ॐ स्वामी

जीवन का उद्देश्य

जिस प्रकार एक नदिया, सागर में विलीन होने से पूर्व, इधर-उधर मार्ग बनाते व आगे बढ़ते हुए, चहुं ओर जीवन्तता बहाती चलती है; हमारे जीवन का उद्देश्य भी उसी के समान है – एक सम्पूर्ण जीवन जीना व अपनी ही भव्यता में विलीन हो जाना।

मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है? मैं अपना उद्देश्य कैसे ढूंढू? ये दो प्रश्न बहुधा मुझसे उन लोगों द्वारा पूछे जाते हैं जिनके जीवन में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है। जब आपका पेट भी वैसे ही भरा होता है जैसे आपका बैंक बैलेन्स, और आपको नींद नहीं आ रही होती, तब स्वाभाविक ही आप बैठ कर सोचते हैं (अथवा चिंता करते हैं) कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है। बहुत हद तक ऐसा प्रतीत होता है मानो हम जीवन में ऐसा कुछ चाहते हैं जो हमें विचारमग्न व…read more

अनित्यता

जो कुछ भी इंद्रियगोचर है, उसमें से कुछ भी स्थायी नहीं। यह मेघ, चंद्रमा, तारागण, हमारा ग्रह, सब कुछ निरंतर परिवर्तित हो रहा है।

कभी कभी मैं आश्चर्यचकित होता हूँ कि प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति हम इतने अनिच्छुक क्यों रहते हैं? कुछ भी ऐसा जो हमारी अपेक्षाओं के साथ तारतम्य नहीं रखता, हम उसे दुःख की संज्ञा दे देते हैं। चाहे वह कोई कठिन व्यक्ति हो, अथवा परिस्थिति या समस्या हो, जो कुछ भी हमें बेचैन करने की क्षमता रखता है वह हमारे लिए अवांछनीय हो जाता है। अतिशय तीव्रता से। हम उससे अपना पीछा छुड़ाना चाहते हैं। इच्छा रखना, स्वभावतः, कोई समस्या नहीं है, चूँकि हमारे भौतिक अथवा आध्यात्मिक – किसी भी प्रकार…read more

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