ॐ स्वामी

एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति

प्रस्तुत है एक सुंदर सी लघु कथा, आध्यात्मिक प्रवृत्ति की महत्त्व्ता एवं उसका अर्थ उजागर करती हुई।

सुभूति, बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक थे व बहुत समय से अपने गुरु की शिक्षाओं को चहुं ओर पहुंचाने के इच्छुक थे। एक सुबह, जब बुद्ध जेतवन में आए हुए थे, तो सुभूति ने उनके ठहरने के स्थान, गंडकुटीर के बाहर बुद्ध को दंडवत प्रणाम किया, व उनके संदेश को चारों दिशाओं में फैलाने हेतु उनकी आज्ञा मांगी। “उठो सुभूति,” बुद्ध ने कहा। “शिक्षक बनना कोई सरल कार्य नहीं होता। यदि आप बहुत अच्छे शब्द भी कह रहे होंगे, तब भी ऐसे बहुत से लोग होंगे तो आपकी…read more

नियति या स्वेच्छा

क्या भाग्य नियंत्रित करता है कि आप कहाँ पहुँचेंगे या आपकी स्वतंत्र इच्छा शक्ति?

क्या सब कुछ पूर्वनिर्धारित है या हमारे पास स्वतंत्र इच्छा शक्ति है? अंततः यदि सब कुछ पूर्वनिर्धारित है तब हम अपने स्वप्नों को पूर्ण करने हेतु कोई प्रयास क्यों करें और यदि यह हमारे हाथों में है, तब हम जीवन में असहाय और अप्रत्याशित परिस्थितियों के माध्यम से क्यों जाते हैं? मात्र कुछ दिनों पूर्व आश्रम के वार्षिकोत्सव के पर्यंत मैंने एक वक्ता द्वारा कही गयी सुंदर कथा सुनी जिसमें देवी माँ की महिमा का वर्णन किया गया था। ४५० से भी अधिक वर्ष पूर्व, भारत में मल्लुक दास नामक…read more

जीवन का उद्देश्य

जिस प्रकार एक नदिया, सागर में विलीन होने से पूर्व, इधर-उधर मार्ग बनाते व आगे बढ़ते हुए, चहुं ओर जीवन्तता बहाती चलती है; हमारे जीवन का उद्देश्य भी उसी के समान है – एक सम्पूर्ण जीवन जीना व अपनी ही भव्यता में विलीन हो जाना।

मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है? मैं अपना उद्देश्य कैसे ढूंढू? ये दो प्रश्न बहुधा मुझसे उन लोगों द्वारा पूछे जाते हैं जिनके जीवन में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है। जब आपका पेट भी वैसे ही भरा होता है जैसे आपका बैंक बैलेन्स, और आपको नींद नहीं आ रही होती, तब स्वाभाविक ही आप बैठ कर सोचते हैं (अथवा चिंता करते हैं) कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है। बहुत हद तक ऐसा प्रतीत होता है मानो हम जीवन में ऐसा कुछ चाहते हैं जो हमें विचारमग्न व…read more

अनित्यता

जो कुछ भी इंद्रियगोचर है, उसमें से कुछ भी स्थायी नहीं। यह मेघ, चंद्रमा, तारागण, हमारा ग्रह, सब कुछ निरंतर परिवर्तित हो रहा है।

कभी कभी मैं आश्चर्यचकित होता हूँ कि प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति हम इतने अनिच्छुक क्यों रहते हैं? कुछ भी ऐसा जो हमारी अपेक्षाओं के साथ तारतम्य नहीं रखता, हम उसे दुःख की संज्ञा दे देते हैं। चाहे वह कोई कठिन व्यक्ति हो, अथवा परिस्थिति या समस्या हो, जो कुछ भी हमें बेचैन करने की क्षमता रखता है वह हमारे लिए अवांछनीय हो जाता है। अतिशय तीव्रता से। हम उससे अपना पीछा छुड़ाना चाहते हैं। इच्छा रखना, स्वभावतः, कोई समस्या नहीं है, चूँकि हमारे भौतिक अथवा आध्यात्मिक – किसी भी प्रकार…read more

आखिर मैं ही क्यों?

अच्छे व्यक्तियों को क्यों कष्ट प्राप्त होता है या वे उस पीड़ा से क्यों गुज़रते हैं जिसके वे योग्य नहीं?

आखिर मैं ही क्यों? मुझे आज तक ऐसा कोई नहीं मिला जिसने अपने जीवन में कभी न कभी यह प्रश्न न पूछा हो। अधिकांश व्यक्ति जो अपनी दुखद गाथा लेकर मेरे पास आते हैं वे पूछते हैं, “आखिर यह मेरे साथ क्यों हो रहा है?” यह एक स्वभाविक प्रश्न है। हम सभी ने इस विषय पर सोचा है। मैं आपसे एक छोटी सी कहानी साझा करता हूँ। आर्थर ऐश (१९४३-९३) एक उभरते टेनिस खिलाड़ी थे जिनमें असीम क्षमता थी। अपने करियर के ३३ ख़िताबों के साथ, जिनमें ३ ग्रैंड स्लैम…read more

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