ॐ स्वामी

अच्छाई से क्या लाभ?

चाहे बादल कईं रंग ले कर आएं, परंतु आकाश पुनः नीला हो जाता है। अपनी अच्छाई न त्यागें।

कुछ सप्ताह पूर्व कैनडा में एक मृदुभाषी और बुद्धिमान नवयुवक मेरे पास आया और उसने मुझसे एक प्रश्न पूछा जो अधिकांश लोगों के लिए महत्वपूर्ण प्रासंगिकता का प्रश्न है। वह अपने पियानो गायन प्रस्तुति के लिये जा रहा था और उसकी माँ ने बताया था कि उसे अन्य छात्रों के लिये तालियाँ बजानी चाहिये एवं उन्हें शुभकामनाएं देनी चाहिये। “स्वामीजी मैं सदैव यही करता हूँ।” उसने मुझसे कहा, “परंतु कोई भी मेरे लिये ताली नहीं बजाता। माँ शुभकामनाएं देने को कहती हैं। मैं सदा ऐसा ही करता हूँ, परंतु कोई…read more

कैसे आकृष्ट न करें

जीवन प्रतिकूलता एवं विरोधाभास से भरा है। प्रकाश और अंधकार, धूप और हिम-पात शांतिपूर्वक मिल जुल कर रहते हैं। ध्यान दें।

कुछ दिनों पहले किसी ने, जो किसी संगठन की सीढ़ी के सबसे निम्न सोपान पर था, मुझे बताया कि कार्यस्थल पर अन्य व्यक्तियों के साथ उसका दिन सर्वदा दुष्कर रहता है। “ऐसा प्रतीत होता है कि मैं सदैव अपने विरोधियों को आकर्षित करता हूँ।” उसने कहा “मुझे कोई पसंद नहीं करता।” “किंतु एक दिन” वह बोला “मैंने रेडियो पर कुछ सुंदर सुना! उसमें कहा गया था ‘नौकरी है तो नाराज़गी क्यों?’ इस एक बात ने मेरे सम्पूर्ण दृष्टिकोण को परिवर्तित कर दिया और फिर मैंने इस बात की परवाह करनी…read more