ॐ स्वामी

विचार – ध्यान प्रक्रिया में तीसरा व्यवधान

अवांछित विचारों की ऊंची लहरें शांत मन रूपी नाव को हिला डुला कर आपके ध्यान में रुकावट डाल सकती हैं।

उचित रीति से ध्यान करने की प्रक्रिया में चार प्रमुख व्यवधान हैं। ध्यान में सुस्पष्ट परिणाम पाने के लिए इनके प्रति सावधानी परम आवश्यक है। विगत लेखों में मैंने बेचैनी व आलस्य – इन दो व्यवधानों की विस्तार से विवेचना की। आज मैं तीसरे व्यवधान पर प्रकाश डालने जा रहा हूँ, वह है – अवांछित विचार। ध्यान द्वारा आप मात्र एक विचार पर अपने को एकाग्र करने की क्षमता विकसित करते हैं; स्वयं द्वारा चयनित एक विचार पर एकाग्रता; कालांतर में उस एक विचार के साथ सम्पूर्ण तादात्मय स्थापित कर,…और पढ़ें

जीवन-सरिता

जब आप जीवन के प्रवाह के साथ बहना सीख जाते हैं, तब वह एक सुंदर और आनंदमय यात्रा बन जाता है।

एक दिन माँ शमता ॐ (जो मेरी प्रधान शिष्या और एक अत्यंत गरिमापूर्ण एवं सुंदर मनुष्य हैं) ने अपने सामान्य सरल विधि से कुछ गहन अर्थपूर्ण बात कही। “स्वामी” उन्होंने कहा, “यदि सोचा जाए तो मनुष्य का जीवन कितना सुंदर और सरल है। प्रतिदिन उठें, अच्छे कर्म करें, पेट-भर भोजन खाएं, दूसरों की सहायता करें, मानवता की सेवा करें और थोड़ा आराम करें। यही पर्याप्त है। परंतु किसी कारणवश अधिकतर मनुष्यों ने इसे बहुत अधिक सोच और चिंताओं के कारण बहुत जटिल बना दिया है।” इन शब्दों के संदेश के…और पढ़ें

ध्यान में सुस्ती

यान में गजराज को सुस्ती का द्योतक माना जाता है। एक कुशल साधक स्वीकृति व सतर्कता द्वारा इसे वश में करता है।

विगत लेख में मैंने ध्यान के समय होने वाली बेचैनी के विषय पर चर्चा की, जो उचित ध्यान प्रक्रिया में सर्वप्रथम व्यवधान है। जैसे कि पहले भी चर्चा हो चुकी है कि मुख्य रूप से चार ऐसी त्रुटियाँ हैं जो साधक के सिद्ध बनने के मार्ग में रुकावट हैं; जो साधक को अपने परम चेतन, परम सत्य स्वरूप के अनुभव से रोके रखती हैं। तथापि, यदि साधक अपने मार्ग पर सुदृढ़ रहता है व इन व्यवधानों के निराकरण में निरंतर कार्यरत रहता है, तब, ऐसा साधक उस दिव्यता, उस परमानंद…और पढ़ें

ध्यान में बेचैनी

एक बेचैन मन की तुलना बंदर से की जा सकती है, हर समय इधर-उधर कूदता-फँदता व क्रियाशील। इसे नियंत्रित करने का उपाय है – सजगता।

यह लेख व आने वाले तीन लेख, उचित रीति से ध्यान करने में सफल होने के लिए आपकी कुंजी हैं। मैं आपके साथ ध्यान की सामान्य चार त्रुटियों की चर्चा करने जा रहा हूँ। इन चार व्यवधानों एवं इन्हें त्रुटिरहित बनाने के उपयुक्त उपायों की अनिवार्यता के बारे में मैं जितना कहूँ उतना कम होगा। यदि आप वास्तव में एक उत्तम ध्यानयोगी बनने के इच्छुक हैं तो कृपया इन तथ्यों को भली भांति समझने व पूर्ण रूप से आत्मसात करने में जितना भी समय लगे, लगाएँ। अपने पिछले लेख में…और पढ़ें

उद्देश्य की शुद्धता

जब आपका ध्यान एक वस्तु पर केंद्रित हो और आपका उद्देश्य शुद्ध हो, तो सफलता के सुगंधित पुष्प सहजतः ही खिल उठेंगे।

कृपया मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपने व्यापार में सफल हो सकूं। मैं बहुत सारा धन अर्जित करना चाहता हूँ, परंतु अपने लिये नहीं। मैं दूसरे व्यक्तियों की मदद करने हेतु धन अर्जन करना चाहता हूँ। क्या आपने लोगों को यह कहते सुना है – कि उनके व्यापार करने का या धन कमाने का एकमात्र कारण, या मुख्य कारण यह है कि वे उससे दूसरों की मदद कर सकें? मैंने सुना है। कईं बार। यह बात मुझे हास्यजनक लगती है, क्योंकि स्थायी व्यापार दूसरों की मदद करने के इरादे से…और पढ़ें

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