ॐ स्वामी

वह पात्र जो कभी नहीं भरता

यहाँ एक सुंदर कहानी दी जा रही है जो आपको सोचने के लिए विवश करेगी

अघोरी ने कहा “हे महाराज ! मैं बड़ी  ही आशा से आया हूँ क्या आप  मेरी इच्छा पूर्ण करेंगे?” राजा ने उत्तर दिया कहिए आपको क्या चाहिए? मेरे पास दान के लिए बहुत कुछ है। “ मुझे बस यह प्याला भरना है।”अघोरी ने अपना प्याला आगे बढ़ाया। “ बस इतना ही? यह तो मेरे सामाजिक कार्य संबंधी मंत्री ही कर देंगे। क्या आप मेरा  मज़ाक़ बना रहे हैं? बस भिक्षा का कमंडल! मैं बहुत अपमानित अनुभव कर रहा  हूँ।” राजा भद्रघोष ने उपरोक्त बातें कहीं, क्योंकि लोक कल्याण के कार्यों …read more

कष्ट के उपहार

यहाँ एक सुंदर कहानी दी जा रही है जो यह दर्शाती है कि जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना हम कैसे करें।

एक प्रसिद्ध जेन सन्यासी बीते वर्ष के विदाई हेतु आयोजित भोज में गए इसका आयोजन एक श्रेष्ठ धनी व्यक्ति ने किया था। यहाँ पर आने वाला शहर का प्रत्येक व्यक्ति जो एक दूसरे से मिल रहा था समारोह को एक अद्भुत रंग प्रदान कर रहा था, जो एक सामान्य अवलोकन करने वाले को आश्चर्य चकित कर देता था। शानदार जापानी नर्तकियाँ, महँगी शराब, सुगंध के झोंके सारे हाल को आपूरित कर रहे थे। और स्वादिष्ट भोजन की सुगंध इंद्रियों को मदमस्त कर रही थी। एक उच्च कुलीन व्यक्ति जेन सन्यासी…read more

एक प्रतिभावान का निर्माण करना

क्या यह सम्भव है कि किसी बच्चे को प्रतिभावान बनाया जा सकता है या एक प्रकृति के द्वारा प्रतिभावान जन्म लेते हैं? यहाँ एक मनोहर किंतु सच्ची कहानी दी जा रही है।

सन १९७३ की बात है सूज़न जो कि ४ वर्ष की थी, ने  अपने अतिथि गृह की आलमारी को खोला तो एक छोटे से थैले  से अनेक शतरंज के मोहरे  गिर पड़े ,और  उसके ठीक सामने शतरंज की बिसात लिपटी हुई पड़ी हुई थी।उसने उनको बाहर निकाला और शतरंज के  मोहरों को भ्रमित होकर उसी प्रकार देखा जैसे कि उसकी आयु के बच्चे को देखना चाहिए। सूज़न ने एक मोहरे  को हाथ में लेकर परीक्षण करते हुए भोले पन से पूछा  माँ यह क्या है ? जसूजसा  की माँ ने…read more

अंतर्संयोजनात्मक्ता का ब्रह्मांडीय सिद्धांत

हमारा व्यक्तिगत अस्तित्व इस शरीर के साथ जीवन भर के लिए ही मात्र सीमित नहीं है ….हम अपने भीतर अनंत सुंदरता के असीम लोक को लेकर चलते हैं।

एक दिन चीनी सन्यासी फ़ज़ंग (फ-त्सांग ) महारानी वू ( ६२४-७०५ सी ई) के राज दरबार में अवतामसक सूत्र  पर  प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने समझाया कि एक ब्रह्मांड जिसमें चेतना के अनेक आयामों  के साथ, अस्तित्व के अनेक लोक हैं वे मात्र अंतरसंयोजित ही नहीं बल्कि वे परस्पर समाविष्ट भी हैं।महारानी ने कहा मैं इसे समझी पर इसे ग्रहण नहीं कर  पायी।मैं अंतरसंयोजन को समझ गयी किंतु  दो चीज़ें एक दूसरे को कैसे समाविष्ट  कर  सकती  हैं? यह अच्छी तरह ज्ञात है कि अंतरसंयोजन का सिद्धांत न केवल  मौलिक…read more

प्रसन्नता के लिए छोटा मार्ग

क्या प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग या द्रुत मार्ग है। यहाँ एक सुंदर कथा है जो आपको सोचने के लिए विवश करेगी।

जब मैं बेंगलोर में  लिट फ़ेस्ट में बोल रहा था तो नारायणी गणेश ने मुझसे पूछा कि क्या प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग है? ओह! मैने कहा “ तुम्हारा अर्थ है कि प्रसन्नता के लिए जुगाड़ ? वह और अन्य श्रोता मेरे साथ धीरे धीरे  हंस दिए । जुगाड़ का अर्थ है कुछ अनूठा हल खोज लेना,  किसी समस्या के लिए कुछ नवीन हल खोजना, किसी समस्या के हल के लिए  ऐसा कार्य करना जिसकी अनुपस्थिति में शायद उसके लिए बहुत अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती ।आक्सफ़ोर्ड  इंग्लिश शब्दकोश…read more