ॐ स्वामी

एकाग्रतापूर्ण ध्यान का अभ्यास

एकाग्रतापूर्ण ध्यान एक विचार पर केन्द्रित रहने की कला है। यह मन को प्रायः उसी क्षण शांत कर देता है।

गत लेख में मैंने दो प्रकार के ध्यान पर चर्चा की थी। आज मैं “एकाग्रतापूर्ण ध्यान” पर विस्तृत चर्चा करूंगा। एकाग्रतापूर्ण ध्यान एक विचार पर केन्द्रित रहने की कला है। यह चिंतनशील ध्यान से मूलतः इस बिन्दु पर भिन्न है कि इस ध्यान के दौरान किसी प्रकार का बौद्धिक परीक्षण नहीं किया जाता। यह मुख्यतः आपको अपना मन स्थिर करने व शारीरिक स्थिरता पाने में सहायतार्थ रचा गया है। एक तरह से एकाग्रतापूर्ण ध्यान, सम्पूर्ण ध्यान की ओर बढ़ने का प्रथम स्तरीय अभ्यास है। जैसे जैसे आप इस अभ्यास में…read more

दान – परोपकारी कार्य

प्रकृति सदैव देती रहती है। प्रकृति के इस परोपकारी स्वभाव के कारण ही हर सत्व का ध्यान रखा गया है।

यहाँ दान पर हिन्दी में एक  वीडियो प्रवचन है। प्रस्तुत है इसका एक संक्षिप्त अनुवाद: श्री कृष्ण ने अर्जुन को तीन प्रकार के दान बताये है। प्रथम सात्विक दान जो दयालुता के भाव से किया जाता है, दूसरा राजसी दान जो भावुकता के भाव से किया जाता है और तीसरा तामसी दान जो अज्ञानता के भाव से किया जाता है। सात्विक दान से मनुष्य मुक्ति की ओर बढ़ता है, राजसी दान से वह बंधन में पड़ता है तथा तामसी दान से वह नीचे की ओर बढ़ता है और मोक्ष का अनुभव…read more

दो प्रकार के ध्यान

वह, जो एक वास्तविकता का बोध कर लेता है, वह हर वास्तविकता को जानता है – वह पूजनीय है।

ध्यान मुख्यतः दो प्रकार का होता है। एक होता है एकाग्रतापूर्ण ध्यान, जिसे अचल एकाग्रता भी कहा जाता है; व दूसरा होता है चिंतनशील ध्यान जिसे विश्लेषणात्मक अनुसंधान भी कहा जाता है। एक उत्तम साधक दोनों प्रकार के ध्यान में निपुण होता है। एक साधक के ध्यान की उत्तमता का पैमाना है कि वह केवल एक ही विचार पर पूर्ण रूप से उतने लंबे समय तक स्थिर रह पाये जितने समय तक उसकी इच्छा हो। एक अति आवश्यक सूत्र जो सदा स्मरण रखने योग्य है, वह यह है कि ध्यान…read more

दो विभिन्न प्रकार की नीतियाँ

दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने लिए चाहते हैं। यह महत्त्वपूर्ण है कि दूसरों के लिए भी वही नियम हों जो आपके अपने लिए हैं।

मुल्ला नसरूद्दीन अपने पड़ोसी के द्वार पर दस्तक देता है। वह द्वार खोलता है, नसरूद्दीन का अभिवादन कर उसे बैठने को कहता है। मुल्ला कहता है, “मुझे आपको कुछ बताना है। आप को सुन कर अच्छा नहीं लगेगा किन्तु सत्य को स्वीकार करना ही पड़ता है।” पड़ोसी चिंतित स्वर में पूछता है, “क्या बात है?” “तुम्हारे बैल ने मेरी गाय पर प्रहार कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया है। यदि उसका अभी, इसी क्षण, उपचार न हुआ तो वह मर भी सकती है।” नसरुद्दीन कहता है। “मुझे लगता है…read more

नकारात्मक विचारों व भावनाओं से ऊपर उठना

जैसे एक कमल सदा कीचड़ व जल से ऊपर रहता है, आप नकारात्मक विचारों व भावनाओं से ऊपर रह सकते हैं।

बहुत से लोगों द्वारा बहुधा एक बात मुझसे पूछी जाती है कि – वर्तमान क्षण में कैसे रहा जाये? जिज्ञासु मुझे बताते हैं कि वे अपना ध्यान नकारात्मक विचारों व भावनाओं से परे हटाना चाहते हैं, किन्तु वे सदा ऐसा कर नहीं पाते। और तो और, बहुधा ऐसी नकारात्मकता अथवा भटकन उन पर हावी होकर उनके शांत अन्तःकरण में उथल पुथल मचा देती है। गत लेख में मैंने यह बात की थी कि किस प्रकार अपने को नापसंद वस्तु का चिंतन आपके जीवन में उस नापसंद वस्तु को आकर्षित कर…read more

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