शिष्टता की तुलना में विनम्रता

विनम्रता के अभाव में कोई भी आध्यात्मिक प्राप्ति ऐसे लुप्त हो जाती है जैसे सूर्योदय होने पर ओस की बूंदें लुप्त हो जाती हैं।

बलूचिस्तान के राजा एक बार संत ख्वाजा नक्रुद्दीन (जिन्हें शाल पीर बाबा के नाम से भी जाना जाता है) के पास गए। राजा ने ख्वाजा नक्रुद्दीन से अनुरोध किया कि वे उन्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करें। परंतु राजा को स्वीकार करने के विषय में ख्वाजा संशयात्मक थे। राजा ने कहा “यदि शिष्य नहीं तो, मुझे अपने एक नम्र सेवक के रूप में ही रख लें। मैंने अपने राज्य का परित्याग कर दिया है और आपकी सेवा में आया हूँ।” राजा की भक्ति ने ख्वाजा नक्रुद्दीन के हृदय…read more