ॐ स्वामी

चार ऋतुओं के समान जीवन

जीवन के विभिन्न रंग और चरण उसे सुंदर और रंगीन बनाते हैं।

जीवन चार ऋतुओं के चक्र समान है। हर ऋतु निर्धारित रूप से अपने समय पर आती है और उसकी अवधि समाप्त होते ही स्वयं चली जाती है, जैसे मानव मन में एक विचार का अंत होते ही अगला विचार तुरंत प्रकट हो जाता है। चार ऋतुओं में आप प्रकृति का हर रंग देख सकते हैं – ठंड में सिकुड़ना, शरद ऋतु में झड़ना, गर्मियों में खुलना तथा वसंत में खिलना। ऐसा प्रतीत होता है कि हम जिस ऋतु को नापसंद करते हैं वह बहुत लंबी अवधि के लिए चलती है।…read more

मन, विचार और इच्छाएं

सागर की लहरों के समान, विचार मन में निरंतर आते रहते हैं; एक विचार जैसे ही चला जाए, कोई दूसरा तुरंत मन में आ जाता है।

कुछ पाठकों ने यह प्रश्न पोस्ट किए हैं – प्रश्न – हरि ओम जी, इच्छा के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करने के लिए मैं आप का आभारी हूँ। यह एक भँवर के समान है, हम सब इस में फंसे हुए हैं बिना यह जाने कि यह कितनी गहराई से उत्पन्न होती है। स्वामी जी, क्या आप बौद्धिक इच्छाओं के विषय पर विवरण कर सकते हैं। आप ने कहा है “प्राय: बौद्धिक इच्छाओं की पूर्ती से समाज को कुछ मूल्यवान उपलब्धि होती है। एक धर्मार्थ संगठन स्थापित करना, किसी भौतिक या…read more

कामना तरुवर

कामनाएँ हमें कार्य करने की ओर प्रेरित करती हैं, किंतु उनका उद्गम स्थल जानना आवश्यक है चूँकि इन्ही के परिणामस्वरूप हम आज इस रूप में हैं।

जैसे जल से उसकी आद्रता व सूर्य से उसका ताप पृथक नहीं हो सकते, उसी प्रकार कामनाओं को मन से विमुख नहीं किया जा सकता, चूँकि कामनाएँ उन विचारों का ही प्रतिरूप होती हैं जिन विचारों का हम त्याग नहीं कर पाते। विचार तो विचार हैं। वे अच्छे या बुरे, महान या बेतुके, अथवा सही या ग़लत नहीं होते। यह वर्गीकरण आपने अपने पूर्वाग्रह के आधार पर किया है। तात्विक रूप से सभी विचार एक समान होते हैं – समरूप। महत्त्व इस बात का है कि आप एक विचार के…read more

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