ॐ स्वामी

नकारात्मकता से उपर उठें

नकारात्मकता के तालाब या असहमति के दलदल में भी आप एक कमल के समान उभर कर चमक सकते हैं।

जीवन में कभी कभी ऐसा दौर आता है जब आप निराश होते हैं और आप को अनेक संघर्षों एवं तनावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लगता है कि आपने जीवन में व्यक्तिगत या व्यावसायिक रूप में जो भी उपलब्धि हासिल की है मानो वह सभी भाग्य की देन थी, और जीवन में सुख शांति कभी लौट के आयेगी ही नहीं। आप यह जान नहीं पाते हैं कि जीवन के इस प्रकाशहीन सुरंग में दिखने वाली रोशनी वास्तव में आशा की किरण है कि आपकी ओर तीव्र गती से…read more

लक्ष्य को स्थापित एवं प्राप्त करना

यदि आप ध्यान, धैर्य, दृढ़ता एवं कौशल के साथ लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, तो लक्ष्य चाहे कितना भी कठिन क्यों ना हो, आप उसे प्राप्त कर सकते हैं।

एक पाठक ने मुझसे लक्ष्यों को स्थापित करने के विषय पर लिखने का अनुरोध किया। तो आज मैं इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करता हूँ। एक छोटे से प्रसंग से प्रारंभ करता हूँ – सर्दी के एक सुंदर दिन, नरम सूर्य के नीचे मुल्ला नसरूद्दीन और उसका सबसे अच्छा मित्र एक शानदार बगीचे में हरी घास के भव्य बिस्तर पर लेटे हुए थे। वे धूप सेंक रहे थे। घने मनोहर पेड़ बगीचे की सीमा पर संगठित थे और उनकी टहनीयों ने रास्ते को ढक दिया था। विभिन्न प्रकार के…read more

भावनात्मक उपचार – मानसिक छाप मिटाना

अपने जीवन की कैनवस को अपनी पसंद के रंगों से भरें। दर्द को मिटायें व स्वयं को स्वस्थ होने दें।

अपने वचनानुसार मैं आपके समक्ष मानसिक छापों को मिटाने का अभ्यास वर्णित कर रहा हूँ। भावनाएं प्रतिबिंबों एवं शब्दों के रूप में संग्रहीत होती हैं। शारीरिक परिताड़ना के कष्ट से गुजरने वाले व्यक्तियों के शारीरिक घाव भले ही समय के साथ भर जाएँ, किन्तु, यह मन द्वारा हर घटना व हर विचार को प्रतिबिंब व शब्द रूप में संग्रहीत करके रखने और उसे पुनः स्मरण कर पाने की रहस्यमयी क्षमता ही है जो महानतम दुःख व संताप का हेतु है। अपने शांत क्षणों में जब आप कष्टमयी घटनाओं का स्मरण…read more

भावनात्मक उपचार – पीड़ा से ऊपर उठना

आप जो भी क्रिया-कलाप करते हैं अथवा अनुभव करते हैं, वह सब अपनी एक मानसिक छाप छोड़ जाता है। उन मानसिक छापों को मिटाना ही भावनात्मक उपचार है।

जीवन अविरल बहती समयधारा का वह समुच्चय है जिसमें चरणबद्ध रूप से घटनाएँ प्रकट होती हैं; यह अनुभवों का एक गुलदस्ता है; मन की विभिन्न प्रवृतियों की एक अविराम दौड़; पुरानी चित्तवृत्तियाँ, मानसिक छापों का अपरिष्कृत संग्रह – जो सब आपके संग जन्मों जन्मों से यात्रा करते हुए, साथ साथ बंधा चला आ रहा है; जो आपको आपका वर्तमान स्वरूप प्रदान किए हुए है। प्रायः लोग कुछ नया करने; एक नवीन अभ्यास बनाने, किसी विचार को कार्यरूप देने, ध्यान में बैठने, व्यायाम करने आदि का प्रण ईमानदारी पूर्वक लेते तो…read more

कैसे आलोचना का सामना करें

अन्य लोग जो आप में देखते हैं, वह उनके निज का ही प्रतिविम्ब होता है। जो स्वभाव या लक्षण आप में नहीं है, वह आप दूसरों में नहीं देख सकते हैं।

आलोचना अपरिहार्य है। आलोचना सदैव दूसरे व्यक्ति की राय होती है। यदि आप उनकी धारणासे सहमत हैं, तो  उनकी आलोचना आपको स्वयं में सुधार लाने के लिए प्रेरित कर सकती है। परंतु यदि आप सहमत नहीं हैं, तो संभवतः आप नकारात्मकता को अंगीकार कर  रहे हैं। नकारात्मक भावनाएं आप को दुर्बल बनाती हैं । कभी कभी आलोचना का सामना करना कठिन हो सकता है, विशेषकर जब आलोचना अपने प्रिय लोगों से आती है। जब दूसरे आप पर अपनी नकारात्मकता और राय थोपते हैं, उस क्षण ये निर्णय आप पर है…read more

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