ॐ स्वामी

सहिष्णुता का अभ्यास

जब आप एक वृक्ष पर पत्थर फेंकते हैं, वह ना केवल पत्थर को अस्वीकार कर देता है, बदले में वह आप को एक फल भी देता है। भावनाओं के ऐसे पत्थर मन में ना रखें।

पिछली पोस्ट में मैं ने संक्षेप में सहिष्णुता की कला के विषय में लिखा था। आज मैं सहिष्णुता के वास्तविक अभ्यास पर विस्तार रूप से लिख रहा हूँ। इन विधियों को अपना कर आप स्वयं को भावनात्मक रूप से परिवर्तित कर सकते हैं। जो व्यक्ति भावनात्मक बोझ तले दबा नहीं हो वह सरलता से आनंद एवं शांति की अवस्था में रह पाता है। पहले मैं मूल सिद्धांत को दोहराना चाहूँगा। संसार में केवल दो प्रकार की भावनाएं हैं – सकारात्मक एवं नकारात्मक। सकारात्मक भावनाओं से आप प्रबल एवं प्रसन्न महसूस…read more

हिमालय की एक स्मृति

उस हिरणी के करुणामयी नेत्रों में व्याप्त स्थिरता किसी योगिन की परिशुद्ध दृष्टि को भी मात दे रही थी।

यह बीते वर्ष, अप्रैल मास के आसपास का समय था, कदाचित अप्रैल का आरंभ ! चारों ओर पर्वत शिखर अभी भी हिमाच्छादित थे। जहां मैं था, वहाँ का तापमान, लगभग सम्पूर्ण दिवस, अधिकांश रूप से शून्य से भी नीचे ही रहता था। किन्तु, केवल कुछ स्थानों को छोड़ कर जहां की बर्फ कठोर हो चुकी थी, लगभग पूरी बर्फ पिघल चुकी थी। वह कठोर बर्फ न तो हिम समान थी, न ही बर्फ जैसी; इन दोनों के मध्य का कोई रूप था। शीत ऋतु में लगभग सभी वन्य जीव निचले,…read more

सहिष्णुता की कला

हमारे ग्रह पृथ्वी को देखें जो हम सब को इतना कुछ देती है। यह अति सहनशील और दयालु है।

महाराष्ट्र के महान साधु संत एकनाथ केवल एक संत ही नहीं थे, पूर्णता के अवतार थे। वे जो कहते वही करते। वास्तव में यही गुण – जिन बातों का प्रचार करना उन पर अमल करना – एक सच्चे संत की पहचान है और उन्हें साधारण उपदेशकों से भिन्न करता है। एकनाथ अपने सदाचारी आचरण, गुरु के प्रति समर्पण और विशेष रूप से अपनी सहिष्णुता के लिए प्रसिद्ध थे। किसी ने भी उन्हें कभी क्रोध करते हुए नहीं देखा। स्थिति जितनी भी प्रतिकूल क्यों ना हो उनका आत्म-संयम सदैव अखंड रहता।…read more

सम्बन्धों में सामंजस्य की पुनर्स्थापना

सकारात्मक व नकारात्मक – दोनों प्रकार की भावनाएं कुकुरमुत्ते के समान होती हैं, वे अतिशय तीव्र गति से बढ़ती हैं।

एक प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में, गणित के अध्यापक ने एक ऐसे विद्यार्थी को संबोधित किया जो आम का फल बहुत पसंद करता था। उस ने उस छोटे बालक को देखा और कहा, “यदि मैं तुम्हें एक सेब दूँ, फिर एक और सेब दूँ, और, पुन: एक और सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कुल कितने सेब हो जाएँगे?” उस बालक ने अपनी उँगलियों पर गणना आरंभ की, कुछ क्षण खुले आकाश की ओर निहारा, फिर अपने लंबे से अध्यापक को देखते हुए सोच समझ कर बोला, “चार”। अध्यापक विस्मित रह…read more

कृतज्ञता की प्रणाली

दूसरों के प्रति आभारी होना भगवान के प्रति आभारी होने के समान होता है। शांति का अनुभव करने के लिए आप के आसपास रहने वाले व्यक्तियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।

पिछले एक लेख में, मैं ने इस पर विवरण किया था कि कृतज्ञता कैसे आप को और दृढ़ बनाती है। आज मैं आप के समक्ष प्रस्तुत करता हूँ कृतज्ञता की प्रणाली, दो प्रकार की कृतज्ञता, तथा आप और अधिक कृतज्ञ बनने हेतु क्या कर सकते हैं। मैं यह दोहराना चाहूंगा कि कृतज्ञता सबसे गहरी भावनाओं में से एक है। यदि आप कृतज्ञ हों, तो आप स्वत: ही करुणामय, आनंदमय एवं शांत हो जाते हैं। वैसे देखा जाए तो कृतज्ञता का केवल यह अर्थ नहीं कि आप आभारी हैं। इस का…read more

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