ॐ स्वामी

प्रबोधन

क्या प्रबोधन का यह अर्थ है कि आप सदैव परम आनंद का अनुभव करेंगे?

“मुझे प्रबोधन की प्राप्ति कैसे हो?” किसी ने मुझसे एक दिन पूछा। “क्या आप मुझे कुछ गहन अनुभव नहीं प्रदान कर सकते? मैं अपने जीवन में आमूल परिवर्तन चाहता हूँ।” मुझसे बहुत से उत्साही जिज्ञासु बहुधा इस प्रकार के प्रश्न करते हैं। वे किसी राम-बाण की खोज में हैं, कोई रहस्मय सत्य जो उनकी सारी समस्याओं का समाधान कर देगा (आध्यात्मिक व सांसारिक)। जबकि कई व्यक्ति सततः व्यक्तिगत प्रयास का महत्त्व समझते हैं, अधिकतर व्यक्ति तुरंत समाधान की खोज में हैं। प्रस्तुत है आद्य शक्ति द्वारा रचित एक उद्धरण जो…read more

चिंतित मन से सचेत मन की ओर

एक पुष्प के खिलने से पूरे विश्व में वसंत ऋतु आ जाती है।

एक दिन, बुद्ध अपने भिक्षुओं के साथ शांति से बैठे थे कि एक व्यक्ति ने उन्हें संबोधित किया और कहा, “क्या आप मुझे कम से कम शब्दों में सर्वोत्तम ज्ञान प्रदान कर सकते हैं?”। बुद्ध ने उस व्यक्ति को और उसके प्रश्न को मान्यता दी और मौन रहते हुए मुस्कुराए। कुछ मिनटों तक प्रतीक्षा करने के बाद, वह व्यक्ति बुद्ध के सामने झुका और बोला, “बहुत बहुत धन्यवाद। मुझे आपका संदेश मिल गया है। मैं अब आपकी अनुमति लेता हूँ।” शारिपुत्र, जो सर्वाधिक अवज्ञाकारी भिक्षुओं में से एक थे, जिन्होंने…read more

कॉटल्स्टन पाई

आप कैसे जानें कि स्वबोध हेतु आपको किस पथ का चयन करना है? क्या ध्यान ही एकमात्र मार्ग है?

“मैं ध्यान करना चाहता हूँ ”, किसी ने मुझसे एक दिन कहा। “किंतु यह मार्ग मेरे लिए नहीं है। क्या ध्यान आत्मबोध का एकमात्र मार्ग है?”। “ऐसा नहीं है।”, मैंने कहा। “किसी अन्य मार्ग से भी आप अवश्य स्वयं के सत्य का खोज कर सकते हैं।” “किंतु जब आप कहते हैं कि अपने सत्य की खोज स्वयं करो तो इसका क्या अर्थ है? और ऐसा कैसे किया जाए?” उसने मेरे विडियो प्रवचन से संबंधित एक आदर्श-वाक्य के विषय में पूछा। मुझे यह प्रश्न उचित लगा और मैं ऐसे कई व्यक्तियों…read more

सेवा की भावना

सेवा करने की हमारी तत्परता अथवा सेवित होने की अपेक्षा ही कभी-कभी स्वर्ग एवं नर्क के बीच एकमात्र अंतर होता है।

दंतकथाओं में कहा गया है कि मेवाड़ का महावीर शासक, महाराणा प्रताप, एक समय अपने एक विनम्र स्वभाव के सेवक के साथ बैठा था। सन १५८० की बात है जब वह मुगलों के साथ चल रहे संघर्ष में पूर्णतया पराजित हो गया था। हालाँकि पाँच वर्ष बाद ही वह अपने साम्राज्य का अधिकतर हिस्सा पुनः प्राप्त करने वाला था, अभी वह गुप्त रूप से जी रहा था और अपनी सेना को पुनर्निर्मित करने में लगा था। विद्वेष एवं अनिश्चितता के इस काल में, मिताहारी भोजन करते हुए, उसके किसी प्रजाजन…read more

अपने अतीत को पीछे छोड़ते हुए

जब आपका मुख प्रकाश की ओर होता है आपकी परछाई सदा आपके पीछे होती है…

“मैं स्वयं को परिवर्तित करना चाहता हूँ किन्तु मेरा अतीत मुझे परेशान करता रहता है, स्वामी,” कुछ समय पूर्व एक आगंतुक ने मुझे कहा। “मैं अपने पापों के लिए निरंतर ग्लानि का अनुभव करता रहता हूँ। मैं अपने बोझ से छुटकारा कैसे पाऊँ?” “दो वस्तुएँ आपका अनुकरण आपकी चिता तक करेंगी,” मैंने उत्तर दिया। “अनुमान लगाना चाहेंगे?” “मेरे कर्म?” “और ऋणदाता,” मैंने परिहास किया। “एक बोझा लेकर आता है व दूसरा एक थैला।” वह कुछ बोझिल सी हँसी हँस दिये। “एक है ऋण,” मैंने आगे कहा, “व दूसरा ऋण-वसूलने वाला।”…read more

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