ॐ स्वामी

जीवन का उद्देश्य

जिस प्रकार एक नदिया, सागर में विलीन होने से पूर्व, इधर-उधर मार्ग बनाते व आगे बढ़ते हुए, चहुं ओर जीवन्तता बहाती चलती है; हमारे जीवन का उद्देश्य भी उसी के समान है – एक सम्पूर्ण जीवन जीना व अपनी ही भव्यता में विलीन हो जाना।

मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है? मैं अपना उद्देश्य कैसे ढूंढू? ये दो प्रश्न बहुधा मुझसे उन लोगों द्वारा पूछे जाते हैं जिनके जीवन में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है। जब आपका पेट भी वैसे ही भरा होता है जैसे आपका बैंक बैलेन्स, और आपको नींद नहीं आ रही होती, तब स्वाभाविक ही आप बैठ कर सोचते हैं (अथवा चिंता करते हैं) कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है। बहुत हद तक ऐसा प्रतीत होता है मानो हम जीवन में ऐसा कुछ चाहते हैं जो हमें विचारमग्न व…read more

एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति

प्रस्तुत है एक सुंदर सी लघु कथा, आध्यात्मिक प्रवृत्ति की महत्त्व्ता एवं उसका अर्थ उजागर करती हुई।

सुभूति, बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक थे व बहुत समय से अपने गुरु की शिक्षाओं को चहुं ओर पहुंचाने के इच्छुक थे। एक सुबह, जब बुद्ध जेतवन में आए हुए थे, तो सुभूति ने उनके ठहरने के स्थान, गंडकुटीर के बाहर बुद्ध को दंडवत प्रणाम किया, व उनके संदेश को चारों दिशाओं में फैलाने हेतु उनकी आज्ञा मांगी। “उठो सुभूति,” बुद्ध ने कहा। “शिक्षक बनना कोई सरल कार्य नहीं होता। यदि आप बहुत अच्छे शब्द भी कह रहे होंगे, तब भी ऐसे बहुत से लोग होंगे तो आपकी…read more

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