मेरा सत्य

भीड़ भरे वाराणसी और हिमालय के पर्वतों के पार परमानंद का शांत सागर था। यह है मेरी आध्यात्मिक यात्रा का संक्षिप्त विवरण।

पिछले कुछ समय से मैंने लिखा नहीं। मैं आप सबके साथ कुछ जानकारी बाँटने को तैयार हूँ। यह रहा मेरे विषय में सब कुछ (कैसे, कब, कहाँ, क्या), तीन समयावधि में विभाजित। मैं इसे संक्षिप्त रखने का प्रयास करूँगा। १५ मार्च २०१० की दोपहर को मैंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रस्थान किया। मैं वाराणसी गया। १८ मार्च तक मैंने अपने गुरु को ढूँढ़ लिया था – वाराणसी से ८० किलो मीटर उत्तर दिशा में एक छोटे से गाँव में। उन्होंने मुझे ११ अप्रैल को सन्यास धर्म में दीक्षित किया।…read more