परिवर्तन को स्वीकार करें

जब आप किसी असत्य को जान कर भी उससे जुड़े रहते हैं, तो शीघ्र ही दबाव की नरम धारा अशांति के ज्वार में परिवर्तित हो जाती है।

परिवर्तन नित्य है – यह आप ने बहुधा सुना होगा। परिवर्तन की नित्यता ना केवल बाहर की भौतिक संसार का सत्य है यह आप के भीतर की दुनिया का भी सत्य है। जैसे जैसे आप के विचारों में परिवर्तन आता है, आप का दृष्टिकोण भी परिवर्तित होता है और इस नए दृष्टिकोण के साथ आप को एक नया ज्ञान प्राप्त होता है। इस से स्वत: ही आप की भावनात्मक स्थिति एवं विचारधारा में परिवर्तन आता है तथा आप प्रगति की ओर बढ़ते हैं। परंतु अधिकतर व्यक्ति स्वयं को विकसित नहीं…read more