ॐ स्वामी

अतिरिक्त सामान

आध्यात्मिक प्रगति हेतु हमें स्वयं के मार्ग में रुकावट बनने से बचना होगा, अन्यथा भावनाओं के शिलाखंड बार बार लुड़क कर वापिस आते रहेंगे।


एक छोटी लड़की थी जिसके बालों में नन्हा सा घूँघर था ठीक उसके माथे के बीच में; और जब वह अच्छी होती तब वह बहुत अच्छी होती, और जब वह बुरी होती तब वह वीभत्स होती। ~ एच डब्ल्यू लोंगफेलो हम सभी में अपनी विशिष्टताएं हैं। यह वे वस्तुएं हैं जो हमें घड़ी के समान चलायमान बनातीं हैं या असंतुष्ट करतीं हैं। न जाने कैसे, हमारी मनोदशा परिवर्तित हो जाती है और नकारात्मक विचार हमारी बुद्धि में उसी प्रकार उन्मत्त होने लगते हैं जिस प्रकार किसी केले के खेत में…read more

जीवन की वर्णमाला

क्या इस जीवन के दुखों से बाहर निकलने का कोई मार्ग नहीं है?

हाल ही में मेरे पिताजी ने मुझसे कहा, “जीवन ने मुझे यह सिखाया है स्वामीजी कि हर मनुष्य को अकेले ही अपनी जीवन यात्रा से होकर जाना पड़ता है।” वे थोड़े अशांत व उद्विग्न थे, क्योंकि कुछ दिन पूर्व वे एक छलपूर्ण फोन कॉल का शिकार हो गए थे। फोन पर एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनका बैंक कार्ड अवरुद्ध हो गया है। कई चरणों के माध्यम से कॉलर उनसे सही विवरण निकालने में सफल हो गया और उनके बैंक खाते की जानकारी प्राप्त कर ली। और दो मिनट…read more

प्रबोधन

क्या प्रबोधन का यह अर्थ है कि आप सदैव परम आनंद का अनुभव करेंगे?

“मुझे प्रबोधन की प्राप्ति कैसे हो?” किसी ने मुझसे एक दिन पूछा। “क्या आप मुझे कुछ गहन अनुभव नहीं प्रदान कर सकते? मैं अपने जीवन में आमूल परिवर्तन चाहता हूँ।” मुझसे बहुत से उत्साही जिज्ञासु बहुधा इस प्रकार के प्रश्न करते हैं। वे किसी राम-बाण की खोज में हैं, कोई रहस्मय सत्य जो उनकी सारी समस्याओं का समाधान कर देगा (आध्यात्मिक व सांसारिक)। जबकि कई व्यक्ति सततः व्यक्तिगत प्रयास का महत्त्व समझते हैं, अधिकतर व्यक्ति तुरंत समाधान की खोज में हैं। प्रस्तुत है आद्य शक्ति द्वारा रचित एक उद्धरण जो…read more

चिंतित मन से सचेत मन की ओर

एक पुष्प के खिलने से पूरे विश्व में वसंत ऋतु आ जाती है।

एक दिन, बुद्ध अपने भिक्षुओं के साथ शांति से बैठे थे कि एक व्यक्ति ने उन्हें संबोधित किया और कहा, “क्या आप मुझे कम से कम शब्दों में सर्वोत्तम ज्ञान प्रदान कर सकते हैं?”। बुद्ध ने उस व्यक्ति को और उसके प्रश्न को मान्यता दी और मौन रहते हुए मुस्कुराए। कुछ मिनटों तक प्रतीक्षा करने के बाद, वह व्यक्ति बुद्ध के सामने झुका और बोला, “बहुत बहुत धन्यवाद। मुझे आपका संदेश मिल गया है। मैं अब आपकी अनुमति लेता हूँ।” शारिपुत्र, जो सर्वाधिक अवज्ञाकारी भिक्षुओं में से एक थे, जिन्होंने…read more

कॉटल्स्टन पाई

आप कैसे जानें कि स्वबोध हेतु आपको किस पथ का चयन करना है? क्या ध्यान ही एकमात्र मार्ग है?

“मैं ध्यान करना चाहता हूँ ”, किसी ने मुझसे एक दिन कहा। “किंतु यह मार्ग मेरे लिए नहीं है। क्या ध्यान आत्मबोध का एकमात्र मार्ग है?”। “ऐसा नहीं है।”, मैंने कहा। “किसी अन्य मार्ग से भी आप अवश्य स्वयं के सत्य का खोज कर सकते हैं।” “किंतु जब आप कहते हैं कि अपने सत्य की खोज स्वयं करो तो इसका क्या अर्थ है? और ऐसा कैसे किया जाए?” उसने मेरे विडियो प्रवचन से संबंधित एक आदर्श-वाक्य के विषय में पूछा। मुझे यह प्रश्न उचित लगा और मैं ऐसे कई व्यक्तियों…read more