स्वर्ग और नर्क

क्या स्वर्ग और नर्क वास्तव में कहीं हैं अथवा तो वे मात्र एक कल्पना हैं?

“क्या मरणोपरांत हम सच्च में स्वर्ग अथवा नर्क में जाते हैं?” एक दिन किसी ने मुझसे पूछा। “नहीं।” मेरा उत्तर था। “तो क्या आप यह कह रहे हैं कि ग्रंथ मिथ्यावादी हैं?” उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा। इसका प्रत्युत्तर मैंने एक कहानी से दिया जो प्रथम बार मैंने सूफी संत हज़रत इनायत खान के प्रवचन में पढ़ी थी। एक शिष्य गत कई वर्षों से अपने गुरु के सानिध्य में अभ्यासरत था, किन्तु अभी तक वह किसी भी प्रकार के दिव्य अनुभव अथवा किसी भी विषय की सम्पूर्ण जानकारी से वंचित था। एक…read more