ॐ स्वामी

शून्यता की भावना

शून्यता की भावना का संबंध आपकी पहुँच में जो कुछ भी है, उससे नहीं है। यह आपके आनंद के केंद्र से संबंधित है।

शून्यता एक वास्तविक भावना है। यह कोई विकृति नहीं है। यह मात्र अकेलापन, उदासी, भ्रम या वियोग नहीं है, परंतु इन सभी का मिश्रण है। कभी न कभी हममें से प्रत्येक को दर्दनाक शून्यता के एक चरण का अनुभव होता है। एक दिन मैंने एक सुंदर अज्ञातकृत उद्धरण पढ़ा। मुझे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे मेरे जीवन में सब कुछ ठीक है। मैं लोगों के चुटकुलों पर हंसता हूँ। अपने मित्रों के साथ हास्यप्रद बातें करता हूँ जैसे कि मेरा जीवन चिंतामुक्त है। परंतु यह विचित्र है कि…read more

भावनात्मक रूपान्तरण

जिस प्रकार बहते हुए जल द्वारा तलछटी निर्मित हो जाती है, उसी प्रकार अपरित्यक्त विचार मानसिक छाप बन जाते हैं; वे भावनाओं को जन्म देते हैं।

गत कुछ महीनों में हमने आत्म-परिवर्तन के मार्ग पर, मानसिक परिष्कार के मुख्य सूत्रों की विवेचना की। अब मैं आपके लिए भावनात्मक रूपान्तरण का उल्लेख करूंगा। आने वाले आठ से दस सप्ताह में मेरा इस श्रंखला को सम्पूर्ण करने का लक्ष्य रहेगा। यद्यपि मैं अपनी व्याख्या का प्रारम्भ आज से कर रहा हूँ, तथापि, भावनाओं के विषय पर मैं पहले भी बहुत कुछ लिख चुका हूँ। मुख्यतः सकारात्मक व नकारात्मक भावनाओं पर, सकारात्मक रहने पर, प्रेम पर, एवं नकारात्मक भावनाओं पर विजय पाने को ले कर। यदि आपने वह लेख…read more

जीवन के चार सत्य

मानव अस्तित्व के चार सत्यों पर प्रस्तुत है मेरा संस्करण

“मेरी ईश्वर से मात्र एक इच्छा है”, एक नवयुवती ने मुझसे कहा, “क्षमा। क्षमा के अतिरिक्त मेरी कोई अभिलाषा नहीं।” “मेरे पिता एच-आई-वी पॉजिटिव थे और उनके अंतिम दिन अत्यंत दुखदायी थे।” उस नवयुवती ने आगे सुनाया “वे हिल भी नहीं सकते थे और उन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी। मुझे उनसे इतनी घृणा हो गयी थी कि मैंने उनकी पूर्णतया उपेक्षा की। मेरी माँ परिवार के लिये रोटी कमाने वालीं अकेली सदस्य थीं और वे सारा समय घर पर नहीं रह सकती थीं। मैं अपने पिता की देखभाल कर…read more

एक मिलियन विचार

“अ मिलियन थोट्स”, यह मेरी ध्यान पर सर्वोत्तम विस्तृत पुस्तक-रचना है। ध्यान पर आपकी अ से ह तक की पथप्रदर्शिका।

यह फरवरी २०११ के अंत का समय था। १०,००० फुट की ऊंचाई पर, हिमालय के एक वन में, जहां उस छप्पर की कुटिया के बाहर बर्फ के हिमलम्ब लटक रहे थे, मैं गहन ध्यानावस्था में बैठा था। तन और मन दोनों की सुदृढ़ स्थिरता में बैठे १० घंटे इतनी सुगमता से व्यतीत हो चुके थे जिस प्रकार रात्रि भोर में रूपांतरित होती है। पूर्ण चंद्रमा की शीतल किरणें मेरे सम्मुख रखे श्री यंत्र पर उतर आईं। यह यंत्र कुंडलिनी अथवा माँ जगजननी का ज्योमितिकीय द्योतक था एवं मेरे उस समय…read more

उद्देश्य की शुद्धता

जब आपका ध्यान एक वस्तु पर केंद्रित हो और आपका उद्देश्य शुद्ध हो, तो सफलता के सुगंधित पुष्प सहजतः ही खिल उठेंगे।

कृपया मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपने व्यापार में सफल हो सकूं। मैं बहुत सारा धन अर्जित करना चाहता हूँ, परंतु अपने लिये नहीं। मैं दूसरे व्यक्तियों की मदद करने हेतु धन अर्जन करना चाहता हूँ। क्या आपने लोगों को यह कहते सुना है – कि उनके व्यापार करने का या धन कमाने का एकमात्र कारण, या मुख्य कारण यह है कि वे उससे दूसरों की मदद कर सकें? मैंने सुना है। कईं बार। यह बात मुझे हास्यजनक लगती है, क्योंकि स्थायी व्यापार दूसरों की मदद करने के इरादे से…read more

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