ॐ स्वामी

सफल व्यक्ति व सफल-मूर्ख व्यक्ति

सफलता की परिभाषा क्या है? सफल व्यक्ति किसे कह सकते हैं और सफलता प्राप्ति के लिए कितना मूल्य उचित होगा?

सफलता हर व्यक्ति को प्रिय है। सदियों से यह प्रथा चलती आ रही है कि एक वरिष्ठ पीढ़ी अपनी नयी पीढ़ी को सफलता की स्वयं रचित परिभाषा से अनुबंधित कर देती है। प्रायः मैं देखता हूँ कि व्यक्ति किसी दूसरे द्वारा निर्धारित कसौटी को मानक बना कर अपनी सफलता की ओर बढ़ते हैं। कुछ सफल होते हैं, व कुछ, सफलता से परिपूर्ण। कुछ सफल होते हुए भी उसे पहचान नहीं पाते, अतः कठिन परिश्रम व संघर्ष में ही व्यस्त रहते हैं। ऐसे व्यक्ति सफल नहीं, सफल-मूर्ख होते हैं। कुछ सफलता…read more

चयनित मार्ग

हमें यह कैसे ज्ञात हो कि हम जो करना चाह रहे हैं वह हमारे अंतर्मन का आह्वान है न कि मस्तिष्क में व्याप्त एक शक्तिशाली इच्छा?

एक पाठक ने निम्न प्रश्न भेजा – हम कैसे व कब अपने अंतर्मन के आह्वान को लेकर भ्रमित हो जाते हैं? हम एक वास्तविक आह्वान एवं एक इच्छित जीवनशैली में अंतर कैसे करें? क्या हो यदि वह इच्छित मार्ग अथवा जीवनशैली आपके लिए उपयुक्त न हों? फिर क्यों हमें ऐसी शक्तिशाली अनुभूति होती है कि हमें पग आगे बढ़ाना चाहिए? जब आप यह कहते हैं कि आपका वर्तमान में लिया गया निर्णय आपके भविष्य का प्रतिबिंब है – तो हम स्वयं को इससे जोड़ कर कैसे देखें? कृपया समझाएँ। जब…read more

जीवन अंबर एक समान

जैसे गगन हर समय नीला नहीं दिखता, जीवन में भी सदा एक ही रंग नहीं रह सकता। आसमान के बदलते रंगों की भाँति, जीवन के रंग भी अस्थाई हैं।

जीवन आकाश के अनुरूप है, कभी बादलों से ढका, कभी घनघोर घटा वाले बादलों से ढका। एक दिन में, विभिन्न समयावधिनुसार, वही आकाश सर्वथा भिन्न दृश्य-रूप प्रस्तुत करता है। रात्रि के पहर में, तारों की चादर ओढ़े, यह घटते अथवा बढ़ते चंद्रमा के साथ होता है। दिन में यह पूर्णतः प्रकाश से परिपूर्ण होता है। शहरों की कृत्रिम रोशनी, तारों जड़ित सुंदर आकाश के दृश्य को धुंधला कर देती है। वही आकाश जब बादलों से घिर जाता है, तो चाहे दमकता सूर्य हो अथवा शीतल चाँद, वह दोनों को छुपा…read more

मुझे तो जीना है!

क्या आध्यात्मिक होना आवश्यक है? अथवा, क्या आध्यात्मिकता का अर्थ यह है कि आप जीना छोड़ दें व इस संसार का सुख-भोग त्याग दें?

एक पाठक ने एक टिप्पणी, दो भागों में बाँट कर, निम्न रूप में की – यह एक सुंदर लेख है। मैं मात्र २३ वर्ष का हूँ और मैने अभी जिंदगी को पूर्ण रूप से नहीं भोगा। जैसा कि किसी ने कहा है – जीवन एक कार्डियोग्राम के समान है। यदि आपके जीवन में केवल शांति व स्थिरता है तो जीवन एक सीधी रेखा के अनुरूप है। यह दर्शाता है कि विज्ञान के दृष्टिकोण से आप मृत हैं। यदि उतार-चढ़ाव दिख रहा है तब मानो की आप जीवित हैं। तब क्यों…read more

सप्रेम जीना

प्रेम हर जीव में स्वाभाविक विद्यमान है। यह आपकी सत्ता का मूल कारण है व आपके अस्तित्व का आधार। जिसे आप प्रेम करते हैं, उसी का रूप हो जाते हैं।

यदि मुझे शब्दकोष में से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण शब्द का चुनाव करना हो तो, बिना एक पल भी सोचे, मैं प्रेम शब्द चुनूँगा। सब भावनाओं में से उच्चतम व परम उत्कृष्ट भावना प्रेम है। इसकी गहराई व गूढता को देखते हुए, प्रेम को मात्र एक भावना की श्रेणी में रखना न्यायोचित नहीं होगा; यह हमारी सत्ता का होना है, अस्तित्व की गुह्य अवस्था। जितना अधिक गहराई से आप प्रेम में स्थित होते हैं, उतनी उच्च आनंद की स्थिति होती है। ऐसा आनंद जो सबमें अंतर्निहित है, वह अन्तःकरण से प्रकट होना…read more

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