नेक बनना

यह सहज नहीं है, परंतु भलाई के बिना आत्म-अनुभूति संभव नहीं है।

वैसे सोचा जाए तो यह एक दार्शनिक प्रश्न है, परंतु इस प्रकार के अधिकांश प्रश्नों का हमारे जीवन पर अवश्य प्रभाव होता है। अधिक लाभदायक क्या है- एक निरंतर भौतिक अनुसरण या आंतरिक शांति का पथ? जबकि वे पारस्परिक रूप से अनन्य नहीं हैं फिर भी हमें किसी एक को प्राथमिकता देने की आवश्यकता होती है। मेरा तात्पर्य है, क्या हमें सफल होने पर ध्यान देना चाहिए, भले ही इसका अर्थ निर्दयी होना और अपने रिश्तों का त्याग करना हो (आशा है कि हमारे नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का बलिदान…read more