ॐ स्वामी

समर्पण पर कुछ शब्द

आत्मसमर्पण यह ज्ञान है कि वृक्ष सदैव हरे नहीं रह सकते। आत्मसमर्पण पतझड़ के रंगों में सुंदरता देखने के समान है।

जीवन विचित्र है। जितना अधिक हम सोचते हैं कि हमने इसे समझ लिया है, यह उतना ही रहस्यमय हो जाता है। एक कुशल जादूगर के समान, यह हमें अपनी अकल्पनीय योजनाओं को सफल रूप देने की क्षमता पर अचंभित कर देता है। परंतु जीवन की सभी आश्चर्यजनक वस्तुएं प्रिय नहीं होतीं। कुछ तो नितांत क्रूर हो सकती हैं। जब जीवन अप्रत्याशित प्रहार करता है तब आपकी आंतरिक शक्ति की परीक्षा होती है। उस समय प्रकृति के दिव्य न्यायालय में श्रद्धा व आत्मसमर्पण की पुकार होती है यह देखने के लिये…read more

प्रेम और घृणा

प्रेम दैवी है। प्रत्येक मनुष्य में यह अंतर्निहित है, जबकि दूसरी ओर, घृणा हम सीखते हैं।

मुझे हर प्रकार के ई-मेल मिलते हैं। ये स्वयं सेवकों की एक टीम के द्वारा चिह्नित और दर्ज किये जाते हैं। लगभग पचास प्रतिशत पाठक मुझसे, उनके जीवन के क्लेश, कष्टों पर सलाह मांगते हैं। तीस प्रतिशत मुझसे अपनी कृतज्ञता एवं प्रेम व्यक्त करते हैं। कुछ दस प्रतिशत अपने दार्शनिक विचार व्यक्त करते हैं। एक प्रतिशत (या कुछ कम) ई-मेल में मुझसे पूछा जाता है कि वे मेरी या मेरे उद्देश्य की किस प्रकार मदद कर सकते हैं। शेष नौ प्रतिशत मात्र अपनी घृणा व्यक्त करने के लिये ई-मेल लिखते…read more

सचेत कोलाहल

यदि आप जीवन की सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं तब अनावश्यक बातों का त्याग करना सीखें।

यह एक प्रसिद्ध कहावत है कि हम जन्म के समय अपने साथ इस संसार में कुछ नहीं लाते और मृत्यु के समय हम अपने साथ कुछ नहीं ले जाते हैं। कदाचित हो सकता है। यदि यह पूर्णतः सत्य होता तब यह अच्छा होता। सत्य तो यह है कि ऐसा बहुत कुछ है जिसे हम जन्म के समय अपने साथ लेकर आते हैं और हम अपने साथ बहुत कुछ ले कर जाते हैं। निश्चित रूप से हमारे कर्म हमारे साथ जाते हैं। आप चाहे पुनर्जन्म में विश्वास रखते हों या स्वर्ग…read more

सफल व्यक्तियों की प्रथम विशेषता

सम्पूर्ण जीवन विकल्प व चयन पर आधारित है। कभी न कभी आप को यह निर्धारित करना ही होगा कि आप को किस पथ पर चलना है।

मैं नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों से मिलता रहता हूँ। उनमें वे भी होते हैं जो अधिकृत विमान का उपयोग करते हैं या फिर मोटरों के काफिले में चलते हैं और वे भी जो कभी भी हवाई जहाज पर नहीं बैठे या वे भी जो बस किराये के दो रुपये चुकाने में भी समर्थ नहीं हैं। मूलतः उनमें से कुछ रात्रि को ठीक से सो नहीं पाते क्योंकि उनके पास बहुत अधिक है या फिर कुछ दूसरे भी हैं जिनके पास बहुत कम है। इससे मुझे यह समझ…read more

1