ॐ स्वामी

संतोषजनक जीवन का रहस्य

अंतत: यह इतना जटिल नहीं है - कड़ी मेहनत करें और पूर्णतः जीवन का आनंद लें।

“मुझे सोमवार पूर्णतया नापसंद है,” किसी ने मुझसे एक दिन कहा। “और यदि सोमवार का अवसाद नामक कोई रोग है, तब मुझे अवश्य वह रोग है।” इस व्यक्ति ने तर्क दिया कि हालांकि वह धन उपार्जन कर रहा था, वह अपना आदर्श जीवन नहीं जी रहा था। उसने सब कुछ किया क्योंकि वह अनिवार्य था। “यदि मेरे उत्तरदायित्व नहीं होते तो मैं आपके जैसे वस्त्र पहनता और स्वतंत्र रूप से घूम रहा होता।” “ओह!” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। “यह फ़ेसबुक का मायाजाल है।” उसने मुझे विचित्र रूप से देखा और मैंने कहा,…read more

दयालुता का विपरीत

क्या आपने कभी विचार किया है कि दयालुता का विपरीत क्या है? क्या यह निर्दयी होना है या कुछ और?

आपके अनुसार दयालुता का विपरीत क्या है? क्या यह दूसरे व्यक्ति को हानि पहुँचाना है? मेरे विचार से ऐसा नहीं है। आप पूछेंगे फिर यह क्या है? दो वर्ष पूर्व मैं सुवि के साथ उनकी गाड़ी में एक व्यस्त बाजार से होकर यात्रा कर रहा था। मैं सुवि को लगभग दो दशकों से भी अधिक समय से जानता हूँ। मेरे प्रति उनका प्रेम एवं उनकी निष्ठा अभी भी मुझे विस्मित कर देती है। जून का महीना था और कड़ाके की सर्दी थी। हमारी गाड़ी में हीटर अपनी अधिकतम गति पर…read more

शिष्टता की तुलना में विनम्रता

विनम्रता के अभाव में कोई भी आध्यात्मिक प्राप्ति ऐसे लुप्त हो जाती है जैसे सूर्योदय होने पर ओस की बूंदें लुप्त हो जाती हैं।

बलूचिस्तान के राजा एक बार संत ख्वाजा नक्रुद्दीन (जिन्हें शाल पीर बाबा के नाम से भी जाना जाता है) के पास गए। राजा ने ख्वाजा नक्रुद्दीन से अनुरोध किया कि वे उन्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करें। परंतु राजा को स्वीकार करने के विषय में ख्वाजा संशयात्मक थे। राजा ने कहा “यदि शिष्य नहीं तो, मुझे अपने एक नम्र सेवक के रूप में ही रख लें। मैंने अपने राज्य का परित्याग कर दिया है और आपकी सेवा में आया हूँ।” राजा की भक्ति ने ख्वाजा नक्रुद्दीन के हृदय…read more

नेक बनना

यह सहज नहीं है, परंतु भलाई के बिना आत्म-अनुभूति संभव नहीं है।

वैसे सोचा जाए तो यह एक दार्शनिक प्रश्न है, परंतु इस प्रकार के अधिकांश प्रश्नों का हमारे जीवन पर अवश्य प्रभाव होता है। अधिक लाभदायक क्या है- एक निरंतर भौतिक अनुसरण या आंतरिक शांति का पथ? जबकि वे पारस्परिक रूप से अनन्य नहीं हैं फिर भी हमें किसी एक को प्राथमिकता देने की आवश्यकता होती है। मेरा तात्पर्य है, क्या हमें सफल होने पर ध्यान देना चाहिए, भले ही इसका अर्थ निर्दयी होना और अपने रिश्तों का त्याग करना हो (आशा है कि हमारे नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का बलिदान…read more

एक हज़ार कंचे

प्रस्तुत है एक सुंदर कथा जो हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तव में जीवन में क्या महत्वपूर्ण है।

हम एक ऐसी कहानी से प्रारंभ करते हैं जो मैंने कुछ वर्षों पूर्व पढ़ी थी और मन ही मन एक दिन उसे कहीं उपयोग करने का निश्चय किया था। इसे आपके साथ साझा करने के लिए शनिवार की सुबह से अच्छा अवसर क्या हो सकता है। प्रस्तुत है (यथासंभव कथा वैसी कि वैसी है, इसका स्रोत अज्ञात है) – मैं जैसे जैसे वृद्ध हो रहा हूँ, उतना ही मैं शनिवार सुबह का आनंद लेने लगा हूँ। संभवतः यह एकांत की वह शांति है जो प्रातः सर्वप्रथम उठने से आती है…read more