ॐ स्वामी

नेक बनना

यह सहज नहीं है, परंतु भलाई के बिना आत्म-अनुभूति संभव नहीं है।

वैसे सोचा जाए तो यह एक दार्शनिक प्रश्न है, परंतु इस प्रकार के अधिकांश प्रश्नों का हमारे जीवन पर अवश्य प्रभाव होता है। अधिक लाभदायक क्या है- एक निरंतर भौतिक अनुसरण या आंतरिक शांति का पथ? जबकि वे पारस्परिक रूप से अनन्य नहीं हैं फिर भी हमें किसी एक को प्राथमिकता देने की आवश्यकता होती है। मेरा तात्पर्य है, क्या हमें सफल होने पर ध्यान देना चाहिए, भले ही इसका अर्थ निर्दयी होना और अपने रिश्तों का त्याग करना हो (आशा है कि हमारे नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का बलिदान…read more

एक हज़ार कंचे

प्रस्तुत है एक सुंदर कथा जो हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तव में जीवन में क्या महत्वपूर्ण है।

हम एक ऐसी कहानी से प्रारंभ करते हैं जो मैंने कुछ वर्षों पूर्व पढ़ी थी और मन ही मन एक दिन उसे कहीं उपयोग करने का निश्चय किया था। इसे आपके साथ साझा करने के लिए शनिवार की सुबह से अच्छा अवसर क्या हो सकता है। प्रस्तुत है (यथासंभव कथा वैसी कि वैसी है, इसका स्रोत अज्ञात है) – मैं जैसे जैसे वृद्ध हो रहा हूँ, उतना ही मैं शनिवार सुबह का आनंद लेने लगा हूँ। संभवतः यह एकांत की वह शांति है जो प्रातः सर्वप्रथम उठने से आती है…read more