ॐ स्वामी

एक मोची, कुक्कुर, और ईश्वर

प्रस्तुत है एक सुंदर कहानी, आध्यात्म का उद्देश्य बताने हेतु एक स्नेह भरा अनुस्मारक – हर प्राणी में परमात्मा को देखना।

एक दिन एक सज्जन, जो आरंभिक दिनों से ही मेरे ब्लॉग व प्रवचन पढ़-सुन रहे हैं, मेरे पास आए। उन्होंने हृदय को द्रवित कर देने वाली एक घटना सुनाई। उन्हीं के शब्दों में वह यहाँ प्रस्तुत है – “स्वामी”, वे बोले, “प्रातःकाल स्नान के उपरांत मेरा सर्वप्रथम कार्य होता है घर के पूजास्थल पर दीया जलाना व प्रार्थना करना। अगरबत्ती व दीये के संग मैं ताजे पुष्प भी अर्पण करता हूँ। मेरे यहाँ एक छोटा सा बगीचा है जो बाड़ द्वारा सुरक्षित है व जहां मैं बहुत सावधानी व प्रेम…read more

अफवाहों पर दो शब्द

झूठी अफवाहें तेज उड़ते बादलों की भांति होती हैं। आप प्रतिक्रिया न दें और वे स्वयं ही छितर जाएंगे।

आश्रम में मेरा समय अधिकांशतः अति व्यस्त रहता है। किसी भी निर्धारित दिन, मैं बहुत से लोगों से एक-एक कर के भेंट करता हूँ। उस दिन भी अन्य दिनों की ही भांति, सुबह से दोपहर के बीच चालीस से अधिक मुलाकातों का क्रम था। मेरे पास समय का अत्याधिक अभाव था, अतः हम प्रत्येक व्यक्ति को केवल पाँच मिनट का समय दे पा रहे थे। ऐसी ही एक भेंट में, एक सज्जन मेरे सम्मुख आए और बोले, “स्वामी, वे लोग आपके विषय में झूठी अफवाहें फैला रहे हैं।” “ठीक है,…read more

महानतम कौशल

आपका मुदिता का मार्ग जीवन के विभिन्न रंगों द्वारा प्रभावित हो सकता है, किन्तु, अंततः, वह स्वयं आपके द्वारा ही निर्मित होता है।

क्या आप जानते हैं कि निपुणता पाने योग्य सर्वोच्च कौशल कौन सा है? एक ऐसा कौशल जिसका लेशमात्र नकारात्मक पहलू नहीं है। कुछ ऐसा जो आपको एक श्रेष्ठतर व्यक्ति बनाता है और इस संसार को एक श्रेष्ठतर स्थान। यह सुनिश्चित है कि यह अधिक से अधिक ज्ञान अथवा धन एकत्र करने की योग्यता तो कदापि नहीं। यह सदाचारी व्यवहार या सम्बन्धों को अति उत्तम रूप से निभाने की निपुणता भी नहीं। यह दूसरों को प्रसन्न रखने की कला भी नहीं। और तो और, यह स्वयं द्वारा अपनी वास्तविक खोज भी…read more

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