ॐ स्वामी

आखिर मैं ही क्यों?

अच्छे व्यक्तियों को क्यों कष्ट प्राप्त होता है या वे उस पीड़ा से क्यों गुज़रते हैं जिसके वे योग्य नहीं?

आखिर मैं ही क्यों? मुझे आज तक ऐसा कोई नहीं मिला जिसने अपने जीवन में कभी न कभी यह प्रश्न न पूछा हो। अधिकांश व्यक्ति जो अपनी दुखद गाथा लेकर मेरे पास आते हैं वे पूछते हैं, “आखिर यह मेरे साथ क्यों हो रहा है?” यह एक स्वभाविक प्रश्न है। हम सभी ने इस विषय पर सोचा है। मैं आपसे एक छोटी सी कहानी साझा करता हूँ। आर्थर ऐश (१९४३-९३) एक उभरते टेनिस खिलाड़ी थे जिनमें असीम क्षमता थी। अपने करियर के ३३ ख़िताबों के साथ, जिनमें ३ ग्रैंड स्लैम…read more

निर्भीकता का बीज

उचित पालन-पोषण द्वारा एक बालक को जीवन में सत्यवादी व निर्भीक बनने में सहायता कर पाना संभव है।

यह मई १९८६ का समय था। मैं ६ १/२ वर्ष का था व अभी अभी अपने विद्यालय की द्वितीय कक्षा में उन्नीत हुआ था। सब कुछ बहुत रसहीन था। मेरी कक्षा के सभी पीरियड एक ही अध्यापिका लेती थीं। प्रतिदिन घर जा कर मुझे वह सब जो कक्षा में हर विषय में पढ़ाया जाता, वह पुनः लिखना होता था। यही हमारा गृहकार्य होता था। हर दिन, प्रतिदिन। उदाहरण स्वरूप, यदि मैंने कक्षा में गणित के ५ प्रश्न व अंग्रेजी में ५ वाक्य किए हैं तो मुझे घर जाकर वैसे का…read more