हिमालय सी विशाल अपेक्षाएँ

अपेक्षाएँ क्या हैं, और क्यों प्राय: हर मानवीय दु:ख का वे ही मूल हैं? - एक दृष्टिकोण

आप जानते हैं कि हर कोई एक अदृश्य बोझ लिए हुए है। चूँकि यह अदृश्य है, आप इसके भार से अंजान रहते हैं व इस बात से भी अनभिज्ञ कि यह बोझ बढ़ता ही जा रहा है। जहाँ तक आपकी स्मरण शक्ति जाए वहाँ से अब तक, यह आपकी चेतना पर लदा हुआ है। परिणामस्वरूप, आपने इसे निर्विवादित रूप से स्वीकार कर लिया है, वैसे हो जैसे एक देश में रहने वाला नागरिक वहाँ के कानून मान लेता है। यह एक सुस्पष्ट, मौन एवं सहज स्वीकृति है। यदि अभी भी…read more