ॐ स्वामी

मनोयोग की नौ अवस्थाएँ

तन्मयता की गहन अवस्था तक पहुँचने के लिए एकाग्रता को दृढ़ करना अति आवश्यक है। यह क्रमिक एवं परिमेय है।

गत सप्ताह के लेख के उपरांत मेरा मेल बॉक्स मानो ई-मेल से डूब ही गया। अधिकांश पाठकों के समक्ष एक ही प्रकार के व्यवधान थे। विषेशरूप से यह कि ध्यान करते हुए उनका मन भटक जाता है व उन्हें पुनः उसे अपने ध्यान की वस्तु पर स्थापित करने में अतिशय संघर्ष करना पड़ता है। दूसरा सर्वाधिक किया गया प्रश्न यह कि उन्हें किस वस्तु पर ध्यान लगाना चाहिए? अपने विगत लेख में मैंने कुछ भी न करने एवं वर्तमान क्षण में बने रहने के संबंध में लिखा था। “वर्तमान क्षण…read more

ध्यान के छ: मूल-सिद्धान्त

तिलोपा ने अपने प्रमुख शिष्य को ध्यान पर छ: लघु एवं गुह्य निर्देश दिये। प्रत्येक ध्यान योगी को इनका ज्ञान होना चाहिए।

एक बार एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, “हम अपना ध्यान-सत्र समाप्त करने के उपरांत प्रार्थना क्यों करते हैं?” “ऐसा हम ईश्वर का धन्यवाद करने हेतु करते हैं की चलो यह समाप्त हुआ”, गुरु ने परिहास किया। यद्यपि ऐसा परिहास में कहा गया है, किन्तु, कभी कभी ध्यान ऐसे भाव ही देता है। सच्चे एवं अनुशासनशील जिज्ञासुओं के लिए ध्यान-मार्ग एक दुष्कर यात्रा है। आप भावनाओं के मस्से हटा रहे होते हैं, विचारों के घट्टों से छुटकारा पा रहे होते हैं, इच्छाओं की परतें उतार रहे होते हैं, आप…read more

कैसे क्षमा माँगी जाए

क्षमा याचना सच्ची तभी होती है जब आप अपने अपराध को दोहराते नहीं हैं और कोई बहाना नहीं देते हैं।

पंद्रह वर्ष पहले, मैं ऑस्ट्रेलिया में एक बहु अरब डॉलर मीडिया कंपनी के एक बड़े प्रौद्योगिकी समूह का प्रमुख था। मैं ने एक प्रमुख पोर्टफोलियो संभालना प्रारंभ ही किया था कि नए सॉफ़्टवेयर में एक समस्या हमारे उपयोगकर्ताओं और हमारे राजस्व को प्रभावित करने लगी। तकनीकी प्रमुख के रूप में, इस समस्या को सुलझाना मेरा उत्तरदायित्व था। हमने विभिन्न फ़र्मों से कईं तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया परंतु कोई भी समस्या का कारण बता ना पाया। कईं सप्ताह बीत गए किंतु हम फिर भी कुछ प्रगति ना कर पाए। एक बार…read more