दयालुता का महत्त्व

प्रस्तुत है एक सुंदर कथा जिसे पढ़ कर इस सप्ताहांत आप चिंतन कर सकते हैं।

विजयनगर के सम्राट कृष्णदेवराय के मंत्री अपने राजा की जय जयकार कर रहे थे। राजा प्रसन्नता और गर्व से प्रफुल्लित था। आखिरकार, यह उसका सक्षम शासन था कि कारागृह लगभग रिक्त थे, उसके राजकोष और अन्न भंडार भरे हुए थे और नागरिकों ने अपने करों का भुगतान कर दिया था। राजा ने कहा “चूंकि मैं अनुरागशील, न्यायी और ईमानदार व्यक्ति हूँ, इस लिए यह स्वाभाविक है कि मेरी प्रजा भी मेरे जैसी है।” दरबारियों ने पूरे हृदय से सहमति व्यक्त की और अपने राजा का गुणगान किया। राजा के विशेष…read more