ॐ स्वामी

कॉटल्स्टन पाई

आप कैसे जानें कि स्वबोध हेतु आपको किस पथ का चयन करना है? क्या ध्यान ही एकमात्र मार्ग है?

“मैं ध्यान करना चाहता हूँ ”, किसी ने मुझसे एक दिन कहा। “किंतु यह मार्ग मेरे लिए नहीं है। क्या ध्यान आत्मबोध का एकमात्र मार्ग है?”। “ऐसा नहीं है।”, मैंने कहा। “किसी अन्य मार्ग से भी आप अवश्य स्वयं के सत्य का खोज कर सकते हैं।” “किंतु जब आप कहते हैं कि अपने सत्य की खोज स्वयं करो तो इसका क्या अर्थ है? और ऐसा कैसे किया जाए?” उसने मेरे विडियो प्रवचन से संबंधित एक आदर्श-वाक्य के विषय में पूछा। मुझे यह प्रश्न उचित लगा और मैं ऐसे कई व्यक्तियों…read more

सेवा की भावना

सेवा करने की हमारी तत्परता अथवा सेवित होने की अपेक्षा ही कभी-कभी स्वर्ग एवं नर्क के बीच एकमात्र अंतर होता है।

दंतकथाओं में कहा गया है कि मेवाड़ का महावीर शासक, महाराणा प्रताप, एक समय अपने एक विनम्र स्वभाव के सेवक के साथ बैठा था। सन १५८० की बात है जब वह मुगलों के साथ चल रहे संघर्ष में पूर्णतया पराजित हो गया था। हालाँकि पाँच वर्ष बाद ही वह अपने साम्राज्य का अधिकतर हिस्सा पुनः प्राप्त करने वाला था, अभी वह गुप्त रूप से जी रहा था और अपनी सेना को पुनर्निर्मित करने में लगा था। विद्वेष एवं अनिश्चितता के इस काल में, मिताहारी भोजन करते हुए, उसके किसी प्रजाजन…read more