ॐ स्वामी

दो विभिन्न प्रकार की नीतियाँ

दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने लिए चाहते हैं। यह महत्त्वपूर्ण है कि दूसरों के लिए भी वही नियम हों जो आपके अपने लिए हैं।

मुल्ला नसरूद्दीन अपने पड़ोसी के द्वार पर दस्तक देता है। वह द्वार खोलता है, नसरूद्दीन का अभिवादन कर उसे बैठने को कहता है। मुल्ला कहता है, “मुझे आपको कुछ बताना है। आप को सुन कर अच्छा नहीं लगेगा किन्तु सत्य को स्वीकार करना ही पड़ता है।” पड़ोसी चिंतित स्वर में पूछता है, “क्या बात है?” “तुम्हारे बैल ने मेरी गाय पर प्रहार कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया है। यदि उसका अभी, इसी क्षण, उपचार न हुआ तो वह मर भी सकती है।” नसरुद्दीन कहता है। “मुझे लगता है…और पढ़ें

ॐ स्वामी का मार्ग

प्रस्तुत है अपने चारों ओर की अफवाहों, गप्पबाजी एवं आलोचना से कैसे निपटा जाये – इस पर मेरा दृष्टिकोण।

हाल ही में मुझे उन सब लोगों से, जो मेरे लिए चिंतित हैं, ढेरों ई-मेल प्राप्त हुए। उनमें से कुछ दुखी थे, कुछ हैरान-परेशान थे व कुछ तो अत्यधिक क्रोध में थे (मुझ पर नहीं)। कारण? अपने उस प्रिय व्यक्ति को ले कर सुनी कुछ बेबुनियाद अफवाहें, जिसे वे अतिशय प्रेम करते हैं व अपना पथ-प्रदर्शक मानते हैं – ओम स्वामी; इस संदर्भ में वह मैं ही हूँ। वे गप्पबाजों को पलट कर जवाब देना चाहते थे। इसने मुझे बुद्ध के जीवन की एक कहानी स्मरण करवा दी। ऐसा कहा…और पढ़ें

एक हज़ार दर्पणों वाला कक्ष

प्रस्तुत है एक सुन्दर कथा, जिसमें दृष्टान्त दिया गया है कि किस प्रकार हम अपना संसार रचते हैं एवं विशिष्ट प्रकार के व्यक्तियों को आकृष्ट करते हैं।

चीन के एक विशेष शाओलिन देवगृह में एक अनूठा कक्ष है। उसकी दीवारों व छतों में एक हज़ार दर्पण जड़े हुए हैं। बहुत से भिक्षुक यहाँ प्रशिक्षण लेते हैं और स्वयं को हज़ारों कोनों से दर्पण में निहारकर अपनी गति-विधि में असाधारण परिशुद्धता प्राप्त करते हैं। एक समय चोरी छिपे वहाँ एक कुत्ता आ गया। स्वयं को एक हज़ार कुत्तों से घिरा देखकर वह असुरक्षित, आतंकित हो गया। उसने अपने दांत दिखाए, गुर्राया और दूसरे कुत्तों को भगाने के लिये भौंका। निस्संदेह एक हज़ार कुत्ते उस पर गुर्राए और भौंके।…और पढ़ें

84 वीं समस्या

प्रस्तुत है एक सुंदर दृष्टांत, जो दर्शा रहा है की बिना एक भी समस्या के जीवन की कितनी संभावना बनती है।

एक बार एक सम्पन्न किसान, अति आशान्वित हो, बुद्ध के पास पहुंचा। उसने महात्मा के सम्मुख साष्टांग प्रणाम किया व उनके आशीर्वाद की आकांशा की। बुद्ध ने हाथ उठा कर उसे आशीर्वाद दिया। “हे परम पूजनीय!”, किसान बोला, “मैं एक घोर विपदा में फंसा हूँ और मैं जानता हूँ कि केवल आप ही मेरी सहायता कर सकते हैं।” बुद्ध शांत रहे और वह व्यक्ति बताने लगा कि उसका आवारा पुत्र उसे परेशान कर रहा है और, यह भी कि उसे अपनी पत्नी पर अत्यंत क्रोध आ रहा है क्योंकि वह…और पढ़ें

नकारात्मक विचारों व भावनाओं से ऊपर उठना

जैसे एक कमल सदा कीचड़ व जल से ऊपर रहता है, आप नकारात्मक विचारों व भावनाओं से ऊपर रह सकते हैं।

बहुत से लोगों द्वारा बहुधा एक बात मुझसे पूछी जाती है कि – वर्तमान क्षण में कैसे रहा जाये? जिज्ञासु मुझे बताते हैं कि वे अपना ध्यान नकारात्मक विचारों व भावनाओं से परे हटाना चाहते हैं, किन्तु वे सदा ऐसा कर नहीं पाते। और तो और, बहुधा ऐसी नकारात्मकता अथवा भटकन उन पर हावी होकर उनके शांत अन्तःकरण में उथल पुथल मचा देती है। गत लेख में मैंने यह बात की थी कि किस प्रकार अपने को नापसंद वस्तु का चिंतन आपके जीवन में उस नापसंद वस्तु को आकर्षित कर…और पढ़ें

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