ॐ स्वामी

अपने अतीत को पीछे छोड़ते हुए

जब आपका मुख प्रकाश की ओर होता है आपकी परछाई सदा आपके पीछे होती है…

“मैं स्वयं को परिवर्तित करना चाहता हूँ किन्तु मेरा अतीत मुझे परेशान करता रहता है, स्वामी,” कुछ समय पूर्व एक आगंतुक ने मुझे कहा। “मैं अपने पापों के लिए निरंतर ग्लानि का अनुभव करता रहता हूँ। मैं अपने बोझ से छुटकारा कैसे पाऊँ?” “दो वस्तुएँ आपका अनुकरण आपकी चिता तक करेंगी,” मैंने उत्तर दिया। “अनुमान लगाना चाहेंगे?” “मेरे कर्म?” “और ऋणदाता,” मैंने परिहास किया। “एक बोझा लेकर आता है व दूसरा एक थैला।” वह कुछ बोझिल सी हँसी हँस दिये। “एक है ऋण,” मैंने आगे कहा, “व दूसरा ऋण-वसूलने वाला।”…read more

वह क्या है जो एक संबंध को बनाए रखता है?

प्रेम रूपी पुष्प तभी विकसित होता है जब उसे एक विशेष प्रकार से सींचा जाता है। आगे पढ़ें…

हमारा संसार लोगों के मेल से बना है। सामान्यतः हमारी सर्वाधिक सुखद व सर्वाधिक दुखद स्मृतियों में अन्य लोग विद्यमान रहते हैं। आप भले महंगी कारों, बड़े बड़े घरों, निजी नौका और न जाने अन्य कितनी वस्तुओं की इच्छा रखते हों, तथापि, अंततः, आप किसी न किसी के साथ मिल कर ही यह सारे आनंद लेने का स्वप्न सँजोए रखते हैं। संभवतः आप इस दुनिया में सर्वत्र व्याप्त शोर-गुल/उन्माद से दूर भाग जाने, अथवा तो किसी सूनसान द्वीप या हिमालय की एक गुफा में अपने को एकांत में बैठा देखने…read more