निर्भीकता का बीज

उचित पालन-पोषण द्वारा एक बालक को जीवन में सत्यवादी व निर्भीक बनने में सहायता कर पाना संभव है।

यह मई १९८६ का समय था। मैं ६ १/२ वर्ष का था व अभी अभी अपने विद्यालय की द्वितीय कक्षा में उन्नीत हुआ था। सब कुछ बहुत रसहीन था। मेरी कक्षा के सभी पीरियड एक ही अध्यापिका लेती थीं। प्रतिदिन घर जा कर मुझे वह सब जो कक्षा में हर विषय में पढ़ाया जाता, वह पुनः लिखना होता था। यही हमारा गृहकार्य होता था। हर दिन, प्रतिदिन। उदाहरण स्वरूप, यदि मैंने कक्षा में गणित के ५ प्रश्न व अंग्रेजी में ५ वाक्य किए हैं तो मुझे घर जाकर वैसे का…read more