ॐ स्वामी

निर्भीकता का बीज

उचित पालन-पोषण द्वारा एक बालक को जीवन में सत्यवादी व निर्भीक बनने में सहायता कर पाना संभव है।

यह मई १९८६ का समय था। मैं ६ १/२ वर्ष का था व अभी अभी अपने विद्यालय की द्वितीय कक्षा में उन्नीत हुआ था। सब कुछ बहुत रसहीन था। मेरी कक्षा के सभी पीरियड एक ही अध्यापिका लेती थीं। प्रतिदिन घर जा कर मुझे वह सब जो कक्षा में हर विषय में पढ़ाया जाता, वह पुनः लिखना होता था। यही हमारा गृहकार्य होता था। हर दिन, प्रतिदिन। उदाहरण स्वरूप, यदि मैंने कक्षा में गणित के ५ प्रश्न व अंग्रेजी में ५ वाक्य किए हैं तो मुझे घर जाकर वैसे का…read more

जब आपके शब्द कष्ट पहुँचा सकते हों

क्या करें यदि आपकी करुणा प्राप्तकर्ता के विकास के लिए प्रतिकूल हो? आप आनंदप्रद होने या लाभप्रद होने के बीच में चुनाव कैसे करते हैं?

महान ज्ञानी चाणक्य सर्वोकृष्ट विचारक थे और भारत के अत्यंत शक्तिशाली राजाओं में से एक, चंद्रगुप्त मौर्य (३२१-२९७ ई-पू), के मुख्य सलाहकार थे। वास्तविकता में चाणक्य मात्र एक विश्वसनीय सलाहकार ही नहीं थे। क्योंकि उन्होंने चंद्रगुप्त को, जब चंद्रगुप्त मात्र छोटे बच्चे थे, ले कर, प्रशिक्षित कर, उन्हें शासक बना दिया था। वह एक बार नवोदित राजा को सलाह दे रहे थे जब उनमें निम्नलिखित वार्तालाप हुआ। “एक राजा का जीवन, त्यागपूर्ण जीवन है। उसे दूसरों के लिए जीना चाहिए”। फिर चाणक्य ने सूर्य की ओर संकेत करते हुए कहा…read more

जीवन के चार सत्य

मानव अस्तित्व के चार सत्यों पर प्रस्तुत है मेरा संस्करण

“मेरी ईश्वर से मात्र एक इच्छा है”, एक नवयुवती ने मुझसे कहा, “क्षमा। क्षमा के अतिरिक्त मेरी कोई अभिलाषा नहीं।” “मेरे पिता एच-आई-वी पॉजिटिव थे और उनके अंतिम दिन अत्यंत दुखदायी थे।” उस नवयुवती ने आगे सुनाया “वे हिल भी नहीं सकते थे और उन्हें निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी। मुझे उनसे इतनी घृणा हो गयी थी कि मैंने उनकी पूर्णतया उपेक्षा की। मेरी माँ परिवार के लिये रोटी कमाने वालीं अकेली सदस्य थीं और वे सारा समय घर पर नहीं रह सकती थीं। मैं अपने पिता की देखभाल कर…read more

एक मिलियन विचार

“अ मिलियन थोट्स”, यह मेरी ध्यान पर सर्वोत्तम विस्तृत पुस्तक-रचना है। ध्यान पर आपकी अ से ह तक की पथप्रदर्शिका।

यह फरवरी २०११ के अंत का समय था। १०,००० फुट की ऊंचाई पर, हिमालय के एक वन में, जहां उस छप्पर की कुटिया के बाहर बर्फ के हिमलम्ब लटक रहे थे, मैं गहन ध्यानावस्था में बैठा था। तन और मन दोनों की सुदृढ़ स्थिरता में बैठे १० घंटे इतनी सुगमता से व्यतीत हो चुके थे जिस प्रकार रात्रि भोर में रूपांतरित होती है। पूर्ण चंद्रमा की शीतल किरणें मेरे सम्मुख रखे श्री यंत्र पर उतर आईं। यह यंत्र कुंडलिनी अथवा माँ जगजननी का ज्योमितिकीय द्योतक था एवं मेरे उस समय…read more

व्यापक – विपथन के शस्त्र

सोशल मीडिया के कारण हमारे भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर पड़ता कुप्रभाव अतिशय वास्तविक है।

मैं गत माह सिंगापुर से विमान द्वारा लौट रहा था। वह ५ १/२ घंटे की हवाई यात्रा थी। समीप की सीट, जो मात्र एक छोटे से आने जाने के मार्ग भर की दूरी पर थी, एक बालक बैठा था जो लगभग १२ वर्ष के आसपास का होगा। साथ में उसकी बहन बैठी थी मात्र कुछ वर्ष बड़ी। वे विमान में आने वाले आखिरी यात्री थे व बिलकुल अंतिम क्षणों में ही विमान पर सवार हो पाये थे। दस मिनट के भीतर ही विमान ने उड़ान भर ली। जैसे ही हमारा…read more

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