कुछ कमी आने लगे, चूंकि आपको यह भय लगने लगे कि कहीं जीवन में कष्टकारी स्थितियाँ न पैदा हो जाएँ, उस क्षण अपने को स्मरण करवाएँ कि पहले भी कई बार आपको ऐसा ही महसूस हुआ, किन्तु, हमेशा आपके भय गलत सिद्ध हुए।

जब आप विद्यालय में थे, संभवतः आप अपने गणित अथवा विज्ञान के अध्यापक को ईश्वर स्वरूप मानते हों, ऐसा व्यक्ति जिसके हाथ में आपका सम्पूर्ण भविष्य है, परंतु ऐसा था नहीं; और आप उत्तीर्ण होते गए। प्रायः हर वर्ष, हर सत्र में आपको परीक्षा से डर लगता था, किन्तु आप अधिकांशत: उत्तीर्ण ही हुए, यदि हमेशा नहीं भी तो।

जब कंपनियाँ अपने कर्मचारी कम कर रहीं थीं; आर्थिक व्यवस्था बिगड़ी हुई थी; जब शेयर बाजार धराशाही हो रहा था; शायद इसका प्रभाव आप पर भी पड़ा हो; किन्तु आप इन सबसे बाहर आ ही गए। वह दिव्य-सत्ता जो हर प्राणी में विराजमान है, उसके द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि आप भूखे न सोएँ, आपके पास रहने को घर, तन पर वस्त्र व दवा उपलब्ध हों।

सकारात्मक बने रहना मानसिक रूप से तैयार रहने का विषय है। इसका अर्थ है कि आप जानते हैं कि आपके लिए दुनिया समाप्त नहीं होने जा रही। आपको स्मरण है कि हर आने वाला दिवस आपके लिए कुछ नया करने का अवसर ले कर आता है। हर स्थिति, हर वस्तु, एक दूसरे पर निर्भर होती है, अनुपूरक होती है। सकारात्मकता से अभिप्राय है इस वर्तमान क्षण में जीना। और, इन सबसे ऊपर, सकारात्मकता आपका स्वयं का चयन है; मूलतः, पूर्ण रूप से स्वयं द्वारा चुना गया मार्ग। आप सकारात्मक हो सकते हैं; अथवा नकारात्मक हो सकते हैं; मूलरूप से इन दोनों ही भावनाओं की पृष्ठ भूमि में कोई तात्विक सिद्धांत नहीं; ये आशा पर टिकी हैं; प्रायः पूर्वाग्रहित व अनुचित।

इस तथ्य का अधिक मूल्य नहीं कि आप क्या सोचते थे और क्या नहीं; मूल्य इस बात का है कि जीवन में वर्तमान में प्रस्तुत परिस्थितियों का सामना आप किस प्रकार से करते हैं। क्योंकि, अंततः, आपकी संतुष्टि, शांति, हर्ष – ये सब वर्तमान क्षण में जीने से ही आएंगे। अतीत मृत है और भविष्य अज्ञात। कृतज्ञता, प्राप्त वस्तुओं के लिए आभार मानना; आशा – आपको क्या प्राप्त हो सकता है, इसके प्रति आशान्वित रहना; एवं अनुशासन – आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं उसके लिए वर्तमान में कार्यरत रहना; ये सब सकारात्मक जीवन के मूल घटक हैं। यदि आप कृतज्ञ भाव से परिपूर्ण हों, आस्थावान हों व अनुशासनप्रिय हों, तो आप स्वतः सकारात्मक अनुभव करेंगे।

यदि अतीत में आपके सभी डर सत्य सिद्ध हुए हों, अथवा उनमें से अधिकांश सत्य हुए हों, तब आपका भविष्य को लेकर संशयात्मक होने का कारण बनता है। किन्तु यदि ऐसा नहीं है तो स्मरण रखें कि आपका मन आपके साथ छल कर रहा है। सकारात्मक होने का यह अर्थ कदापि नहीं कि आप किसी कोने में छुप कर बैठ जाएँ व आशा करें कि सभी अच्छे काम स्वतः होते चले जाएँगे। इसका तात्पर्य यह है कि आप अपने लक्ष्यों के प्रति प्रयासरत रहें, भले मार्ग में किसी भी प्रकार के विघ्न आयें। आप अवश्य ही जीत प्राप्त करेंगे, अधिक शक्तिशाली अनुभव करेंगे व विजयी होंगे।

ऑस्कर विल्डे ने एक बार कहा था, “हम सभी कूड़ा घर के अंदर हैं लेकिन हम में से कुछ की दृष्टि तारों पर टिकी है।”

आगे बढ़ें! खेलना सीखें व जीत के लिए खेलें, किन्तु विजयी हों तो आनंदित होने के लिए। यह सब सकारात्मक ढंग से कीजिये। अपने स्वप्नों का पीछा करें। आज, आपके पास अवसर है।

शांति।
स्वामी