ॐ स्वामी

जब आपके शब्द कष्ट पहुँचा सकते हों

क्या करें यदि आपकी करुणा प्राप्तकर्ता के विकास के लिए प्रतिकूल हो? आप आनंदप्रद होने या लाभप्रद होने के बीच में चुनाव कैसे करते हैं?

महान ज्ञानी चाणक्य सर्वोकृष्ट विचारक थे और भारत के अत्यंत शक्तिशाली राजाओं में से एक, चंद्रगुप्त मौर्य (३२१-२९७ ई-पू), के मुख्य सलाहकार थे। वास्तविकता में चाणक्य मात्र एक विश्वसनीय सलाहकार ही नहीं थे। क्योंकि उन्होंने चंद्रगुप्त को, जब चंद्रगुप्त मात्र छोटे बच्चे थे, ले कर, प्रशिक्षित कर, उन्हें शासक बना दिया था। वह एक बार नवोदित राजा को सलाह दे रहे थे जब उनमें निम्नलिखित वार्तालाप हुआ। “एक राजा का जीवन, त्यागपूर्ण जीवन है। उसे दूसरों के लिए जीना चाहिए”। फिर चाणक्य ने सूर्य की ओर संकेत करते हुए कहा…read more

जीवन के चार सत्य

मानव अस्तित्व के चार सत्यों पर प्रस्तुत है मेरा संस्करण

“मेरी ईश्वर से मात्र एक इच्छा है”, एक नवयुवती ने मुझसे कहा, “क्षमा। क्षमा के अतिरिक्त मेरी कोई अभिलाषा नहीं।” “मेरे पिता एच-आई-वी पॉजिटिव थे और उनके अंतिम दिन अत्यंत दुखदायी थे।” उस नवयुवती ने आगे सुनाया “वे हिल भी नहीं सकते थे और उन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी। मुझे उनसे इतनी घृणा हो गयी थी कि मैंने उनकी पूर्णतया उपेक्षा की। मेरी माँ परिवार के लिये रोटी कमाने वालीं अकेली सदस्य थीं और वे सारा समय घर पर नहीं रह सकती थीं। मैं अपने पिता की देखभाल कर…read more

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