ॐ स्वामी

भावनात्मक उपचार – पीड़ा से ऊपर उठना

आप जो भी क्रिया-कलाप करते हैं अथवा अनुभव करते हैं, वह सब अपनी एक मानसिक छाप छोड़ जाता है। उन मानसिक छापों को मिटाना ही भावनात्मक उपचार है।

जीवन अविरल बहती समयधारा का वह समुच्चय है जिसमें चरणबद्ध रूप से घटनाएँ प्रकट होती हैं; यह अनुभवों का एक गुलदस्ता है; मन की विभिन्न प्रवृतियों की एक अविराम दौड़; पुरानी चित्तवृत्तियाँ, मानसिक छापों का अपरिष्कृत संग्रह – जो सब आपके संग जन्मों जन्मों से यात्रा करते हुए, साथ साथ बंधा चला आ रहा है; जो आपको आपका वर्तमान स्वरूप प्रदान किए हुए है। प्रायः लोग कुछ नया करने; एक नवीन अभ्यास बनाने, किसी विचार को कार्यरूप देने, ध्यान में बैठने, व्यायाम करने आदि का प्रण ईमानदारी पूर्वक लेते तो…read more

नियति या स्वेच्छा

क्या भाग्य नियंत्रित करता है कि आप कहाँ पहुँचेंगे या आपकी स्वतंत्र इच्छा शक्ति?

क्या सब कुछ पूर्वनिर्धारित है या हमारे पास स्वतंत्र इच्छा शक्ति है? अंततः यदि सब कुछ पूर्वनिर्धारित है तब हम अपने स्वप्नों को पूर्ण करने हेतु कोई प्रयास क्यों करें और यदि यह हमारे हाथों में है, तब हम जीवन में असहाय और अप्रत्याशित परिस्थितियों के माध्यम से क्यों जाते हैं? मात्र कुछ दिनों पूर्व आश्रम के वार्षिकोत्सव के पर्यंत मैंने एक वक्ता द्वारा कही गयी सुंदर कथा सुनी जिसमें देवी माँ की महिमा का वर्णन किया गया था। ४५० से भी अधिक वर्ष पूर्व, भारत में मल्लुक दास नामक…read more

हिमालय की एक स्मृति

उस हिरणी के करुणामयी नेत्रों में व्याप्त स्थिरता किसी योगिन की परिशुद्ध दृष्टि को भी मात दे रही थी।

यह बीते वर्ष, अप्रैल मास के आसपास का समय था, कदाचित अप्रैल का आरंभ ! चारों ओर पर्वत शिखर अभी भी हिमाच्छादित थे। जहां मैं था, वहाँ का तापमान, लगभग सम्पूर्ण दिवस, अधिकांश रूप से शून्य से भी नीचे ही रहता था। किन्तु, केवल कुछ स्थानों को छोड़ कर जहां की बर्फ कठोर हो चुकी थी, लगभग पूरी बर्फ पिघल चुकी थी। वह कठोर बर्फ न तो हिम समान थी, न ही बर्फ जैसी; इन दोनों के मध्य का कोई रूप था। शीत ऋतु में लगभग सभी वन्य जीव निचले,…read more

आध्यात्मिक संपत्ति

वह कौन सी नाव है जो आपको अशांत भावनाओं से शांति के आंतरिक सागर की ओर ले जाने में मदद करती है?

रूमी के प्रसिद्ध पुराण “मसंवी” में एक दरिद्र एवं एक कंजूस की सुंदर अपितु धृष्ट कथा है। अरब में गर्मी के एक दिन, एक दुर्बल, वृद्ध भिखारी ने भिक्षा की आस में एक धनी व्यक्ति के द्वार पर दस्तक दी। उसकी दयनीय अवस्था को देखकर द्वारपालों ने उसे भीतर आने दिया और उसे बरामदे में प्रतीक्षा करने को कहा। जैसे ही घर का मालिक आया, भिखारी ने याचना की “महोदय, कृपा कर आप मुझे एक रोटी का टुकड़ा दें?” “तुम्हें क्या लगता है?” मालिक ने उसे फटकारा “क्या यह कोई…read more

सम्बन्धों में सामंजस्य की पुनर्स्थापना

सकारात्मक व नकारात्मक – दोनों प्रकार की भावनाएं कुकुरमुत्ते के समान होती हैं, वे अतिशय तीव्र गति से बढ़ती हैं।

एक प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में, गणित के अध्यापक ने एक ऐसे विद्यार्थी को संबोधित किया जो आम का फल बहुत पसंद करता था। उस ने उस छोटे बालक को देखा और कहा, “यदि मैं तुम्हें एक सेब दूँ, फिर एक और सेब दूँ, और, पुन: एक और सेब दूँ, तो तुम्हारे पास कुल कितने सेब हो जाएँगे?” उस बालक ने अपनी उँगलियों पर गणना आरंभ की, कुछ क्षण खुले आकाश की ओर निहारा, फिर अपने लंबे से अध्यापक को देखते हुए सोच समझ कर बोला, “चार”। अध्यापक विस्मित रह…read more

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