ॐ स्वामी

जीवन यात्रा

एक दार्शनिक कविता से प्रेरित होकर चिर-प्रसन्नता के मूल पर प्रस्तुत हैं मेरे विचार…

एक दिन संयोगवश मैंने कोरी मुलर की वेबसाइट (यहाँ) पर एक सुंदर कविता की व्याख्या पढ़ी। हालाँकि उसका शीर्षक “दो भाई” था किंतु उसे सरलता से “मनुष्य के अस्तित्व का सत्य” कहा जा सकता है। मुझे उस कविता में इतनी गहराई लगी कि एक पल के लिये मैंने आज के पोस्ट में केवल उस कविता को ही साझा करने का विचार किया। बिना किसी टिप्पणी या मेरे अपने विचारों के। प्रस्तुत है वह कविता – एक पुराने पेड़ के नीचे दो पुत्र पैदा हुए प्यार से स्वतंत्रता से दोनों साथ-…read more

सावधानीपूर्वक पालन पोषण करने के चार पहलू

प्रस्तुत हैं सावधानीपूर्वक पालन पोषण के चार पहलू जो किसी भी शिशु का जीवन रूपांतरित करने की क्षमता रखते हैं...

वैदिक ग्रन्थों में एक पद बहुधा प्रयोग में लाया जाता है – उसे “ब्रहमचारी” शब्द दिया गया है। इसे बारंबार एवं अपने संकुचित रूप में अविवाहित जीवन के रूप में प्रतिपादित किया जाता है। किन्तु इसके वास्तविक अर्थ का संयम/परिवर्जन से अतिन्यून संबंध है। ब्रहमचारी का अर्थ है वह जिसका आचरण ब्रह्म के समान हो। इस परिपेक्ष्य में, बौद्ध ग्रंथ ऐसे मनुष्य को “ब्रहम विहारी” कहते हैं – ऐसा व्यक्ति जिसका व्यवहार उत्कृष्ट एवं दिव्य हो। ऐसे व्यक्तित्व के चार पहलू होते हैं। आप इन चार को व्यवहार में लाएँ…read more

अभिभावकीय करुणा

यदि आप आवश्यकता से अधिक संरक्षात्मक होने जा रहे हैं तो उन्हें स्वावलंबी होने में अत्याधिक समय लगेगा – भावनात्मक स्तर पर भी और अन्य प्रकार से भी।

“मैं सदा से एक अच्छा अभिभावक रहा हूँ और मैंने अपने बच्चों का हर कदम पर साथ दिया है,” एक, कुछ व्यथित से, अभिभावक ने मुझे कुछ सप्ताह पूर्व कहा, “और, फिर भी वे वास्तव में मेरा आदर नहीं करते। वे अपने अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं और मुझे कहते हैं कि मैं सदा से एक असहनीय पिता रहा हूँ। मुझे यह समझ नहीं आता। मैंने सदा उन्हें प्रेम किया है, उन्हें उनकी इच्छानुसार हर कार्य करने की छूट दी है। उन्हें सबसे बढ़िया कपड़े मिले,…read more

एक आध्यात्मिक अनुभव

प्रस्तुत है एक संत के जीवन की सुंदर कथा जो एक वास्तविक आध्यात्मिक अनुभव को दर्शाती है।

मुझे यह कैसे पता चले कि मैं सही मार्ग पर हूँ? मैं अपनी आध्यात्मिक उन्नति किस तरह मापा करूँ? और, एक सच्चे आध्यात्मिक अनुभव का सूचक क्या होता है? ये वह तीन सर्वाधिक पूछे जाने वाले प्रश्न हैं जो हर सच्चा साधक अपनी यात्रा के दौरान कभी न कभी मुझसे पूछता है। बहुधा वे अपने अनुभव बताते हैं और मुझसे पूछते हैं कि जो उन्होंने अनुभव किया, क्या वह वास्तविक था। अपने अनुभव पर शंका करना स्वाभाविक है, मुख्य रूप से तब जब किसी गहन आध्यात्मिक लगने वाले प्रकरण के…read more

भय का प्रतिकारक

जब भय का तूफान अपने ऊफान पर हो, उस समय शांत व सकारात्मक बने रहने का मार्ग होता है। वह इस प्रकार है...

हम सभी में भय विद्यमान रहते हैं। भविष्य में क्या घट सकता है इस बात का भय; अलमारी में बंद कंकालों का भय; दूसरों व स्वयं के विफल होने का भय। हम भयभीत रहते हैं कि क्या होगा यदि हमारे सबसे भयानक डर सच्च साबित हो गए तो! हमारी अधिकांश चिंताएँ ऐसे ही भय से उत्पन्न होती हैं। हम अपनी सहायता स्वयं करने हेतु पुस्तकें पढ़ते हैं जो हमें बताती हैं “चिंता न करें” अथवा “सकारात्मक रहें”। किन्तु, यह सब अधिकांश समय काम नहीं आता, हर समय तो बिलकुल नहीं।…read more

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