ॐ स्वामी

ॐ स्वामी का मार्ग

प्रस्तुत है अपने चारों ओर की अफवाहों, गप्पबाजी एवं आलोचना से कैसे निपटा जाये – इस पर मेरा दृष्टिकोण।

हाल ही में मुझे उन सब लोगों से, जो मेरे लिए चिंतित हैं, ढेरों ई-मेल प्राप्त हुए। उनमें से कुछ दुखी थे, कुछ हैरान-परेशान थे व कुछ तो अत्यधिक क्रोध में थे (मुझ पर नहीं)। कारण? अपने उस प्रिय व्यक्ति को ले कर सुनी कुछ बेबुनियाद अफवाहें, जिसे वे अतिशय प्रेम करते हैं व अपना पथ-प्रदर्शक मानते हैं – ओम स्वामी; इस संदर्भ में वह मैं ही हूँ। वे गप्पबाजों को पलट कर जवाब देना चाहते थे। इसने मुझे बुद्ध के जीवन की एक कहानी स्मरण करवा दी। ऐसा कहा…और पढ़ें

कैसे आकृष्ट न करें

जीवन प्रतिकूलता एवं विरोधाभास से भरा है। प्रकाश और अंधकार, धूप और हिम-पात शांतिपूर्वक मिल जुल कर रहते हैं। ध्यान दें।

कुछ दिनों पहले किसी ने, जो किसी संगठन की सीढ़ी के सबसे निम्न सोपान पर था, मुझे बताया कि कार्यस्थल पर अन्य व्यक्तियों के साथ उसका दिन सर्वदा दुष्कर रहता है। “ऐसा प्रतीत होता है कि मैं सदैव अपने विरोधियों को आकर्षित करता हूँ।” उसने कहा “मुझे कोई पसंद नहीं करता।” “किंतु एक दिन” वह बोला “मैंने रेडियो पर कुछ सुंदर सुना! उसमें कहा गया था ‘नौकरी है तो नाराज़गी क्यों?’ इस एक बात ने मेरे सम्पूर्ण दृष्टिकोण को परिवर्तित कर दिया और फिर मैंने इस बात की परवाह करनी…और पढ़ें

वू – वे : अच्छी चीजों को होने देना

ताओ की एक अति सुंदर धारणा है – वू–वे, जो दर्शाता है कि किस प्रकार यदा कदा पूर्णत: कार्य विमुख हो जाना ही सबसे उत्तम कार्य होता है। एवं, एक घोषणा …

युआन साम्राज्य काल में चीन के सम्राट स्वयं का एक चित्र बनवाने के इच्छुक थे। “मैं अपने आज तक बने किसी भी चित्र से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हूँ।” उनने चित्रकारों के एक बड़े समूह को संबोधित किया। “मेरा एक ऐसा चित्र बनाओ जिसमें मेरे सूक्ष्मतम हाव-भाव भी दर्शाये गए हों – मेरा प्रतिरूप।” सम्राट प्रतिदिन दो घंटे के लिए बैठते और अति कुशल चित्रकार उनका अवलोकन करते, व भिन्न भिन्न कोण लेकर चित्र चित्रांकित करते । पूर्ण समर्पण एवं सतर्कतापूर्वक वे सब अपने अपने कैनवस पर पेंसिल व…और पढ़ें

प्रसन्नता का रहस्य

कभी कभी प्रसन्नता की गहन अनुभूति प्रवाह में न मिल कर निष्क्रियता में मिलती है, जब जीवन आपको चुनौती देता है।

जीवन का हर दिन मंदगति व सुस्त रूप से काटते हुए, अंततः मैं क्या कर रहा हूँ? प्रत्येक विचारपूर्ण व्यक्ति के जीवन में यह प्रश्न अनिवार्य है। इसे आप अस्तित्ववाद अथवा अधेड़ आयु संबंधी संकट काल या फिर चाहे जो कहें। यदि आपने अपना जीवन पुस्तक में लिखे गए नियमों के अनुसार जिया है और दूसरों की अथवा स्वयं की सहायता के लिए सभी कुछ किया है तो यह अवस्था अवश्यंभावी है। अपने जीवन काल में कभी न कभी हर समझदार व्यक्ति इस शून्यता की भावना का शिकार अवश्य होता…और पढ़ें

अपने पश्चाताप के भाव पीछे छोड़ते हुए….

समय-चक्र की अविराम गति में ही बसते हैं हमारे जीवन के सुंदर पल।

एक बार एक महिला, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता थी, वह लोगों को मदिरापान की बुरी लत से छुटकारा पाने में सहायता किया करती थी। उसका एक छोटा सा शहर था, और जब भी वह किसी को मदिरापान करते सुनती तो तत्काल अन्य लोगों के एक छोटे समूह को ले वहाँ पहुँच जाती, ताकि वह उस व्यक्ति से बातचीत कर मदिरा के भयावह परिणामों से अवगत करा सके। उस क्षेत्र में मदिरा पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हो गई, चूंकि कोई भी उस महिला का सामना नहीं करना चाहता था।…और पढ़ें

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