ॐ स्वामी

एक मिलियन विचार

“अ मिलियन थोट्स”, यह मेरी ध्यान पर सर्वोत्तम विस्तृत पुस्तक-रचना है। ध्यान पर आपकी अ से ह तक की पथप्रदर्शिका।

यह फरवरी २०११ के अंत का समय था। १०,००० फुट की ऊंचाई पर, हिमालय के एक वन में, जहां उस छप्पर की कुटिया के बाहर बर्फ के हिमलम्ब लटक रहे थे, मैं गहन ध्यानावस्था में बैठा था। तन और मन दोनों की सुदृढ़ स्थिरता में बैठे १० घंटे इतनी सुगमता से व्यतीत हो चुके थे जिस प्रकार रात्रि भोर में रूपांतरित होती है। पूर्ण चंद्रमा की शीतल किरणें मेरे सम्मुख रखे श्री यंत्र पर उतर आईं। यह यंत्र कुंडलिनी अथवा माँ जगजननी का ज्योमितिकीय द्योतक था एवं मेरे उस समय…read more

उद्देश्य की शुद्धता

जब आपका ध्यान एक वस्तु पर केंद्रित हो और आपका उद्देश्य शुद्ध हो, तो सफलता के सुगंधित पुष्प सहजतः ही खिल उठेंगे।

कृपया मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपने व्यापार में सफल हो सकूं। मैं बहुत सारा धन अर्जित करना चाहता हूँ, परंतु अपने लिये नहीं। मैं दूसरे व्यक्तियों की मदद करने हेतु धन अर्जन करना चाहता हूँ। क्या आपने लोगों को यह कहते सुना है – कि उनके व्यापार करने का या धन कमाने का एकमात्र कारण, या मुख्य कारण यह है कि वे उससे दूसरों की मदद कर सकें? मैंने सुना है। कईं बार। यह बात मुझे हास्यजनक लगती है, क्योंकि स्थायी व्यापार दूसरों की मदद करने के इरादे से…read more

कैसे आकृष्ट न करें

जीवन प्रतिकूलता एवं विरोधाभास से भरा है। प्रकाश और अंधकार, धूप और हिम-पात शांतिपूर्वक मिल जुल कर रहते हैं। ध्यान दें।

कुछ दिनों पहले किसी ने, जो किसी संगठन की सीढ़ी के सबसे निम्न सोपान पर था, मुझे बताया कि कार्यस्थल पर अन्य व्यक्तियों के साथ उसका दिन सर्वदा दुष्कर रहता है। “ऐसा प्रतीत होता है कि मैं सदैव अपने विरोधियों को आकर्षित करता हूँ।” उसने कहा “मुझे कोई पसंद नहीं करता।” “किंतु एक दिन” वह बोला “मैंने रेडियो पर कुछ सुंदर सुना! उसमें कहा गया था ‘नौकरी है तो नाराज़गी क्यों?’ इस एक बात ने मेरे सम्पूर्ण दृष्टिकोण को परिवर्तित कर दिया और फिर मैंने इस बात की परवाह करनी…read more

वू – वे : अच्छी चीजों को होने देना

ताओ की एक अति सुंदर धारणा है – वू–वे, जो दर्शाता है कि किस प्रकार यदा कदा पूर्णत: कार्य विमुख हो जाना ही सबसे उत्तम कार्य होता है। एवं, एक घोषणा …

युआन साम्राज्य काल में चीन के सम्राट स्वयं का एक चित्र बनवाने के इच्छुक थे। “मैं अपने आज तक बने किसी भी चित्र से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हूँ।” उनने चित्रकारों के एक बड़े समूह को संबोधित किया। “मेरा एक ऐसा चित्र बनाओ जिसमें मेरे सूक्ष्मतम हाव-भाव भी दर्शाये गए हों – मेरा प्रतिरूप।” सम्राट प्रतिदिन दो घंटे के लिए बैठते और अति कुशल चित्रकार उनका अवलोकन करते, व भिन्न भिन्न कोण लेकर चित्र चित्रांकित करते । पूर्ण समर्पण एवं सतर्कतापूर्वक वे सब अपने अपने कैनवस पर पेंसिल व…read more

ॐ स्वामी का मार्ग

प्रस्तुत है अपने चारों ओर की अफवाहों, गप्पबाजी एवं आलोचना से कैसे निपटा जाये – इस पर मेरा दृष्टिकोण।

हाल ही में मुझे उन सब लोगों से, जो मेरे लिए चिंतित हैं, ढेरों ई-मेल प्राप्त हुए। उनमें से कुछ दुखी थे, कुछ हैरान-परेशान थे व कुछ तो अत्यधिक क्रोध में थे (मुझ पर नहीं)। कारण? अपने उस प्रिय व्यक्ति को ले कर सुनी कुछ बेबुनियाद अफवाहें, जिसे वे अतिशय प्रेम करते हैं व अपना पथ-प्रदर्शक मानते हैं – ओम स्वामी; इस संदर्भ में वह मैं ही हूँ। वे गप्पबाजों को पलट कर जवाब देना चाहते थे। इसने मुझे बुद्ध के जीवन की एक कहानी स्मरण करवा दी। ऐसा कहा…read more

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