ॐ स्वामी

प्रसन्नता का रहस्य

कभी कभी प्रसन्नता की गहन अनुभूति प्रवाह में न मिल कर निष्क्रियता में मिलती है, जब जीवन आपको चुनौती देता है।

जीवन का हर दिन मंदगति व सुस्त रूप से काटते हुए, अंततः मैं क्या कर रहा हूँ? प्रत्येक विचारपूर्ण व्यक्ति के जीवन में यह प्रश्न अनिवार्य है। इसे आप अस्तित्ववाद अथवा अधेड़ आयु संबंधी संकट काल या फिर चाहे जो कहें। यदि आपने अपना जीवन पुस्तक में लिखे गए नियमों के अनुसार जिया है और दूसरों की अथवा स्वयं की सहायता के लिए सभी कुछ किया है तो यह अवस्था अवश्यंभावी है। अपने जीवन काल में कभी न कभी हर समझदार व्यक्ति इस शून्यता की भावना का शिकार अवश्य होता…read more

अपने पश्चाताप के भाव पीछे छोड़ते हुए….

समय-चक्र की अविराम गति में ही बसते हैं हमारे जीवन के सुंदर पल।

एक बार एक महिला, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता थी, वह लोगों को मदिरापान की बुरी लत से छुटकारा पाने में सहायता किया करती थी। उसका एक छोटा सा शहर था, और जब भी वह किसी को मदिरापान करते सुनती तो तत्काल अन्य लोगों के एक छोटे समूह को ले वहाँ पहुँच जाती, ताकि वह उस व्यक्ति से बातचीत कर मदिरा के भयावह परिणामों से अवगत करा सके। उस क्षेत्र में मदिरा पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हो गई, चूंकि कोई भी उस महिला का सामना नहीं करना चाहता था।…read more

जीवन यात्रा

एक दार्शनिक कविता से प्रेरित होकर चिर-प्रसन्नता के मूल पर प्रस्तुत हैं मेरे विचार…

एक दिन संयोगवश मैंने कोरी मुलर की वेबसाइट (यहाँ) पर एक सुंदर कविता की व्याख्या पढ़ी। हालाँकि उसका शीर्षक “दो भाई” था किंतु उसे सरलता से “मनुष्य के अस्तित्व का सत्य” कहा जा सकता है। मुझे उस कविता में इतनी गहराई लगी कि एक पल के लिये मैंने आज के पोस्ट में केवल उस कविता को ही साझा करने का विचार किया। बिना किसी टिप्पणी या मेरे अपने विचारों के। प्रस्तुत है वह कविता – एक पुराने पेड़ के नीचे दो पुत्र पैदा हुए प्यार से स्वतंत्रता से दोनों साथ-…read more

सावधानीपूर्वक पालन पोषण करने के चार पहलू

प्रस्तुत हैं सावधानीपूर्वक पालन पोषण के चार पहलू जो किसी भी शिशु का जीवन रूपांतरित करने की क्षमता रखते हैं...

वैदिक ग्रन्थों में एक पद बहुधा प्रयोग में लाया जाता है – उसे “ब्रहमचारी” शब्द दिया गया है। इसे बारंबार एवं अपने संकुचित रूप में अविवाहित जीवन के रूप में प्रतिपादित किया जाता है। किन्तु इसके वास्तविक अर्थ का संयम/परिवर्जन से अतिन्यून संबंध है। ब्रहमचारी का अर्थ है वह जिसका आचरण ब्रह्म के समान हो। इस परिपेक्ष्य में, बौद्ध ग्रंथ ऐसे मनुष्य को “ब्रहम विहारी” कहते हैं – ऐसा व्यक्ति जिसका व्यवहार उत्कृष्ट एवं दिव्य हो। ऐसे व्यक्तित्व के चार पहलू होते हैं। आप इन चार को व्यवहार में लाएँ…read more

1