ॐ स्वामी

एक मिलियन विचार

“अ मिलियन थोट्स”, यह मेरी ध्यान पर सर्वोत्तम विस्तृत पुस्तक-रचना है। ध्यान पर आपकी अ से ह तक की पथप्रदर्शिका।

यह फरवरी २०११ के अंत का समय था। १०,००० फुट की ऊंचाई पर, हिमालय के एक वन में, जहां उस छप्पर की कुटिया के बाहर बर्फ के हिमलम्ब लटक रहे थे, मैं गहन ध्यानावस्था में बैठा था। तन और मन दोनों की सुदृढ़ स्थिरता में बैठे १० घंटे इतनी सुगमता से व्यतीत हो चुके थे जिस प्रकार रात्रि भोर में रूपांतरित होती है। पूर्ण चंद्रमा की शीतल किरणें मेरे सम्मुख रखे श्री यंत्र पर उतर आईं। यह यंत्र कुंडलिनी अथवा माँ जगजननी का ज्योमितिकीय द्योतक था एवं मेरे उस समय…और पढ़ें

एक आध्यात्मिक अनुभव

प्रस्तुत है एक संत के जीवन की सुंदर कथा जो एक वास्तविक आध्यात्मिक अनुभव को दर्शाती है।

मुझे यह कैसे पता चले कि मैं सही मार्ग पर हूँ? मैं अपनी आध्यात्मिक उन्नति किस तरह मापा करूँ? और, एक सच्चे आध्यात्मिक अनुभव का सूचक क्या होता है? ये वह तीन सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्न हैं जो हर सच्चा साधक अपनी यात्रा के दौरान कभी न कभी मुझसे पूछता है। बहुधा वे अपने अनुभव बताते हैं और मुझसे पूछते हैं कि जो उन्होंने अनुभव किया, क्या वह वास्तविक था। अपने अनुभव पर शंका करना स्वाभाविक है, मुख्य रूप से तब जब किसी गहन आध्यात्मिक लगने वाले प्रकरण के…और पढ़ें

जीवन के चार सत्य

मानव अस्तित्व के चार सत्यों पर प्रस्तुत है मेरा संस्करण

“मेरी ईश्वर से मात्र एक इच्छा है”, एक नवयुवती ने मुझसे कहा, “क्षमा। क्षमा के अतिरिक्त मेरी कोई अभिलाषा नहीं।” “मेरे पिता एच-आई-वी पॉजिटिव थे और उनके अंतिम दिन अत्यंत दुखदायी थे।” उस नवयुवती ने आगे सुनाया “वे हिल भी नहीं सकते थे और उन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी। मुझे उनसे इतनी घृणा हो गयी थी कि मैंने उनकी पूर्णतया उपेक्षा की। मेरी माँ परिवार के लिये रोटी कमाने वालीं अकेली सदस्य थीं और वे सारा समय घर पर नहीं रह सकती थीं। मैं अपने पिता की देखभाल कर…और पढ़ें

सावधानीपूर्वक पालन पोषण करने के चार पहलू

प्रस्तुत हैं सावधानीपूर्वक पालन पोषण के चार पहलू जो किसी भी शिशु का जीवन रूपांतरित करने की क्षमता रखते हैं...

वैदिक ग्रन्थों में एक पद बहुधा प्रयोग में लाया जाता है – उसे “ब्रहमचारी” शब्द दिया गया है। इसे बारंबार एवं अपने संकुचित रूप में अविवाहित जीवन के रूप में प्रतिपादित किया जाता है। किन्तु इसके वास्तविक अर्थ का संयम/परिवर्जन से अतिन्यून संबंध है। ब्रहमचारी का अर्थ है वह जिसका आचरण ब्रह्म के समान हो। इस परिपेक्ष्य में, बौद्ध ग्रंथ ऐसे मनुष्य को “ब्रहम विहारी” कहते हैं – ऐसा व्यक्ति जिसका व्यवहार उत्कृष्ट एवं दिव्य हो। ऐसे व्यक्तित्व के चार पहलू होते हैं। आप इन चार को व्यवहार में लाएँ…और पढ़ें

अभिभावकीय करुणा

यदि आप आवश्यकता से अधिक संरक्षात्मक होने जा रहे हैं तो उन्हें स्वावलंबी होने में अत्याधिक समय लगेगा – भावनात्मक स्तर पर भी और अन्य प्रकार से भी।

“मैं सदा से एक अच्छा अभिभावक रहा हूँ और मैंने अपने बच्चों का हर कदम पर साथ दिया है,” एक, कुछ व्यथित से, अभिभावक ने मुझे कुछ सप्ताह पूर्व कहा, “और, फिर भी वे वास्तव में मेरा आदर नहीं करते। वे अपने अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं और मुझे कहते हैं कि मैं सदा से एक असहनीय पिता रहा हूँ। मुझे यह समझ नहीं आता। मैंने सदा उन्हें प्रेम किया है, उन्हें उनकी इच्छानुसार हर कार्य करने की छूट दी है। उन्हें सबसे बढ़िया कपड़े मिले,…और पढ़ें

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