ॐ स्वामी

भय का स्रोत

जिस प्रकार एक पौधे का मूल स्रोत बीज होता है, हमारे भय का भी एक स्रोत होता है। अपनी व्यग्रता, डर व आशंकाओं से ऊपर उठने के लिए हमें उनके स्रोत तक पहुंचना होगा।

पेमा चोद्रन (Pema Chödrön) ने ‘वेन थिंग्स फॉल अपार्ट’ (When Things Fall Apart) में अपने गुरु के विषय में एक रोचक घटना का उल्लेख किया है – उनके गुरु तिरुङ्ग्पा रींपोचे – जो एक दृढ़, विवादास्पद, किन्तु स्पष्ट, पारदर्शी व सत्यवादी थे। एक युवा ने एक बार उनसे पूछा कि क्या उन्हें कभी डर लगा? रींपोचे ने उत्तर में कहा कि उनके मठ से जुड़े प्रशिक्षण के अंतर्गत उन्हें शमशान जैसे स्थान पर जाना होता था जो उन्हें भयभीत कर देता; और उन्हें ऐसे विषयों पर चिंतन करना होता था…read more

किसे प्रसन्न रखा जाये

दो व्यक्ति आपस में प्रेम करें, साथ-साथ रहें तथापि वे पृथक मार्गों के पथिक हों – ऐसा अवश्य हो सकता है। प्रेम का अर्थ पूरा समय दूसरे को प्रसन्न रखना ही नहीं होता।

एक दिन एक युवक ने अति सादगीपूर्ण ढंग से मुझसे पूछा, “मुझे किस को प्रसन्न रखना चाहिए? यहाँ तो बहुत से लोग हैं – मेरे माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी, बच्चे, बॉस एवं कई अन्य। इनमें से मैं किसका चयन करूँ, अथवा तो क्या मैं प्रयत्न करूँ व सभी को खुश रखूँ?” “आप सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति को तो भूल गए”, मैंने कहा। “ईश्वर?” “नहीं, आप स्वयं।” अंतत:, दैनिक जीवन की खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि मैं स्वयं को एवं दूसरों को कितना प्रसन्न रख पाता हूँ, और दोनों में…read more

डेफ़ोडिल फूल का सिद्धांत

प्रस्तुत है एक अत्यंत सुंदर कहानी जिसमें जीवन किस प्रकार जिया जाए इस विषय पर प्रेरणाप्रद संदेश निहित है।

प्रत्येक भाषा में कुछ ऐसे अनूठे शब्द होते हैं, जिनका अनुवाद करना संभव नहीं है। जापानी भाषा में ऐसा ही एक शब्द है “वब सबी”। यह मात्र एक शब्द नहीं, वरन एक दर्शन है। यह जीवन जीने का एक मार्ग है। सीधे सीधे कहा जाए तो इसका अर्थ है जीवन की अपूर्णताओं के बीच सुंदरता को खोजना तथा उन्नति व आयु के प्राकृतिक काल चक्र के साथ गरिमापूर्ण विधि से आगे बढ़ते जाना। किंतु ऐसा जीवन जिसमें आप गरिमामय ही नहीं वरन् साथ ही साथ सुखी, कृतज्ञ व शांत भी…read more

ब्लैक लोटस ऐप

ब्लैक लोटस ऐप के विषय में संपूर्ण जानकारी आपको इस लेख में मिल जाएगी।

दो वर्ष पूर्व एक ध्यान के सत्र में मैंने एक ऐसा ऐप बनाने की घोषणा की थी, जिसकी सहायता से हम सभी अपने अपने स्थानों पर रहते हुए भी, एक साथ बैठकर ध्यान कर सकेंगे। इसे मैंने “पिन प्रिक इफ़ेक्ट” नाम दिया था जिसके विषय में मैंने यहाँ पर लिखा था। वैसे देखा जाये तो इसमें कोई नई बात नहीं है क्योंकि इससे पहले भी लोगों ने भौगोिलक परिवर्तन के विचार से समूहों में ध्यान लगाया है। लगभग १२ वर्ष पूर्व एक अत्यंत बुिद्धमान व्यक्ति जिज्ञासा साई ने एक ५ मिनट की…read more

स्वर्ग और नर्क

क्या स्वर्ग और नर्क वास्तव में कहीं हैं अथवा तो वे मात्र एक कल्पना हैं?

“क्या मरणोपरांत हम सच्च में स्वर्ग अथवा नर्क में जाते हैं?” एक दिन किसी ने मुझसे पूछा। “नहीं।” मेरा उत्तर था। “तो क्या आप यह कह रहे हैं कि ग्रंथ मिथ्यावादी हैं?” उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा। इसका प्रत्युत्तर मैंने एक कहानी से दिया जो प्रथम बार मैंने सूफी संत हज़रत इनायत खान के प्रवचन में पढ़ी थी। एक शिष्य गत कई वर्षों से अपने गुरु के सानिध्य में अभ्यासरत था, किन्तु अभी तक वह किसी भी प्रकार के दिव्य अनुभव अथवा किसी भी विषय की सम्पूर्ण जानकारी से वंचित था। एक…read more

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