ॐ स्वामी

अभिभावकीय करुणा

यदि आप आवश्यकता से अधिक संरक्षात्मक होने जा रहे हैं तो उन्हें स्वावलंबी होने में अत्याधिक समय लगेगा – भावनात्मक स्तर पर भी और अन्य प्रकार से भी।

“मैं सदा से एक अच्छा अभिभावक रहा हूँ और मैंने अपने बच्चों का हर कदम पर साथ दिया है,” एक, कुछ व्यथित से, अभिभावक ने मुझे कुछ सप्ताह पूर्व कहा, “और, फिर भी वे वास्तव में मेरा आदर नहीं करते। वे अपने अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं और मुझे कहते हैं कि मैं सदा से एक असहनीय पिता रहा हूँ। मुझे यह समझ नहीं आता। मैंने सदा उन्हें प्रेम किया है, उन्हें उनकी इच्छानुसार हर कार्य करने की छूट दी है। उन्हें सबसे बढ़िया कपड़े मिले,…और पढ़ें

जीवन यात्रा

एक दार्शनिक कविता से प्रेरित होकर चिर-प्रसन्नता के मूल पर प्रस्तुत हैं मेरे विचार…

एक दिन संयोगवश मैंने कोरी मुलर की वेबसाइट (यहाँ) पर एक सुंदर कविता की व्याख्या पढ़ी। हालाँकि उसका शीर्षक “दो भाई” था किंतु उसे सरलता से “मनुष्य के अस्तित्व का सत्य” कहा जा सकता है। मुझे उस कविता में इतनी गहराई लगी कि एक पल के लिये मैंने आज के पोस्ट में केवल उस कविता को ही साझा करने का विचार किया। बिना किसी टिप्पणी या मेरे अपने विचारों के। प्रस्तुत है वह कविता – एक पुराने पेड़ के नीचे दो पुत्र पैदा हुए प्यार से स्वतंत्रता से दोनों साथ-…और पढ़ें

एकाग्रतापूर्ण ध्यान का अभ्यास

एकाग्रतापूर्ण ध्यान एक विचार पर केन्द्रित रहने की कला है। यह मन को प्रायः उसी क्षण शांत कर देता है।

गत लेख में मैंने दो प्रकार के ध्यान पर चर्चा की थी। आज मैं “एकाग्रतापूर्ण ध्यान” पर विस्तृत चर्चा करूंगा। एकाग्रतापूर्ण ध्यान एक विचार पर केन्द्रित रहने की कला है। यह चिंतनशील ध्यान से मूलतः इस बिन्दु पर भिन्न है कि इस ध्यान के दौरान किसी प्रकार का बौद्धिक परीक्षण नहीं किया जाता। यह मुख्यतः आपको अपना मन स्थिर करने व शारीरिक स्थिरता पाने में सहायतार्थ रचा गया है। एक तरह से एकाग्रतापूर्ण ध्यान, सम्पूर्ण ध्यान की ओर बढ़ने का प्रथम स्तरीय अभ्यास है। जैसे जैसे आप इस अभ्यास में…और पढ़ें

दो प्रकार के ध्यान

वह, जो एक वास्तविकता का बोध कर लेता है, वह हर वास्तविकता को जानता है – वह पूजनीय है।

ध्यान मुख्यतः दो प्रकार का होता है। एक होता है एकाग्रतापूर्ण ध्यान, जिसे अचल एकाग्रता भी कहा जाता है; व दूसरा होता है चिंतनशील ध्यान जिसे विश्लेषणात्मक अनुसंधान भी कहा जाता है। एक उत्तम साधक दोनों प्रकार के ध्यान में निपुण होता है। एक साधक के ध्यान की उत्तमता का पैमाना है कि वह केवल एक ही विचार पर पूर्ण रूप से उतने लंबे समय तक स्थिर रह पाये जितने समय तक उसकी इच्छा हो। एक अति आवश्यक सूत्र जो सदा स्मरण रखने योग्य है, वह यह है कि ध्यान…और पढ़ें

संसार

प्रस्तुत है पटाचारा की दंतकथा जिसमें गहन अंतर्दृष्टि के साथ एक महान संदेश भी है - वास्तविक सत्य।

एक दिन मैंने “द हिडेन लैम्पस” में “एना प्रजना डॅगलस” के शब्दों में पटाचारा की कथा पढ़ी। प्रस्तुत है (आंशिक अनुवाद के पश्चात) – कुछ २५०० वर्ष पहले भारतवर्ष के एक धनी परिवार में पटाचारा का जन्म हुआ पर अंततः वह अपने सामानवाही नौकर से विवाह करने के लिये घर से भाग गयी। जब वह अपने दूसरे पुत्र को जन्म देने वाली थी, तभी उसके साथ एक त्रासदी हो गई। एक ही दिन में उसने अपना सम्पूर्ण परिवार खो दिया। कहा जाता है कि उसके पति को विषैले सर्प ने…और पढ़ें

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