ॐ स्वामी

ध्यान में बेचैनी

एक बेचैन मन की तुलना बंदर से की जा सकती है, हर समय इधर-उधर कूदता-फँदता व क्रियाशील। इसे नियंत्रित करने का उपाय है – सजगता।

यह लेख व आने वाले तीन लेख, उचित रीति से ध्यान करने में सफल होने के लिए आपकी कुंजी हैं। मैं आपके साथ ध्यान की सामान्य चार त्रुटियों की चर्चा करने जा रहा हूँ। इन चार व्यवधानों एवं इन्हें त्रुटिरहित बनाने के उपयुक्त उपायों की अनिवार्यता के बारे में मैं जितना कहूँ उतना कम होगा। यदि आप वास्तव में एक उत्तम ध्यानयोगी बनने के इच्छुक हैं तो कृपया इन तथ्यों को भली भांति समझने व पूर्ण रूप से आत्मसात करने में जितना भी समय लगे, लगाएँ। अपने पिछले लेख में…और पढ़ें

उद्देश्य की शुद्धता

जब आपका ध्यान एक वस्तु पर केंद्रित हो और आपका उद्देश्य शुद्ध हो, तो सफलता के सुगंधित पुष्प सहजतः ही खिल उठेंगे।

कृपया मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपने व्यापार में सफल हो सकूं। मैं बहुत सारा धन अर्जित करना चाहता हूँ, परंतु अपने लिये नहीं। मैं दूसरे व्यक्तियों की मदद करने हेतु धन अर्जन करना चाहता हूँ। क्या आपने लोगों को यह कहते सुना है – कि उनके व्यापार करने का या धन कमाने का एकमात्र कारण, या मुख्य कारण यह है कि वे उससे दूसरों की मदद कर सकें? मैंने सुना है। कईं बार। यह बात मुझे हास्यजनक लगती है, क्योंकि स्थायी व्यापार दूसरों की मदद करने के इरादे से…और पढ़ें

दस प्रमुख प्राणाधार ऊर्जाएँ

दस प्राणाधार ऊर्जाओं को उपयुक्त शारीरिक मुद्रा, श्वासों के नियमन अथवा चक्रों पर ध्यान द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

अपने विभिन्न लेखों में व अन्य स्थानों पर मैंने दस प्राणाधार ऊर्जाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया था। आज मैं आपके साथ, आपके शरीर में इन ऊर्जाओं का योगिक पक्ष साझा कर रहा हूँ। यह दस प्राणाधार ऊर्जाएँ शरीर की सभी स्वैच्छिक व अनैच्छिक गतिविधियों, प्रतिक्रियाओं, व आदतों को नियंत्रित करती हैं। और, बदले में, इन ऊर्जाओं पर आसन सिद्धि, योगिक मुद्रा के पूर्ण स्वामित्व, श्वासों के नियमन, व एकाग्रतापूर्ण ध्यान द्वारा नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए संस्कृत शब्द है – वायु, जिसका अर्थ है अस्थिर, सूक्ष्म…और पढ़ें

भय का प्रतिकारक

जब भय का तूफान अपने ऊफान पर हो, उस समय शांत व सकारात्मक बने रहने का मार्ग होता है। वह इस प्रकार है...

हम सभी में भय विद्यमान रहते हैं। भविष्य में क्या घट सकता है इस बात का भय; अलमारी में बंद कंकालों का भय; दूसरों व स्वयं के विफल होने का भय। हम भयभीत रहते हैं कि क्या होगा यदि हमारे सबसे भयानक डर सच्च साबित हो गए तो! हमारी अधिकांश चिंताएँ ऐसे ही भय से उत्पन्न होती हैं। हम अपनी सहायता स्वयं करने हेतु पुस्तकें पढ़ते हैं जो हमें बताती हैं “चिंता न करें” अथवा “सकारात्मक रहें”। किन्तु, यह सब अधिकांश समय काम नहीं आता, हर समय तो बिलकुल नहीं।…और पढ़ें

प्रेम और घृणा

प्रेम दैवी है। प्रत्येक मनुष्य में यह अंतर्निहित है, जबकि दूसरी ओर, घृणा हम सीखते हैं।

मुझे हर प्रकार के ई-मेल मिलते हैं। ये स्वयं सेवकों की एक टीम के द्वारा चिह्नित और दर्ज किये जाते हैं। लगभग पचास प्रतिशत पाठक मुझसे, उनके जीवन के क्लेश, कष्टों पर सलाह मांगते हैं। तीस प्रतिशत मुझसे अपनी कृतज्ञता एवं प्रेम व्यक्त करते हैं। कुछ दस प्रतिशत अपने दार्शनिक विचार व्यक्त करते हैं। एक प्रतिशत (या कुछ कम) ई-मेल में मुझसे पूछा जाता है कि वे मेरी या मेरे उद्देश्य की किस प्रकार मदद कर सकते हैं। शेष नौ प्रतिशत मात्र अपनी घृणा व्यक्त करने के लिये ई-मेल लिखते…और पढ़ें

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