ॐ स्वामी

आस्था पर दो शब्द

आस्था आपके अंधकारपूर्ण एकाकी पलों में उजाले की किरण है; यह आपकी शांति व शक्ति का संबल है।

“मैंने भगवान को एक मोटरसाईकल देने को कहा, किंतु मैं जानता हूँ कि भगवान अपना कार्य इस प्रकार से नहीं करते। अतः, मैंने एक मोटरसाईकल चुरा ली और इसके स्थान पर क्षमा मांग ली।” लेखन हेतु मैं एक अति उत्कृष्ट सॉफ्टवेर उपयोग में लाता हूँ जो पूर्णत: विक्षेप रहित है। उसका नाम है ‘राइट मंकी’। जब भी मैं उसे आरंभ करता हूँ तो मेरी स्क्रीन पर एक उद्धरण आता है (अधिकांशतः व्यंगात्मक)। आज जब मैं आस्था पर कुछ लिखने का विचार कर रहा था तो उपरोक्त पंक्ति मेरी स्क्रीन पर…read more

मूक दृष्टा

जब आप स्वयं का व स्वयं के विचारों का ध्यानपूर्वक अवलोकन करने में प्रशिक्षित हो जाते हैं, तो आप एक अगरबत्ती की भांति हो जाते हैं। जितना अधिक जीवन आपको ज्वलित करता हैं, आप उतनी अधिक सुगंधी फैलाते हैं।

कई पूर्वीय परम्पराओं के अंतर्गत जब शिष्य गुरुकुल में अपना प्रशिक्षण सम्पूर्ण करते हैं तो अपने कृतज्ञ भाव दर्शाने हेतु वे गुरु के समक्ष गुरुदक्षिणा प्रस्तुत करते हैं। कुछ प्रकरणों में गुरु स्वयं अपनी आवश्यकता का उल्लेख करते हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत, एक बार शिष्यों का एक समूह अपने गुरु के समक्ष उपस्थित होता है। शिष्य उनसे निवेदन करते हैं कि गुरुदक्षिणा स्वरूप यदि उन्हें किसी विशेष वस्तु की चाह हो तो कहें। “सत्य कहूँ तो मुझे कुछ विशेष ही चाहिए,” गुरु ने कहा। “आपके लिए कुछ भी गुरुवर,”…read more