भक्ति

भक्ति अथवा दिव्य प्रेममय सेवा, समर्पण एवं वैराग्य की कला है। कर्म-कांड से भक्ति का कतिपय न्यूनतम संबंध है।

गत सप्ताह गतिविधियों भरा था। बहुत से लोगों से मैंने व्यक्तिगत भेंट की, प्रवचन दिए व कीर्तन का आनंद लिया। प्रतिदिन लोग आते रहे, व घंटों तक भजन गाते रहे, जबकि मैं विमुग्ध बैठा भाव विभोर होता रहा। उनके प्रेम व श्रद्धा ने मेरे अंत:करण को गहराई तक स्पर्श किया। जैसे जैसे वे, कभी भर्राये कंठ से, तो कभी अत्यंत मधुर स्वर में, भजन गा रहे थे – संगीत वाद्यों का रस-माधुर्य लिए; वैसे वैसे संपूर्ण वातावरण दिव्य आनंद से हर्ष-विह्वल हुआ जा रहा था। उनका प्रेम, कभी अश्रु धार…read more