२०१४ पर एक नज़र

हर क्षण आकर चला जाता है, हर ऋतु बीत जाती है और अगली ऋतु को मार्ग मिलता है। यही काल का सत्य है।

एक और वर्ष व्यतीत हो गया, ५२ सप्ताह या फिर ३६५ दिन, ८७६० घंटे या ५२५६०० मिनट। जैसे भी गणना करो, बहुत समय व्यतीत हो गया। समय, जो लौट कर नहीं आयेगा। एक दिन मुझे कुछ लोगों ने नए वर्ष के लिए वीड़ियो सन्देश देने को कहा। कुछ क्षण सोच कर मैंने अवसर को जाने दिया क्योंकि मैं आश्वस्त नहीं था कि मेरे पास कुछ नया था कहने को। मैं आपसे क्या कहूँ? कि हमें अपने क्रोध या नकारात्मकता का त्याग करना चाहिए, या अपने प्रयासों में निरंतरता लाएं, स्वयं…read more