ॐ स्वामी

दस प्रमुख प्राणाधार ऊर्जाएँ

दस प्राणाधार ऊर्जाओं को उपयुक्त शारीरिक मुद्रा, श्वासों के नियमन अथवा चक्रों पर ध्यान द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

अपने विभिन्न लेखों में व अन्य स्थानों पर मैंने दस प्राणाधार ऊर्जाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया था। आज मैं आपके साथ, आपके शरीर में इन ऊर्जाओं का योगिक पक्ष साझा कर रहा हूँ। यह दस प्राणाधार ऊर्जाएँ शरीर की सभी स्वैच्छिक व अनैच्छिक गतिविधियों, प्रतिक्रियाओं, व आदतों को नियंत्रित करती हैं। और, बदले में, इन ऊर्जाओं पर आसन सिद्धि, योगिक मुद्रा के पूर्ण स्वामित्व, श्वासों के नियमन, व एकाग्रतापूर्ण ध्यान द्वारा नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए संस्कृत शब्द है – वायु, जिसका अर्थ है अस्थिर, सूक्ष्म…और पढ़ें

भय का प्रतिकारक

जब भय का तूफान अपने ऊफान पर हो, उस समय शांत व सकारात्मक बने रहने का मार्ग होता है। वह इस प्रकार है...

हम सभी में भय विद्यमान रहते हैं। भविष्य में क्या घट सकता है इस बात का भय; अलमारी में बंद कंकालों का भय; दूसरों व स्वयं के विफल होने का भय। हम भयभीत रहते हैं कि क्या होगा यदि हमारे सबसे भयानक डर सच्च साबित हो गए तो! हमारी अधिकांश चिंताएँ ऐसे ही भय से उत्पन्न होती हैं। हम अपनी सहायता स्वयं करने हेतु पुस्तकें पढ़ते हैं जो हमें बताती हैं “चिंता न करें” अथवा “सकारात्मक रहें”। किन्तु, यह सब अधिकांश समय काम नहीं आता, हर समय तो बिलकुल नहीं।…और पढ़ें

प्रेम और घृणा

प्रेम दैवी है। प्रत्येक मनुष्य में यह अंतर्निहित है, जबकि दूसरी ओर, घृणा हम सीखते हैं।

मुझे हर प्रकार के ई-मेल मिलते हैं। ये स्वयं सेवकों की एक टीम के द्वारा चिह्नित और दर्ज किये जाते हैं। लगभग पचास प्रतिशत पाठक मुझसे, उनके जीवन के क्लेश, कष्टों पर सलाह मांगते हैं। तीस प्रतिशत मुझसे अपनी कृतज्ञता एवं प्रेम व्यक्त करते हैं। कुछ दस प्रतिशत अपने दार्शनिक विचार व्यक्त करते हैं। एक प्रतिशत (या कुछ कम) ई-मेल में मुझसे पूछा जाता है कि वे मेरी या मेरे उद्देश्य की किस प्रकार मदद कर सकते हैं। शेष नौ प्रतिशत मात्र अपनी घृणा व्यक्त करने के लिये ई-मेल लिखते…और पढ़ें

एक मिलियन विचार

“अ मिलियन थोट्स”, यह मेरी ध्यान पर सर्वोत्तम विस्तृत पुस्तक-रचना है। ध्यान पर आपकी अ से ह तक की पथप्रदर्शिका।

यह फरवरी २०११ के अंत का समय था। १०,००० फुट की ऊंचाई पर, हिमालय के एक वन में, जहां उस छप्पर की कुटिया के बाहर बर्फ के हिमलम्ब लटक रहे थे, मैं गहन ध्यानावस्था में बैठा था। तन और मन दोनों की सुदृढ़ स्थिरता में बैठे १० घंटे इतनी सुगमता से व्यतीत हो चुके थे जिस प्रकार रात्रि भोर में रूपांतरित होती है। पूर्ण चंद्रमा की शीतल किरणें मेरे सम्मुख रखे श्री यंत्र पर उतर आईं। यह यंत्र कुंडलिनी अथवा माँ जगजननी का ज्योमितिकीय द्योतक था एवं मेरे उस समय…और पढ़ें

एक आध्यात्मिक अनुभव

प्रस्तुत है एक संत के जीवन की सुंदर कथा जो एक वास्तविक आध्यात्मिक अनुभव को दर्शाती है।

मुझे यह कैसे पता चले कि मैं सही मार्ग पर हूँ? मैं अपनी आध्यात्मिक उन्नति किस तरह मापा करूँ? और, एक सच्चे आध्यात्मिक अनुभव का सूचक क्या होता है? ये वह तीन सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्न हैं जो हर सच्चा साधक अपनी यात्रा के दौरान कभी न कभी मुझसे पूछता है। बहुधा वे अपने अनुभव बताते हैं और मुझसे पूछते हैं कि जो उन्होंने अनुभव किया, क्या वह वास्तविक था। अपने अनुभव पर शंका करना स्वाभाविक है, मुख्य रूप से तब जब किसी गहन आध्यात्मिक लगने वाले प्रकरण के…और पढ़ें

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