ॐ स्वामी

सुंदर जीवन

क्या होता यदि मृत्यु न होती और हर कोई अमर होता? यदि जीवन अविनाशी होता तो क्या वह उत्तम होता?

आज जब मैं आश्रम के आगंतुकों से मिलकर अपने कमरे में वापस आया तो वर्षा तभी रुकी थी। हल्की बूंदाबांदी हो रही थी और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हम धुँधले बादलों के कोहरे में खड़े हैं। शीघ्र ही बूंदाबांदी भी समाप्त हो गयी। मुझे दूर चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी। सर्दियों के सूर्य ने बड़े मजाकिया ढंग से बादलों से झाँका और गर्म किरणों का एक कंबल मेरी अध्ययन करने वाली मेज पर फैल गया। चिड़ियों का चहचहाना और भी निकट महसूस हुआ। मैं उठा और…और पढ़ें

अपने पश्चाताप के भाव पीछे छोड़ते हुए….

समय-चक्र की अविराम गति में ही बसते हैं हमारे जीवन के सुंदर पल।

एक बार एक महिला, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता थी, वह लोगों को मदिरापान की बुरी लत से छुटकारा पाने में सहायता किया करती थी। उसका एक छोटा सा शहर था, और जब भी वह किसी को मदिरापान करते सुनती तो तत्काल अन्य लोगों के एक छोटे समूह को ले वहाँ पहुँच जाती, ताकि वह उस व्यक्ति से बातचीत कर मदिरा के भयावह परिणामों से अवगत करा सके। उस क्षेत्र में मदिरा पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हो गई, चूंकि कोई भी उस महिला का सामना नहीं करना चाहता था।…और पढ़ें

तीन टाँगों वाला हाथी

आप किसी वस्तु का विचार न करने का विचार करके उसका विचार त्याग नहीं सकते। मन उसी विचार से बंध जाएगा जिसे आप विचारों से हटाना चाहते हैं।

आत्म-परिष्कार के योग की व्याख्या में हमने मानसिक परिवर्तन के अंतर्गत अनेक प्रकार के अभ्यासों का वर्णन किया। संक्षेप में ये अभ्यास मौन, एकांत, त्याग, संकल्प-शक्ति, श्रवण, एकाग्रता व त्राटक से संबन्धित हैं। बहुत से व्यक्ति यह जानने हेतु मुझे संदेश भेजते हैं कि ध्यान करने की उचित विधि क्या है, एवं यह भी कि वे अपने अभ्यास काल में मन को वश में रख कर ध्यान नहीं कर पाते। इस समय हम उस बिन्दु पर पहुँच चुके हैं जब मैं ध्यान के अभ्यास पर विस्तार से चर्चा करूंगा। यदि…और पढ़ें

आत्म-मोह

क्या आप जानते हैं कि एक आत्म-मोहित व्यक्ति और एक गर्म हवा के गुब्बारे में क्या समानता है? प्रस्तुत हैं मेरे विचार…

कुछ सप्ताह पूर्व किसी ने मुझे यह ई-मेल लिखा मै आपसे पूछना चाहता हूँ कि एक आत्म-मोही साथी के साथ कैसे रहा जाए? उनसे आध्यात्मिक दृष्टि से कैसे व्यवहार किया जाए? आत्म-मोहित व्यक्ति ऐसे क्यों होते हैं? और आत्म-मोहित व्यक्ति का वास्तविक अर्थ क्या है? मेरे विचार से इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए एक दार्शनिक से अधिक एक मनोवैज्ञानिक श्रेष्ठतर रूप से प्रशिक्षित है। फिर भी मैं से इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करता हूँ। मैंने एक समय एक उक्ति पढ़ी थी “मेरे विषय में मेरे विचार…और पढ़ें

वू – वे : अच्छी चीजों को होने देना

ताओ की एक अति सुंदर धारणा है – वू–वे, जो दर्शाता है कि किस प्रकार यदा कदा पूर्णत: कार्य विमुख हो जाना ही सबसे उत्तम कार्य होता है। एवं, एक घोषणा …

युआन साम्राज्य काल में चीन के सम्राट स्वयं का एक चित्र बनवाने के इच्छुक थे। “मैं अपने आज तक बने किसी भी चित्र से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हूँ।” उनने चित्रकारों के एक बड़े समूह को संबोधित किया। “मेरा एक ऐसा चित्र बनाओ जिसमें मेरे सूक्ष्मतम हाव-भाव भी दर्शाये गए हों – मेरा प्रतिरूप।” सम्राट प्रतिदिन दो घंटे के लिए बैठते और अति कुशल चित्रकार उनका अवलोकन करते, व भिन्न भिन्न कोण लेकर चित्र चित्रांकित करते । पूर्ण समर्पण एवं सतर्कतापूर्वक वे सब अपने अपने कैनवस पर पेंसिल व…और पढ़ें

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