ॐ स्वामी

जीवन-सरिता

जब आप जीवन के प्रवाह के साथ बहना सीख जाते हैं, तब वह एक सुंदर और आनंदमय यात्रा बन जाता है।

एक दिन माँ शमता ॐ (जो मेरी प्रधान शिष्या और एक अत्यंत गरिमापूर्ण एवं सुंदर मनुष्य हैं) ने अपने सामान्य सरल विधि से कुछ गहन अर्थपूर्ण बात कही। “स्वामी” उन्होंने कहा, “यदि सोचा जाए तो मनुष्य का जीवन कितना सुंदर और सरल है। प्रतिदिन उठें, अच्छे कर्म करें, पेट-भर भोजन खाएं, दूसरों की सहायता करें, मानवता की सेवा करें और थोड़ा आराम करें। यही पर्याप्त है। परंतु किसी कारणवश अधिकतर मनुष्यों ने इसे बहुत अधिक सोच और चिंताओं के कारण बहुत जटिल बना दिया है।” इन शब्दों के संदेश के…read more

जब अत्यधिक देखभाल प्रेम को नष्ट कर दे

अत्यधिक देखभाल प्रेम को अशक्त बना देती है, जैसे अत्यधिक जल पौधों को नष्ट कर देता है।

क्या आपको कभी अपने साथी से एक साधारण सी बात करने में भी संकोच होता है, जैसे कि आप सप्ताहांत में क्या करना चाहते हैं? और कोई बात कहने से पूर्व आपने अपने मन में उस वार्तालाप को बार-बार दोहराया है? मात्र इसलिये कि आपको पता नहीं कि उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी। या इससे भी महत्वपूर्ण बात, आप डरते हैं कि उनकी प्रतिक्रिया अनुकूल नहीं होगी। वे आप पर क्रोधित हो जाएंगे, यहाँ तक कि झल्ला पड़ेंगे। यदि ऐसा हुआ है तब आप अवश्य ही अपने उदर में होने वाली…read more

दैवत्व का बीज

फलों से लदा हुआ वृक्ष सदैव थोड़ा झुका होता है। दैवत्व के पथ का यह एक मूल गुण है।

एक प्रसिद्ध कथा है कि कज़ाकिस्तान के राजा ने अपने शाही दूतों को भारत के सम्राट जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के पास तीन गहन प्रश्नों के साथ भेजा। अकबर के नव-रत्न, नौ रत्न, असाधारण प्रतिभा युक्त नौ व्यक्ति थे। उनमें से एक था बीरबल जो अपनी वाकपटुता एवं बुद्धिमत्ता के लिये प्रसिद्ध था। राजा उन प्रश्नों के उत्तर स्वयं सुनना चाहता था इसलिये बीरबल को उत्तर देने के लिये भेजा गया। “ईश्वर कहाँ रहता है”, कज़ाकिस्तान के राजा ने अपना प्रथम प्रश्न पूछा। बीरबल ने उत्तर में एक गिलास दूध की…read more