ॐ स्वामी

वार्तालाप से एकाग्रता की ओर

कुशल ध्यान और प्रबल स्मृति के लिए एक ध्यानी को धनुर्धर के समान एकाग्रता को विकसित करना चाहिए।

एक अच्छे ध्यान मे स्तिथ होने के लिये महान एकाग्रता की आवश्यकता है, और एक महान ध्यानी बनने के लिये सर्वोच्च एकाग्रता की आवश्यकता है। एकाग्रता, विशेष रूप से एक स्थिर एकाग्रता, अभ्यास के साथ आती है। आप जितना अधिक अभ्यास करेंगे, आपकी एकाग्रता उतनी अधिक निखरेगी। श्री कृष्ण के समय मे अर्जुन एक महान धनुर्धर व योद्धा हुए। उनके छोटे भाई, भीम को अत्याधिक खाने का शौक था। एक बार अमावस्या की अन्धेरी रात में, घोर अन्धकार में भीम को भूख लगी। वह रसोई में घुस कर भोजन और…read more

माँ – आदि परा शक्ति

प्रस्तुत है देवी माँ पर एक सुंदर वीडियो जो पंडित जसराज के अद्भुत गीत पर आधारित है।

प्रस्तुत है आपके लिये माँ आदि परा शक्ति, जगन्माता का एक बहुत सुन्दर फिल्मांकन। पण्डित जसराज, एक विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक, ने निरन्जनि नारायणि के नाम से मां की इस स्तुति को गाया है। इसमे शब्द कदाचित कम है परन्तु यह भाव मे परिपूर्ण है। इस फिल्मांकन मे हमने जगदम्बा के अत्यन्त सुन्दर चित्र लगाये है। यह स्तुति आप के भीतर माँ के प्रति प्रेम और भाव को और प्रबल करेगी। यह अब तक का मेरा सबसे पंसदीदा फिल्मांकन है। इसमे माँ की स्तुति, गाने का ढंग तथा माँ के…read more

आदान या प्रदान

आप जब देने के लिए सज्ज हो जाते हैं आप विशिष्ठ बन जाते हैं। प्रकृति के खेल में चमकने लगते हैं। आप एक योग्य प्रापक बन जाते हैं।

यदि आपको कोई मिल जाये जो बोले कि वो आपको कुछ भी दे सकता है तो आप उस से क्या क्या लेना चाहेंगे? अवश्य ही आपका मन कल्पनाओ से भर जायेगा और आप इस अवसर का मुल्यांकन करना शुरु कर देगे। वो मुझे कितना दे सकता है? क्या वो सारा दे सकता है? वो मुझे ही क्यूँ दे रहा है? मुझे इसे प्राप्त करने के लिये क्या करना होगा? मुझे इसे किस के साथ बांटना होगा? इस प्रकार एक से एक बढ कर एक प्रशन पैदा होते जायेंगे। मन बहुत…read more

जीवन की यात्रा का बोझ कम करें

आप जीवन को कैसे देखते हैं यह आप के दृष्टिकोण पर निर्भर है। आप जब बोझ कम करते हैं तो फूलों की तरह सुगंधित और प्रकाशित बन जाते हैं।

एक समय की बात है, एक गांव मे एक धार्मिक व्यक्ति रहता था। कई लोग उसे सिद्ध संत मानते थे और कई उसको असामान्य तथा पागल समझते थे। बच्चे उसे “खिलौना बाबा” कहते थे क्योंकि वह उनको खिलौने और मिठाईयां देता था। एक उत्तम भिक्षुक की भान्ति वह उतना ही दान लेता था, जितना उसे एक दिन के लिये चाहिये होता था। वह कर्तज्ञता से सब स्वीकार कर लेता था – चाहे वह वस्तु चावल हो, रोटी या सब्जी। उसने ना तो कभी धन मांगा तथा ना ही कभी स्वीकार…read more

संकल्प – दृढ़ता का अभ्यास

बहुधा संकल्प की तुलना पूर्णत: स्थिर व सुदृढ़ हिमालय के साथ की जाती है। एक सच्चे साधक का संकल्प हिमालय के समान होता है।

इस तथ्य से अभिन्न कि आप किस मार्ग के अनुयायी हैं, आपकी सफलता का निर्णय इससे होता है कि आपका पथ पर बने रहने का संकल्प कितना सुदृढ़ है; आप अपनी योग्यता बढ़ाने, कुछ नया अपनाने व समझने के लिए कितने आतुर व उत्साही हैं, व आपकी जिज्ञासा कितनी प्रबल है। संस्कृत भाषा में, निश्चय, वायदा, शपथ आदि के लिए शब्द है – ‘संकल्प’। जब आप एक निर्णय लेते हैं, एक सुदृढ़ विचार बना लेते हैं, इसका अर्थ है कि आपने संकल्प कर लिया है। इस श्रंखला के पिछले लेख…read more

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