ॐ स्वामी

दयालुता का विपरीत

क्या आपने कभी विचार किया है कि दयालुता का विपरीत क्या है? क्या यह निर्दयी होना है या कुछ और?

आपके अनुसार दयालुता का विपरीत क्या है? क्या यह दूसरे व्यक्ति को हानि पहुँचाना है? मेरे विचार से ऐसा नहीं है। आप पूछेंगे फिर यह क्या है? दो वर्ष पूर्व मैं सुवि के साथ उनकी गाड़ी में एक व्यस्त बाजार से होकर यात्रा कर रहा था। मैं सुवि को लगभग दो दशकों से भी अधिक समय से जानता हूँ। मेरे प्रति उनका प्रेम एवं उनकी निष्ठा अभी भी मुझे विस्मित कर देती है। जून का महीना था और कड़ाके की सर्दी थी। हमारी गाड़ी में हीटर अपनी अधिकतम गति पर…read more

नेक बनना

यह सहज नहीं है, परंतु भलाई के बिना आत्म-अनुभूति संभव नहीं है।

वैसे सोचा जाए तो यह एक दार्शनिक प्रश्न है, परंतु इस प्रकार के अधिकांश प्रश्नों का हमारे जीवन पर अवश्य प्रभाव होता है। अधिक लाभदायक क्या है- एक निरंतर भौतिक अनुसरण या आंतरिक शांति का पथ? जबकि वे पारस्परिक रूप से अनन्य नहीं हैं फिर भी हमें किसी एक को प्राथमिकता देने की आवश्यकता होती है। मेरा तात्पर्य है, क्या हमें सफल होने पर ध्यान देना चाहिए, भले ही इसका अर्थ निर्दयी होना और अपने रिश्तों का त्याग करना हो (आशा है कि हमारे नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों का बलिदान…read more

एक हज़ार कंचे

प्रस्तुत है एक सुंदर कथा जो हमें यह स्मरण कराती है कि वास्तव में जीवन में क्या महत्वपूर्ण है।

हम एक ऐसी कहानी से प्रारंभ करते हैं जो मैंने कुछ वर्षों पूर्व पढ़ी थी और मन ही मन एक दिन उसे कहीं उपयोग करने का निश्चय किया था। इसे आपके साथ साझा करने के लिए शनिवार की सुबह से अच्छा अवसर क्या हो सकता है। प्रस्तुत है (यथासंभव कथा वैसी कि वैसी है, इसका स्रोत अज्ञात है) – मैं जैसे जैसे वृद्ध हो रहा हूँ, उतना ही मैं शनिवार सुबह का आनंद लेने लगा हूँ। संभवतः यह एकांत की वह शांति है जो प्रातः सर्वप्रथम उठने से आती है…read more

अतिरिक्त सामान

आध्यात्मिक प्रगति हेतु हमें स्वयं के मार्ग में रुकावट बनने से बचना होगा, अन्यथा भावनाओं के शिलाखंड बार बार लुड़क कर वापिस आते रहेंगे।


एक छोटी लड़की थी जिसके बालों में नन्हा सा घूँघर था ठीक उसके माथे के बीच में; और जब वह अच्छी होती तब वह बहुत अच्छी होती, और जब वह बुरी होती तब वह वीभत्स होती। ~ एच डब्ल्यू लोंगफेलो हम सभी में अपनी विशिष्टताएं हैं। यह वे वस्तुएं हैं जो हमें घड़ी के समान चलायमान बनातीं हैं या असंतुष्ट करतीं हैं। न जाने कैसे, हमारी मनोदशा परिवर्तित हो जाती है और नकारात्मक विचार हमारी बुद्धि में उसी प्रकार उन्मत्त होने लगते हैं जिस प्रकार किसी केले के खेत में…read more

जीवन की वर्णमाला

क्या इस जीवन के दुखों से बाहर निकलने का कोई मार्ग नहीं है?

हाल ही में मेरे पिताजी ने मुझसे कहा, “जीवन ने मुझे यह सिखाया है स्वामीजी कि हर मनुष्य को अकेले ही अपनी जीवन यात्रा से होकर जाना पड़ता है।” वे थोड़े अशांत व उद्विग्न थे, क्योंकि कुछ दिन पूर्व वे एक छलपूर्ण फोन कॉल का शिकार हो गए थे। फोन पर एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनका बैंक कार्ड अवरुद्ध हो गया है। कई चरणों के माध्यम से कॉलर उनसे सही विवरण निकालने में सफल हो गया और उनके बैंक खाते की जानकारी प्राप्त कर ली। और दो मिनट…read more