ॐ स्वामी

अपने अतीत को पीछे छोड़ते हुए

जब आपका मुख प्रकाश की ओर होता है आपकी परछाई सदा आपके पीछे होती है…

“मैं स्वयं को परिवर्तित करना चाहता हूँ किन्तु मेरा अतीत मुझे परेशान करता रहता है, स्वामी,” कुछ समय पूर्व एक आगंतुक ने मुझे कहा। “मैं अपने पापों के लिए निरंतर ग्लानि का अनुभव करता रहता हूँ। मैं अपने बोझ से छुटकारा कैसे पाऊँ?” “दो वस्तुएँ आपका अनुकरण आपकी चिता तक करेंगी,” मैंने उत्तर दिया। “अनुमान लगाना चाहेंगे?” “मेरे कर्म?” “और ऋणदाता,” मैंने परिहास किया। “एक बोझा लेकर आता है व दूसरा एक थैला।” वह कुछ बोझिल सी हँसी हँस दिये। “एक है ऋण,” मैंने आगे कहा, “व दूसरा ऋण-वसूलने वाला।”…read more

वह क्या है जो एक संबंध को बनाए रखता है?

प्रेम रूपी पुष्प तभी विकसित होता है जब उसे एक विशेष प्रकार से सींचा जाता है। आगे पढ़ें…

हमारा संसार लोगों के मेल से बना है। सामान्यतः हमारी सर्वाधिक सुखद व सर्वाधिक दुखद स्मृतियों में अन्य लोग विद्यमान रहते हैं। आप भले महंगी कारों, बड़े बड़े घरों, निजी नौका और न जाने अन्य कितनी वस्तुओं की इच्छा रखते हों, तथापि, अंततः, आप किसी न किसी के साथ मिल कर ही यह सारे आनंद लेने का स्वप्न सँजोए रखते हैं। संभवतः आप इस दुनिया में सर्वत्र व्याप्त शोर-गुल/उन्माद से दूर भाग जाने, अथवा तो किसी सूनसान द्वीप या हिमालय की एक गुफा में अपने को एकांत में बैठा देखने…read more

आदर का आधार

वह मार्ग जो तुच्छ मानवीय भावनाओं से कहीं ऊपर, दिव्यता तक पहुंचता है, उस पर चलने हेतु मात्र एक गुण पर्याप्त है। वह है..... (आगे पढ़ें)

ब्रहमदत्त, काशी के राजदरबार में विगत चालीस वर्षों से अपनी सेवायें प्रदान करते आ रहे थे व उस राज्य के सर्वाधिक विश्वासपात्र मंत्री थे। वहाँ के राजा न केवल प्रत्येक महत्वपूर्ण कार्य में उनका परामर्श लेते, अपितु उन्हें इतना स्नेह देते कि ब्रहमदत्त प्रायः रात्रिभोज राजपरिवार के साथ ही लिया करते। उन्हें महाराज के निजी कक्ष में प्रवेश की पूर्ण अनुमति थी। अन्य सभासद उनकी ईमानदारी के लिए उन्हें अत्यधिक सम्मान प्रदान करते एवं काशी की प्रजा उनकी बुद्धिमत्ता को देखते हुए उन्हें अति आदरणीय मानती। एक बार राजकोष के…read more

नैपुण्य का रहस्य

प्रस्तुत है पाब्लो पिकासो के जीवन से एक सुंदर कथा, जो हमें प्रवीणता प्राप्त करने पर एक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

स्पेन का प्रसिद्ध चित्रकार पाब्लो पिकासो फ्रांस में एक छोटे से काफ़ीहाउस में बैठा था। वह अपने तीसरे कॉफी कप की प्रतीक्षा कर रहा था। उसकी एक सिगरेट ऐशट्रे में सुलग रही थी और वह एक काग़ज़ के नैपकिन पर चित्र बना रहा था। अन्यमनस्क पिकासो को निकटवर्ती मेज पर बैठी एक महिला बड़ी उत्सुकता से देख रही थी। कुछ क्षणों बाद पिकासो ने अपनी पेंसिल को नीचे रख दिया और नैपकिन को अपने हाथों में उठा लिया। वह नैपकिन को भावशून्य दृष्टि से देख रहा था जैसे कि वह…read more

अपने वचन का सम्मान रखना

अपने वचन के निर्वाह हेतु सच्चाई व अनुशासन की आवश्यकता होती है जो हम प्रकृति से सीख सकते हैं।

“लेफ्टिनेंट”, मेजर ने चेतावनी दी, “आप पुनः वहाँ नहीं जा रहे।” “श्रीमान, कृपया मुझे क्षमा करें,” लेफ्टिनेंट ने कहा, “मुझे जाना ही होगा।” “आप मेरी आज्ञा का उल्लंघन कर रहे हैं। और, इसके साथ ही, वह तो अब तक मृत होगा!” “मुझे क्षमा करें श्रीमान, किन्तु अपने मित्र को बचाने मुझे वहाँ पुनः जाना ही होगा।” अनुश्रुति है कि यह एक वास्तविक घटना है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की एक टुकड़ी शत्रु पक्ष के क्षेत्र में, गोलीबारी के बीच फंस गई। एक सैनिक को छोड़, जो संघातिक रूप…read more

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