ॐ स्वामी

एकाग्रता – केन्द्रित होने का अभ्यास

प्रत्येक ध्यान मार्ग के पथिक के लिए एकाग्रता का अभ्यास अनिवार्य है। वास्तव में यही ध्यान का मूल है।

एकाग्रता के विषय पर अपने पिछले लेख में मैंने एकनिष्ठ एकाग्रता का संक्षेप में वर्णन किया था। इस लेख में एकाग्रता के अभ्यास पर विस्तृत चर्चा करेंगे। एकाग्रता का अर्थ है – मन का एक बिन्दु पर केन्द्रित रहना। एकाग्र शब्द का विच्छेद करने पर एक + अग्र (यानि आगे बढ़ना) होता है। इसका अर्थ हुआ – किसी एक चिंतन बिन्दु पर सीमित होते हुए, व्यवस्थित रूप से केन्द्रित हो कर आगे बढ़ना। रस्सी पर चलने वाले व्यक्ति का सोचें कि किस प्रकार वह अपनी सम्पूर्ण वृत्तियों को एकीकृत करके…और पढ़ें

एक जीवन अनेक जीवन

जिस प्रकार नन्ही नन्ही बूंदें श्रेणीबद्ध हो कर एक जलप्रपात बन जाती हैं, उसी प्रकार छोटे छोटे पल व अनुभव मिलकर वह रूप लेते हैं जिसे जीवन कहते हैं।

क्या आपको कभी ऐसी अनुभूति हुई कि आपने अपने जीवन में कोई सार्थक कार्य नहीं किया? अथवा तो यह कि आप अपने स्वप्नों के अनुरूप जीवन नहीं जी पाये? यदि हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। प्रायः, जीवन को हम एक अविभक्त इकाई के रूप में ही देखते हैं। हमें लगता है चूंकि अब हम युवावस्था से बहुत आगे आ चुके हैं, अतः अब सब कुछ खो चुका है। कि, अब अधिक कुछ नहीं किया जा सकता। आज, मैं आपके समक्ष एक भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करना चाहता हूँ। कुछ ऐसा…और पढ़ें

आनंद की पुकार

यदि हम सुखों को ही आनंद समझ बैठें तो यह एक प्राप्ति हो जाती है। जबकि आनंद तो एक यात्रा, एक राह, एक अवस्था है।

हमारे जीवन के कुछ पहलुओं को हम परिवर्तित कर सकते हैं। कुछ पहलुओं को हम नियंत्रित या प्रभावित कर सकते हैं। किंतु बहुत से पक्षों से हमें सामंजस्य बैठाना पड़ता है। यही सबसे बड़ी चुनौती है। यह सरल नहीं है कि जीवन आपको जैसा रखना चाहता है आप वैसे ही बन जाएं। हालाँकि आनंद का सबसे सहज मार्ग तो यही है। इतना सब कहने के पश्चात मेरे आज के लेखन का उद्देश्य यह कतई नहीं कि कुछ समायोजन करने के पश्चात कैसे “प्रसन्न” रहा जाए। आज का विषय आनंद-चित्त होने…और पढ़ें

मौन के चार प्रतिरूप

दिव्य-परमानंद एवं शांति एक विश्रांत मन में उसी प्रकार उदित होते हैं जिस प्रकार एक स्वच्छ सरोवर में सुंदर कमल।

एक बार मैंने एक उक्ति पढ़ी थी कि, “मौन स्वर्ण के समान है… यदि आपके घर में छोटा शिशु नहीं। उस स्थिति में, मौन बहुत संदेहास्पद है।” उदाहरणस्वरूप, क्या आपने कभी गहन रात्रि में व्याप्त मौन में विश्रांति की अनुभूति की है? प्रमुख रूप से एक ऐसे स्थान में जो प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हो। वहाँ की वायु में एक अवर्णननीय ताजगी विद्यमान होती है। आप अपनी देह को स्पर्श कर हिलौरे लेती उस सुखकर, सुहावनी समीर की अनुभूति कर पाते हैं। आप उस भव्य, विशाल, तारों से जगमगाते अंबर…और पढ़ें

संकल्प – दृढ़ता का अभ्यास

बहुधा संकल्प की तुलना पूर्णत: स्थिर व सुदृढ़ हिमालय के साथ की जाती है। एक सच्चे साधक का संकल्प हिमालय के समान होता है।

इस तथ्य से अभिन्न कि आप किस मार्ग के अनुयायी हैं, आपकी सफलता का निर्णय इससे होता है कि आपका पथ पर बने रहने का संकल्प कितना सुदृढ़ है; आप अपनी योग्यता बढ़ाने, कुछ नया अपनाने व समझने के लिए कितने आतुर व उत्साही हैं, व आपकी जिज्ञासा कितनी प्रबल है। संस्कृत भाषा में, निश्चय, वायदा, शपथ आदि के लिए शब्द है – ‘संकल्प’। जब आप एक निर्णय लेते हैं, एक सुदृढ़ विचार बना लेते हैं, इसका अर्थ है कि आपने संकल्प कर लिया है। इस श्रंखला के पिछले लेख…और पढ़ें

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