ॐ स्वामी

अंतर्संयोजनात्मक्ता का ब्रह्मांडीय सिद्धांत

हमारा व्यक्तिगत अस्तित्व इस शरीर के साथ जीवन भर के लिए ही मात्र सीमित नहीं है ….हम अपने भीतर अनंत सुंदरता के असीम लोक को लेकर चलते हैं।

एक दिन चीनी सन्यासी फ़ज़ंग (फ-त्सांग ) महारानी वू ( ६२४-७०५ सी ई) के राज दरबार में अवतामसक सूत्र  पर  प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने समझाया कि एक ब्रह्मांड जिसमें चेतना के अनेक आयामों  के साथ, अस्तित्व के अनेक लोक हैं वे मात्र अंतरसंयोजित ही नहीं बल्कि वे परस्पर समाविष्ट भी हैं।महारानी ने कहा मैं इसे समझी पर इसे ग्रहण नहीं कर  पायी।मैं अंतरसंयोजन को समझ गयी किंतु  दो चीज़ें एक दूसरे को कैसे समाविष्ट  कर  सकती  हैं? यह अच्छी तरह ज्ञात है कि अंतरसंयोजन का सिद्धांत न केवल  मौलिक…read more

प्रसन्नता के लिए छोटा मार्ग

क्या प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग या द्रुत मार्ग है। यहाँ एक सुंदर कथा है जो आपको सोचने के लिए विवश करेगी।

जब मैं बेंगलोर में  लिट फ़ेस्ट में बोल रहा था तो नारायणी गणेश ने मुझसे पूछा कि क्या प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग है? ओह! मैने कहा “ तुम्हारा अर्थ है कि प्रसन्नता के लिए जुगाड़ ? वह और अन्य श्रोता मेरे साथ धीरे धीरे  हंस दिए । जुगाड़ का अर्थ है कुछ अनूठा हल खोज लेना,  किसी समस्या के लिए कुछ नवीन हल खोजना, किसी समस्या के हल के लिए  ऐसा कार्य करना जिसकी अनुपस्थिति में शायद उसके लिए बहुत अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती ।आक्सफ़ोर्ड  इंग्लिश शब्दकोश…read more