ॐ स्वामी

उद्देश्य की शुद्धता

जब आपका ध्यान एक वस्तु पर केंद्रित हो और आपका उद्देश्य शुद्ध हो, तो सफलता के सुगंधित पुष्प सहजतः ही खिल उठेंगे।

कृपया मुझे आशीर्वाद दें कि मैं अपने व्यापार में सफल हो सकूं। मैं बहुत सारा धन अर्जित करना चाहता हूँ, परंतु अपने लिये नहीं। मैं दूसरे व्यक्तियों की मदद करने हेतु धन अर्जन करना चाहता हूँ। क्या आपने लोगों को यह कहते सुना है – कि उनके व्यापार करने का या धन कमाने का एकमात्र कारण, या मुख्य कारण यह है कि वे उससे दूसरों की मदद कर सकें? मैंने सुना है। कईं बार। यह बात मुझे हास्यजनक लगती है, क्योंकि स्थायी व्यापार दूसरों की मदद करने के इरादे से…read more

जब दान करें

क्या होगा यदि प्रकृति हमें कुछ देते समय हम से उसी प्रकार की अपेक्षा रखे, जैसी अपेक्षा हम किसी को कुछ देते हुए रखते हैं?

क्या आपने यह ध्यान दिया है कि जब हम किसी को कुछ देते हैं, या जब हम किसी के लिये कुछ अच्छा कर पाते हैं, तो स्वयं कितना सुख अनुभव करते हैं? यदि दूसरा व्यक्ति हमारी भेंट की कद्र करता है या प्रतिदान करता है तो यह प्रसन्नता की अनुभूति कई गुना बढ़ जाती है। यहाँ तक तो सब ठीक है। परंतु कई बार अच्छा करने के बाद भी जो प्रतिदान की आशा हमें होती है, वह हमें प्राप्त नहीं होता। आप उनके लिये जो भी कर रहे हैं वे…read more

अच्छाई से क्या लाभ?

चाहे बादल कईं रंग ले कर आएं, परंतु आकाश पुनः नीला हो जाता है। अपनी अच्छाई न त्यागें।

कुछ सप्ताह पूर्व कैनडा में एक मृदुभाषी और बुद्धिमान नवयुवक मेरे पास आया और उसने मुझसे एक प्रश्न पूछा जो अधिकांश लोगों के लिए महत्वपूर्ण प्रासंगिकता का प्रश्न है। वह अपने पियानो गायन प्रस्तुति के लिये जा रहा था और उसकी माँ ने बताया था कि उसे अन्य छात्रों के लिये तालियाँ बजानी चाहिये एवं उन्हें शुभकामनाएं देनी चाहिये। “स्वामीजी मैं सदैव यही करता हूँ।” उसने मुझसे कहा, “परंतु कोई भी मेरे लिये ताली नहीं बजाता। माँ शुभकामनाएं देने को कहती हैं। मैं सदा ऐसा ही करता हूँ, परंतु कोई…read more

कैसे आकृष्ट न करें

जीवन प्रतिकूलता एवं विरोधाभास से भरा है। प्रकाश और अंधकार, धूप और हिम-पात शांतिपूर्वक मिल जुल कर रहते हैं। ध्यान दें।

कुछ दिनों पहले किसी ने, जो किसी संगठन की सीढ़ी के सबसे निम्न सोपान पर था, मुझे बताया कि कार्यस्थल पर अन्य व्यक्तियों के साथ उसका दिन सर्वदा दुष्कर रहता है। “ऐसा प्रतीत होता है कि मैं सदैव अपने विरोधियों को आकर्षित करता हूँ।” उसने कहा “मुझे कोई पसंद नहीं करता।” “किंतु एक दिन” वह बोला “मैंने रेडियो पर कुछ सुंदर सुना! उसमें कहा गया था ‘नौकरी है तो नाराज़गी क्यों?’ इस एक बात ने मेरे सम्पूर्ण दृष्टिकोण को परिवर्तित कर दिया और फिर मैंने इस बात की परवाह करनी…read more

वू – वे : अच्छी चीजों को होने देना

ताओ की एक अति सुंदर धारणा है – वू–वे, जो दर्शाता है कि किस प्रकार यदा कदा पूर्णत: कार्य विमुख हो जाना ही सबसे उत्तम कार्य होता है। एवं, एक घोषणा …

युआन साम्राज्य काल में चीन के सम्राट स्वयं का एक चित्र बनवाने के इच्छुक थे। “मैं अपने आज तक बने किसी भी चित्र से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हूँ।” उनने चित्रकारों के एक बड़े समूह को संबोधित किया। “मेरा एक ऐसा चित्र बनाओ जिसमें मेरे सूक्ष्मतम हाव-भाव भी दर्शाये गए हों – मेरा प्रतिरूप।” सम्राट प्रतिदिन दो घंटे के लिए बैठते और अति कुशल चित्रकार उनका अवलोकन करते, व भिन्न भिन्न कोण लेकर चित्र चित्रांकित करते । पूर्ण समर्पण एवं सतर्कतापूर्वक वे सब अपने अपने कैनवस पर पेंसिल व…read more

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