ॐ स्वामी

वू – वे : अच्छी चीजों को होने देना

ताओ की एक अति सुंदर धारणा है – वू–वे, जो दर्शाता है कि किस प्रकार यदा कदा पूर्णत: कार्य विमुख हो जाना ही सबसे उत्तम कार्य होता है। एवं, एक घोषणा …

युआन साम्राज्य काल में चीन के सम्राट स्वयं का एक चित्र बनवाने के इच्छुक थे। “मैं अपने आज तक बने किसी भी चित्र से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हूँ।” उनने चित्रकारों के एक बड़े समूह को संबोधित किया। “मेरा एक ऐसा चित्र बनाओ जिसमें मेरे सूक्ष्मतम हाव-भाव भी दर्शाये गए हों – मेरा प्रतिरूप।” सम्राट प्रतिदिन दो घंटे के लिए बैठते और अति कुशल चित्रकार उनका अवलोकन करते, व भिन्न भिन्न कोण लेकर चित्र चित्रांकित करते । पूर्ण समर्पण एवं सतर्कतापूर्वक वे सब अपने अपने कैनवस पर पेंसिल व…read more

ॐ स्वामी का मार्ग

प्रस्तुत है अपने चारों ओर की अफवाहों, गप्पबाजी एवं आलोचना से कैसे निपटा जाये – इस पर मेरा दृष्टिकोण।

हाल ही में मुझे उन सब लोगों से, जो मेरे लिए चिंतित हैं, ढेरों ई-मेल प्राप्त हुए। उनमें से कुछ दुखी थे, कुछ हैरान-परेशान थे व कुछ तो अत्यधिक क्रोध में थे (मुझ पर नहीं)। कारण? अपने उस प्रिय व्यक्ति को ले कर सुनी कुछ बेबुनियाद अफवाहें, जिसे वे अतिशय प्रेम करते हैं व अपना पथ-प्रदर्शक मानते हैं – ओम स्वामी; इस संदर्भ में वह मैं ही हूँ। वे गप्पबाजों को पलट कर जवाब देना चाहते थे। इसने मुझे बुद्ध के जीवन की एक कहानी स्मरण करवा दी। ऐसा कहा…read more

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