ॐ स्वामी

टूटा हुआ घड़ा

जब आप स्वयं को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं, तो आप की निर्बलता आप की शक्ति बन जाती है। यह रोचक कहानी पढ़ें।

किसी ने मुझसे पूछा कि क्या आत्म परिवर्तन एक अंतहीन प्रक्रिया एवं खोज है। उन्होंने लिखा, “क्या हम सदैव प्रयत्न करते रहें?”। उनका संकेत इस ओर था कि यदि हम सदैव स्वयं को सुधारने हेतु स्वयं में दोष ढूंढते रहें तब हम वास्तव में जीवन का आनंद कब लेंगे? क्या इस जीवन को एक कष्ट और मुसीबत के समान होना चाहिए? क्या हमे सदैव स्वयं को सुधारने का प्रयास करते रहना चाहिए? यदि इस पर चिंतन करें तो यह वास्तव में उत्तम प्रश्न है। मेरा यह मानना है कि किसी…read more

क्या आपने नकारात्मक भावनाओं को अपने भीतर दबा रखा है?

यदि आप अपनी भावनाओं को अपने अंदर दबा कर रखेंगे तो आप शीघ्र व्याकुल और कड़वा होते जाएँगे। अपने आप को खाली करना सीखें।

कभी कभी क्रोध में चिल्लाने से मन को राहत मिल सकती है, हमारे भीतर जो कुंठाएं घर कर लेती हैं उन्हें निकालने की यह सहज विधि है। परन्तु जब हम क्रोधित होकर चिल्लाते हैं इससे दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तथा रिश्तों में दरारें आ जाती हैं। इसीलिए यह एक व्यवहारिक विकल्प नहीं है। इसके अतिरिक्त क्योंकि यह क्रोध की भावना से जुड़ा हुआ है, इसीलिए यह हमें निर्बल एवं लज्जित कर देता है। कल्पना कीजिए कि यदि आप बिना क्रोधित हुए चिल्ला सकते। यह संभवत: आपको अभी…read more

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