जीवन के चार सत्य

मानव अस्तित्व के चार सत्यों पर प्रस्तुत है मेरा संस्करण

“मेरी ईश्वर से मात्र एक इच्छा है”, एक नवयुवती ने मुझसे कहा, “क्षमा। क्षमा के अतिरिक्त मेरी कोई अभिलाषा नहीं।” “मेरे पिता एच-आई-वी पॉजिटिव थे और उनके अंतिम दिन अत्यंत दुखदायी थे।” उस नवयुवती ने आगे सुनाया “वे हिल भी नहीं सकते थे और उन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी। मुझे उनसे इतनी घृणा हो गयी थी कि मैंने उनकी पूर्णतया उपेक्षा की। मेरी माँ परिवार के लिये रोटी कमाने वालीं अकेली सदस्य थीं और वे सारा समय घर पर नहीं रह सकती थीं। मैं अपने पिता की देखभाल कर…read more