ॐ स्वामी

अतिरिक्त सामान

आध्यात्मिक प्रगति हेतु हमें स्वयं के मार्ग में रुकावट बनने से बचना होगा, अन्यथा भावनाओं के शिलाखंड बार बार लुड़क कर वापिस आते रहेंगे।


एक छोटी लड़की थी जिसके बालों में नन्हा सा घूँघर था ठीक उसके माथे के बीच में; और जब वह अच्छी होती तब वह बहुत अच्छी होती, और जब वह बुरी होती तब वह वीभत्स होती। ~ एच डब्ल्यू लोंगफेलो हम सभी में अपनी विशिष्टताएं हैं। यह वे वस्तुएं हैं जो हमें घड़ी के समान चलायमान बनातीं हैं या असंतुष्ट करतीं हैं। न जाने कैसे, हमारी मनोदशा परिवर्तित हो जाती है और नकारात्मक विचार हमारी बुद्धि में उसी प्रकार उन्मत्त होने लगते हैं जिस प्रकार किसी केले के खेत में…read more

मार्शमैलो कैंडी परीक्षण

क्या अपनी भावनाओं का इस प्रकार नियंत्रण संभव है कि आप अधिकतर परिस्थितियों में एक सा अनुभव करें?

मुझे रॉय बॉमीस्टर द्वारा रचित विलपावर का एक लेखांश स्मरण आया जिसमें लिखा था “भावनात्मक नियंत्रण विशेषकर दुष्कर होता है क्योंकि आप अपनी इच्छा शक्ति से अपनी मनोदशा को परिवर्तित नहीं कर सकते। आप किस विषय पर विचार करते हैं या कैसे व्यवहार करते हैं उसमें आप परिवर्तन ला सकते हैं परंतु आप स्वयं को प्रसन्न रहने हेतु बंधित नहीं कर सकते। आप अपने ससुराल वालों के प्रति विनम्रतापूर्वक व्यवहार कर सकते हैं परंतु यदि वे आपके घर एक महीने रहने आ रहे हों तब आप स्वयं को आनंदित होने…read more