ॐ स्वामी

आपके जीवन का केन्द्रबिन्दु

प्रकृति में सब कुछ पूर्ववत सुंदर था, किन्तु पिंगला अब उस सुंदरता को देख नहीं पा रही थी...

श्रीमद भागवत पुराण में एक सुंदर वृतांत है। एक अवधूत, अर्थात आत्मसाक्षात्कारी महापुरुष, के ज्ञान से प्रभावित हो राजा यदु ने उनसे उनके गुरु के विषय में जानना चाहा, जिसके उत्तर में उन्होंने बताया कि उनके अनेकों गुरु थे, जिनमें एक वैशया भी उनकी गुरु थी। “एक वैशया?” राजा ने घृणा के भाव से पूछा। “हाँ, क्यों नहीं?” अवधूत बोले। “सुनो, मैंने उससे क्या ज्ञान पाया।” और, उन्होंने पिंगला का वृतांत आरंभ किया। पुरातन विदेह नगरी में पिंगला एक अति सुंदर गणिका थी। अपने रक्तवर्ण ओष्ठों की ताजगी व अति…read more

बटरफ्लाइ इफैक्ट

क्या मुंबई में एक नन्ही सी तितली के पंख फड़काने से हिमालय में हिमस्खलन की संभावना बन सकती है?

अति सम्माननीय बाबा बाल भारती के पास एक अति सुंदर, बलवान, अरबी घोड़ा था। उस स्टेलियन को निगाह भर देखने मात्र से उनका मन वैसे ही भावों से ओतप्रोत हो जाता जैसा किसी किसान का अपनी लहलहाती फसल को देख कर होता है। बाबा के सही-सटीक भविष्यवाणी करने के गुण से प्रभावित हो मुगल साम्राज्य के अंतिम सम्राट ने भेंट स्वरूप वह अश्व बाबा को दिया था। बाबा, जो एक फकीर थे, एक गाँव में मंदिर के प्रांगण में रहते थे जहां उन्होंने अपनी कुटिया व घोड़े के लिए अस्तबल…read more

एक धन्य जीवन

कभी कभी दूसरों द्वारा झेले गए कष्टों का विवरण सुनने के उपरांत ही हमें अपने सौभाग्यशाली जीवन का एहसास होता है।

नौ वर्ष पूर्व, हमने अपने व्यवसाय हेतु एक स्थान किराए पर लिया। यह एक चार मंजिल की इमारत थी और हमने इसे अपनी रुचिनुसार ठीक-ठाक करवाया था। इसके रख-रखाव के लिए हमने एक ‘हाउस-कीपिंग ऐजेंसी’ की सेवाएँ लीं जिसने हमें उपयुक्त कर्मचारी प्रदान किए। हम प्रसन्न थे कि हमें अपने अन्य कार्य-कलापों, प्रशिक्षण, उन्हें बनाए रखना इत्यादि की चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी। मात्र कुछ अधिक राशि के भुगतान से एक बाहरी ऐजेंसी के ऊपर यह सब दायित्व था। मैंने उनमें से एक कर्मचारी, उसका नाम “ऐ-जे” रख लेते…read more

भय का स्रोत

जिस प्रकार एक पौधे का मूल स्रोत बीज होता है, हमारे भय का भी एक स्रोत होता है। अपनी व्यग्रता, डर व आशंकाओं से ऊपर उठने के लिए हमें उनके स्रोत तक पहुंचना होगा।

पेमा चोद्रन (Pema Chödrön) ने ‘वेन थिंग्स फॉल अपार्ट’ (When Things Fall Apart) में अपने गुरु के विषय में एक रोचक घटना का उल्लेख किया है – उनके गुरु तिरुङ्ग्पा रींपोचे – जो एक दृढ़, विवादास्पद, किन्तु स्पष्ट, पारदर्शी व सत्यवादी थे। एक युवा ने एक बार उनसे पूछा कि क्या उन्हें कभी डर लगा? रींपोचे ने उत्तर में कहा कि उनके मठ से जुड़े प्रशिक्षण के अंतर्गत उन्हें शमशान जैसे स्थान पर जाना होता था जो उन्हें भयभीत कर देता; और उन्हें ऐसे विषयों पर चिंतन करना होता था…read more

किसे प्रसन्न रखा जाये

दो व्यक्ति आपस में प्रेम करें, साथ-साथ रहें तथापि वे पृथक मार्गों के पथिक हों – ऐसा अवश्य हो सकता है। प्रेम का अर्थ पूरा समय दूसरे को प्रसन्न रखना ही नहीं होता।

एक दिन एक युवक ने अति सादगीपूर्ण ढंग से मुझसे पूछा, “मुझे किस को प्रसन्न रखना चाहिए? यहाँ तो बहुत से लोग हैं – मेरे माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी, बच्चे, बॉस एवं कई अन्य। इनमें से मैं किसका चयन करूँ, अथवा तो क्या मैं प्रयत्न करूँ व सभी को खुश रखूँ?” “आप सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति को तो भूल गए”, मैंने कहा। “ईश्वर?” “नहीं, आप स्वयं।” अंतत:, दैनिक जीवन की खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि मैं स्वयं को एवं दूसरों को कितना प्रसन्न रख पाता हूँ, और दोनों में…read more

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